पैसों की हुई कमी.. कमाई की भी उम्मीद नहीं, ग्राहकों के पैसों पर मंडराने लगा खतरा, तो RBI ने किया इस बैंक का लाइसेंस रद्द!

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कर्नाटक के गोकाक में स्थित 'श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक लिमिटेड' का लाइसेंस रद्द कर दिया है. 18 जून 2026 को कारोबार की समाप्ति के बाद से यह बैंक बैंकिंग कामकाज नहीं कर सकेगा. हालांकि, राहत की बात यह है कि करीब 97.90% जमाकर्ता डीआईसीजीसी (DICGC) से अपनी पूरी जमा राशि वापस पाने के हकदार हैं.
पैसों की हुई कमी.. कमाई की भी उम्मीद नहीं, ग्राहकों के पैसों पर मंडराने लगा खतरा, तो RBI ने किया इस बैंक का लाइसेंस रद्द!

RBI ने कर्नाटक के श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया है. प्रतीकात्मक फोटो

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सेक्टर में नियमों की अनदेखी करने वाले बैंकों पर अपनी सख्त कार्रवाई जारी रखी है. एक नए आदेश के तहत आरबीआई ने कर्नाटक के गोकाक में स्थित 'श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक लिमिटेड' का लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया है.

बैंकिंग विनियमन अधिनियम (Banking Regulation Act), 1949 की धारा 22 और धारा 56 के तहत जारी इस आदेश के बाद यह बैंक 18 जून 2026 को कारोबार की समाप्ति के बाद से किसी भी तरह का बैंकिंग कामकाज नहीं कर सकेगा. इसके साथ ही कर्नाटक के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार से बैंक को बंद करने (लिक्विडेशन) और इसके लिए एक परिसमापक (Liquidator) नियुक्त करने का अनुरोध किया गया है.

पर्याप्त पूंजी और कमाई की उम्मीद न होना बनी वजह

केंद्रीय बैंक ने इस सहकारी बैंक का लाइसेंस रद्द करने के पीछे कई बड़े और गंभीर कारण बताए हैं. आरबीआई के मुताबिक, इस बैंक के पास वर्तमान में न तो पर्याप्त पूंजी बची है और न ही भविष्य में कमाई की कोई बेहतर संभावना दिख रही है. यह बैंक बैंकिंग विनियमन अधिनियम के कई महत्वपूर्ण प्रावधानों और शर्तों को पूरा करने में पूरी तरह से विफल साबित हुआ है.

आरबीआई का मानना है कि अगर इस बैंक को आगे भी काम करने की अनुमति दी जाती, तो इससे आम जनता और बैंक के जमाकर्ताओं (Depositors) के हितों को भारी नुकसान पहुंचता. मौजूदा वित्तीय स्थिति के कारण यह बैंक अपने जमाकर्ताओं का पूरा पैसा वापस लौटाने की स्थिति में भी नहीं था.

जमा और निकासी समेत सभी सेवाओं पर लगा तत्काल प्रतिबंध

लाइसेंस रद्द होने के बाद 'श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक लिमिटेड' पर तत्काल प्रभाव से 'बैंकिंग' व्यवसाय करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है. अब यह बैंक न तो आम जनता से किसी भी प्रकार की नई जमा राशि (Deposits) स्वीकार कर पाएगा और न ही पुराने जमाकर्ताओं के पैसों का भुगतान (Repayment) कर सकेगा. बैंक का कोई भी डिजिटल या फिजिकल लेन-देन अब पूरी तरह से अमान्य और गैर-कानूनी माना जाएगा.

जमाकर्ताओं को मिलेगा 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर

बैंक के बंद होने की प्रक्रिया (Liquidation) शुरू होने के बाद, प्रत्येक जमाकर्ता को 'जमा विमान और क्रेडिट गारंटी निगम' (DICGC) अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत 5,00000 रुपये (पांच लाख रुपये) तक की मौद्रिक सीमा तक अपनी जमा राशि का बीमा दावा प्राप्त करने का पूरा अधिकार होगा. बैंक द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, इस सहकारी बैंक के लगभग 97.90% जमाकर्ता ऐसे हैं जो डीआईसीजीसी (DICGC) से अपनी पूरी की पूरी जमा राशि वापस पाने के हकदार हैं, क्योंकि उनकी जमा रकम 5 लाख रुपये या उससे कम है.

88.21 करोड़ रुपये का पहले ही हो चुका है भुगतान

आरबीआई ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि जमाकर्ताओं को राहत देने का काम पहले ही शुरू किया जा चुका है. 9 जून 2026 तक की स्थिति के मुताबिक, डीआईसीजीसी (DICGC) संबंधित जमाकर्ताओं से मिली सहमति और इच्छा के आधार पर डीआईसीजीसी अधिनियम की धारा 18ए के तहत कुल बीमित जमा राशि में से 88.21 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही कर चुका है. शेष पात्र जमाकर्ताओं को भी तय प्रक्रिया के तहत उनके दावों का निपटारा कर जल्द ही भुगतान कर दिया जाएगा.

Conclusion

आरबीआई द्वारा श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द करना यह दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक जमाकर्ताओं के पैसे की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है. हालांकि बैंक का बंद होना किसी भी खाताधारक के लिए चिंता का विषय होता है, लेकिन 5 लाख रुपये तक के डीआईसीजीसी (DICGC) इंश्योरेंस कवर और 97.90% ग्राहकों का पैसा पूरी तरह सुरक्षित होने की खबर से गोकाक के स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिलेगी. 88 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान पहले ही हो जाना यह प्रमाणित करता है कि संकट के समय में भी देश का वित्तीय सुरक्षा तंत्र काफी तेजी से काम कर रहा है.

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