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RBI Bank Credit Data Feb 2026: नॉन-फूड बैंक क्रेडिट में 14.3% की बढ़ोतरी.
भारतीय अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य को मापने का सबसे अच्छा तरीका यह देखना है कि बैंक कितना लोन बांट रहे हैं. जब कंपनियां और आम लोग ज्यादा लोन लेते हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि देश में निवेश और खपत (Consumption) बढ़ रही है.
आरबीआई की ताजा रिपोर्ट एक बहुत ही सकारात्मक तस्वीर पेश कर रही है. पिछले साल के मुकाबले इस बार लगभग हर सेक्टर में डबल डिजिट ग्रोथ देखी गई है. आइए, इस रिपोर्ट के महत्वपूर्ण आंकड़ों का विश्लेषण करते हैं.
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नॉन-फूड क्रेडिट वह पैसा है जो बैंक कृषि, उद्योग और व्यक्तिगत जरूरतों के लिए देते हैं. बता दें कि इसमें भारतीय खाद्य निगम को दिया जाने वाला अनाज ऋण शामिल नहीं होता. पिछले साल फरवरी में नॉन फूड क्रेडिट में 11.1% की वृद्धि देखी गई थी, जो इस साल फरवरी में बढ़कर 14.3% हो गई है. यानी पिछले एक साल में ऋण लेने की रफ्तार में 3.2% का बड़ा सुधार हुआ है.
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A. सर्विस सेक्टर (Services Sector)- सबसे तेज
इस सेक्टर ने 16.3% की सबसे ऊंची विकास दर दर्ज की है, पिछले साल यह 11.7% थी. बैंकों की तरफ से NBFCs (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) और कमर्शियल रियल एस्टेट को दिए गए भारी कर्ज ने इसे सपोर्ट किया है.
B. पर्सनल लोन (Personal Loans)
आम लोगों की तरफ से लिए जाने वाले लोन में 15.2% की बढ़त दिखी है, पिछले साल 11.7% थी. हाउसिंग सेक्टर में स्थिर बढ़त रही, जबकि व्हीकल लोन और गोल्ड ज्वेलरी के बदले लोन में बहुत तेज उछाल देखा गया.
C. इंडस्ट्री (Industry)
औद्योगिक ऋण में 13.5% की वृद्धि हुई, जो पिछले साल के 7.5% के मुकाबले लगभग दोगुनी है. इंफ्रास्ट्रक्चर, इंजीनियरिंग, केमिकल्स, पेट्रोलियम उत्पाद और टेक्सटाइल (कपड़ा उद्योग) ने इस ग्रोथ को लीड किया है.
D. एग्रीकल्चर (Agriculture)
कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए लोन में 12.3% की स्थिर वृद्धि दर्ज की गई, पिछले साल 11.4% थी.
| नॉन-फूड क्रेडिट | 11.1% | 14.3% | बढ़त |
| सर्विस सेक्टर | 11.7% | 16.3% | सबसे तेज |
| पर्सनल लोन | 11.7% | 15.2% | मजबूत |
| इंडस्ट्री (उद्योग) | 7.5% | 13.5% | भारी उछाल |
| कृषि (Agri) | 11.4% | 12.3% | स्थिर |
आर्थिक मजबूती: इंडस्ट्री सेक्टर में 13.5% की ग्रोथ बताती है कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर के काम बहुत तेजी से चल रहे हैं.
मिडिल क्लास की डिमांड: पर्सनल लोन और व्हीकल लोन में उछाल यह दर्शाता है कि लोगों की खर्च करने की क्षमता और भरोसा (Consumer Confidence) बढ़ा है.
रियल एस्टेट में जान: कमर्शियल रियल एस्टेट को मिले कर्ज से पता चलता है कि ऑफिस स्पेस और मॉल जैसे प्रोजेक्ट्स में निवेश वापस आ रहा है.
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आरबीआई का यह डेटा साफ संकेत दे रहा है कि भारतीय बैंकिंग सिस्टम मजबूत है और अर्थव्यवस्था के पहिए पूरी रफ़्तार से घूम रहे हैं. विशेष रूप से इंडस्ट्री और सर्विसेज में बढ़ता क्रेडिट यह सुनिश्चित करेगा कि आने वाले समय में रोजगार के नए अवसर पैदा हों.
1- नॉन-फूड क्रेडिट क्या होता है?
बैंकों द्वारा अनाज की खरीद (Food Procurement) के अलावा बाकी सभी क्षेत्रों जैसे व्यक्तिगत, व्यापारिक और कृषि को दिए जाने वाले कुल कर्ज को नॉन-फूड क्रेडिट कहते हैं.
2- NBFCs को मिलने वाले कर्ज से आम आदमी को क्या फायदा?
जब बैंकों से NBFCs को पैसा मिलता है, तो वे आगे चलकर छोटे शहरों और गांवों में लोगों को आसान शर्तों पर कार, घर या बिजनेस लोन दे पाते हैं.
3- क्या व्हीकल लोन में बढ़त से गाड़ियां महंगी होंगी?
नहीं, बल्कि लोन की बढ़ती मांग से ऑटो सेक्टर को फायदा होता है, जिससे नई गाड़ियां लॉन्च करने और बाजार में सप्लाई बढ़ाने में मदद मिलती है.
4- इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा कर्ज किसे मिला?
आरबीआई के अनुसार, इंफ्रास्ट्रक्चर, इंजीनियरिंग और टेक्सटाइल सेक्टर को सबसे अधिक ऋण वितरित किया गया है.
5- यह डेटा कितने बैंकों पर आधारित है?
यह देश के 41 प्रमुख शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों के डेटा पर आधारित है, जो भारत के कुल बैंकिंग बिजनेस का लगभग 95% कवर करते हैं.
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