&format=webp&quality=medium)
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने Alternative Investment Funds (AIFs) में निवेश को लेकर नए नियमों का ऐलान किया है. ये नियम 1 जनवरी 2026 से लागू होंगे. यह कमर्शियल बैंक, नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां यानी एनबीएफसी (NBFCs) और को-ऑपरेटिव बैंक सभी पर लागू होंगे.
RBI का यह कदम AIF में बढ़ते जोखिम को कंट्रोल करने और बैंकों के पूंजी ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में उठाया गया है. अब बैंकों को निवेश करते समय कई शर्तों और सीमाओं का पालन करना होगा.
नए नियमों के मुताबिक, अब कोई भी एक रेगुलेटेड एंटिटी (RE) किसी एक AIF स्कीम में 10% से ज्यादा निवेश नहीं कर सकेगी. साथ ही, अगर कई REs मिलकर एक ही स्कीम में पैसा लगा रहे हैं, तो कुल निवेश 20% से ज्यादा नहीं हो सकता. इससे AIF स्कीम में बड़े पैमाने पर होने वाले एकतरफा निवेश को रोका जा सकेगा और रिस्क को डाइवर्सिफाई किया जा सकेगा.
अगर कोई AIF किसी ऐसी कंपनी में निवेश करता है जो पहले से ही कर्जदार है (debtor company) और उस कंपनी में RE का निवेश 5% से ज्यादा है, तो ऐसे में 100% provisioning जरूरी होगी. यानी उस निवेश के पूरे अमाउंट को बैंकों को अपने खातों से अलग दिखाना होगा.
नए नियमों के तहत अगर कोई RE किसी AIF की subordinated units (जो प्राथमिकता में सबसे नीचे आती हैं) में निवेश करता है, तो उसे अपनी regulatory capital में से घटाना होगा. यानी इस निवेश को सुरक्षित कैपिटल नहीं माना जाएगा.
RBI ने यह भी साफ किया है कि जो निवेश पहले से RBI की मंजूरी के तहत किए गए हैं, उन पर नए नियम लागू नहीं होंगे. साथ ही, कुछ स्पेशल AIFs को नियमों से छूट मिल सकती है.
अगर किसी RE ने 1 जनवरी 2026 से पहले किसी AIF में पैसा लगाने का वादा किया है, तो वह तय कर सकता है कि वह पुराने नियमों को अपनाए या नए नियमों के तहत निवेश करे.
RBI ने दिसंबर 2023 और मार्च 2024 में AIF को लेकर जो सर्कुलर जारी किए थे, उन्हें अब रद्द कर दिया गया है. यानी अब इन नए नियमों के लागू होने के बाद वही मान्य होंगे.