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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता और नियमों की सख्ती बनाए रखने के लिए एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता और नियमों की सख्ती बनाए रखने के लिए एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है. मई 2026 के पहले हफ्ते में ही केंद्रीय बैंक ने नियमों की अनदेखी करने वाले 5 अलग-अलग बैंकों पर बड़ा एक्शन लिया है. 4 मई से 8 मई के बीच की गई यह कार्रवाई निजी क्षेत्र के बैंकों से लेकर सहकारी और ग्रामीण बैंकों तक फैली हुई है.
आरबीआई की यह कार्रवाई साफ संदेश देती है कि ग्राहकों के हितों और बैंकिंग अनुशासन से समझौता करने वाले संस्थानों को बख्शा नहीं जाएगा. आइए समझते हैं कि किन 5 बैंकों पर यह जुर्माना लगा है और उनके पीछे की वजह क्या थी.
निजी क्षेत्र के दिग्गज यस बैंक पर आरबीआई ने ₹31.80 लाख का भारी जुर्माना लगाया है. 8 मई को जारी आदेश के अनुसार, बैंक 'अपने ग्राहक को जानें' (Know Your Customer - KYC) से जुड़े निर्देशों का पालन करने में विफल रहा. आरबीआई की जांच में पाया गया कि बैंक ने ग्राहकों के साथ खाता-आधारित संबंध स्थापित करने के लिए 'सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री' (CKYC) द्वारा सौंपे गए केवाईसी पहचानकर्ता (KYC Identifier) का उपयोग करने के लिए जरूरी सिस्टम स्थापित नहीं किया था. यह सुरक्षा के लिहाज से एक गंभीर चूक मानी गई, जिसके चलते बैंक पर यह कार्रवाई हुई.
हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक पर आरबीआई ने ₹5 लाख का मौद्रिक जुर्माना लगाया है. नाबार्ड (NABARD) द्वारा किए गए निरीक्षण में पाया गया कि बैंक ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 26A का उल्लंघन किया है. बैंक दो प्रमुख मोर्चों पर विफल रहा: पहला, उसने निर्धारित समय सीमा के भीतर लावारिस जमा राशि (Unclaimed Deposits) को 'जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता कोष' (DEA Fund) में ट्रांसफर नहीं किया. दूसरा, बैंक ने कुछ सावधि जमा (Term Deposits) पर उनकी परिपक्वता तिथि से लेकर भुगतान की तारीख तक ब्याज नहीं दिया था.
महाराष्ट्र के पंढरपुर अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक पर आरबीआई ने ₹2 लाख का जुर्माना लगाया है. बैंक पर आरोप है कि उसने 'एसेट क्लासिफिकेशन और एनपीए (NPA)' से जुड़े नियमों की धज्जियां उड़ाईं. बैंक ने एक ऐसा कदम उठाया जो बैंकिंग नैतिकता के खिलाफ माना जाता है—बैंक ने कुछ ऐसे कर्जदारों को अतिरिक्त ऋण सुविधाएं (Additional Credit) दे दीं, जिनका पुराना लोन पहले से ही एनपीए (Non-Performing) हो चुका था. ऐसा करना लोन को छिपाने या उसे 'एवरग्रीन' करने की कोशिश माना जाता है, जिसे आरबीआई ने गंभीर चूक पाया.
कोल्हापुर स्थित यूथ डेवलपमेंट को-ऑपरेटिव बैंक पर ₹40,000 का जुर्माना लगाया गया है. इस बैंक पर भी केवाईसी नियमों और 'इनऑपरेटिव अकाउंट्स' (निष्क्रिय खातों) से जुड़ी गाइडलाइन्स के उल्लंघन का आरोप सिद्ध हुआ. आरबीआई ने पाया कि बैंक ने कुछ ऐसे खातों को फिर से सक्रिय (Activate) कर दिया था जो लंबे समय से निष्क्रिय पड़े थे, और ऐसा करते समय ग्राहकों से जरूरी केवाईसी दस्तावेज भी प्राप्त नहीं किए गए थे. यह वित्तीय सुरक्षा और जालसाजी रोकने के नियमों का सीधा उल्लंघन है.
मुंबई के मोगवीरा को-ऑपरेटिव बैंक पर आरबीआई ने ₹20,000 का जुर्माना लगाया है. इस बैंक ने 'पूंजी पर्याप्तता' (Capital Adequacy - CRAR) से जुड़े नियमों की अनदेखी की. नियमों के मुताबिक, यदि किसी बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) नियामक द्वारा निर्धारित न्यूनतम स्तर से नीचे चला जाता है, तो वह शेयर पूंजी वापस नहीं कर सकता. लेकिन मोगवीरा बैंक ने अपना सीआरआर (CRAR) कम होने के बावजूद कई मौकों पर शेयर पूंजी का रिफंड किया, जिसके कारण आरबीआई ने यह दंडात्मक कार्रवाई की.

आरबीआई की इन कार्रवाइयों का उद्देश्य ग्राहकों के लेन-देन को अवैध नहीं ठहराना है, बल्कि बैंकों को उनके प्रशासनिक और नियामक कर्तव्यों की याद दिलाना है. केवाईसी (KYC) और एनपीए (NPA) प्रबंधन में की गई जरा सी भी ढिलाई पूरी बैंकिंग व्यवस्था को संकट में डाल सकती है. ग्राहकों के लिए सलाह है कि वे अपने बैंक के साथ केवाईसी नियमों का पालन करें और समय-समय पर अपने खातों की स्थिति की जांच करते रहें. केंद्रीय बैंक की यह सतर्कता ही भारतीय बैंकिंग प्रणाली को वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय बनाए रखती है.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 क्या आरबीआई के जुर्माने से ग्राहकों के पैसे पर असर पड़ता है?
नहीं, यह जुर्माना बैंक की नियामक कमियों के कारण बैंक पर लगाया जाता है. इससे ग्राहकों की जमा राशि या लेन-देन की वैधता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता.
Q2 केवाईसी (KYC) नियमों का पालन न करने पर जुर्माना क्यों लगता है?
केवाईसी नियम मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी रोकने के लिए बनाए गए हैं. इनका पालन न करने से बैंकिंग सिस्टम में अवैध गतिविधियों का खतरा बढ़ जाता है.
Q3 DEA फंड क्या होता है?
अगर किसी खाते में 10 साल तक कोई लेन-देन नहीं होता, तो वह पैसा 'अनक्लेम्ड डिपॉजिट' मानकर 'डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस' (DEA) फंड में डाल दिया जाता है.
Q4 सीआरआर (CRAR) क्या होता है?
कैपिटल टू रिस्क-वेटेड एसेट्स रेश्यो (CRAR) बैंक की अपनी पूंजी का उसकी जोखिम भरी संपत्ति के साथ अनुपात होता है, जो बैंक की मजबूती दर्शाता है.
Q5 क्या सहकारी बैंकों पर नियम अलग होते हैं?
सहकारी बैंक भी बैंकिंग विनियमन अधिनियम के दायरे में आते हैं और उन्हें आरबीआई के अधिकांश सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी है.