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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मंगलवार को देश की पेमेंट सिस्टम्स की निगरानी के लिए Payments Regulatory Board (PRB) का गठन कर दिया है. यह बोर्ड अब तक काम कर रही Board for Regulation and Supervision of Payment and Settlement System (BPSS) की जगह लेगा. खास बात यह है कि इस नए बोर्ड में पहली बार केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है.
कौन-कौन होंगे इस बोर्ड में
Payments Regulatory Board कुल 6 सदस्यों का होगा. इसकी अध्यक्षता RBI गवर्नर करेंगे. इसमें RBI के दो सदस्य होंगे – एक डिप्टी गवर्नर और एक एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (जो पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम के प्रभारी होंगे).
इसके अलावा RBI का प्रिंसिपल लीगल एडवाइज़र इस बोर्ड की बैठकों में स्थायी आमंत्रित के तौर पर शामिल रहेगा.
BPSS और PRB में क्या अंतर है
पहले BPSS नाम का 5 सदस्यीय बोर्ड होता था जिसकी अध्यक्षता भी RBI गवर्नर ही करते थे. लेकिन उसमें किसी भी सरकारी प्रतिनिधि की जगह नहीं थी. अब PRB में सीधे तीन केंद्रीय प्रतिनिधियों को शामिल कर लिया गया है. यानी यह बोर्ड पहले से ज्यादा व्यापक और जवाबदेह होगा.
कितनी बार होगी बैठक
नोटिफिकेशन के अनुसार, Payments Regulatory Board की बैठक साल में कम से कम दो बार जरूर होगी. जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बैठकें भी बुलाई जा सकती हैं.
क्यों बनाया गया नया बोर्ड
भारत में डिजिटल पेमेंट सिस्टम तेजी से बढ़ रहा है. UPI, नेटबैंकिंग, कार्ड पेमेंट और वॉलेट्स के बढ़ते इस्तेमाल के बीच सुरक्षा, पारदर्शिता और निगरानी को मजबूत करना जरूरी हो गया था. PRB का गठन इसी दिशा में किया गया कदम है. अब देश के भुगतान और सेटलमेंट सिस्टम पर निगरानी और भी मजबूत होगी.
इसका फायदा आम लोगों को कैसे होगा
इस नए बोर्ड के आने से डिजिटल ट्रांजैक्शन पर निगरानी और सख्त होगी. ग्राहकों को धोखाधड़ी और तकनीकी गड़बड़ियों से बेहतर सुरक्षा मिलेगी. साथ ही, पेमेंट सिस्टम्स को लेकर नीतियां बनाने में सरकार और RBI दोनों की सीधी भूमिका रहेगी.