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बैंकिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
Reserve Bank of India यानी RBI ने बैंकिंग सेक्टर के लिए बड़ा ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया है. आरबीआई ने कैपिटल एडिक्वेसी नॉर्म्स में बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत अब बैंकों को अपनी फाइनेंशियल स्थिति और रिस्क से जुड़ी ज्यादा जानकारी सार्वजनिक करनी होगी. यह बदलाव इंटरनेशनल बेसल नॉर्म्स के अनुरूप किए जाने का प्रस्ताव है.
RBI के ड्राफ्ट के मुताबिक सिर्फ लिस्टेड बैंक ही नहीं, बल्कि सभी बैंकों को ज्यादा फाइनेंशियल जानकारी सार्वजनिक करनी होगी. बैंकों को रिस्क, कैपिटल और लिक्विडिटी से जुड़ी डिटेल जानकारी निवेशकों और जनता के सामने रखनी होगी.
इसके अलावा हर बैंक को अपनी डिस्क्लोजर पॉलिसी तैयार करनी होगी, जिसे उसके बोर्ड से मंजूरी लेनी जरूरी होगी. RBI ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि बैंक डायरेक्टर्स को डिस्क्लोजर्स की सटीकता की पुष्टि करनी होगी.
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ड्राफ्ट नॉर्म्स के तहत बैंकों को अपनी वेबसाइट पर अलग डिस्क्लोजर सेक्शन बनाना होगा. यहां फाइनेंशियल डिस्क्लोजर्स, लीवरेज रेशियो और रिस्क से जुड़ी जानकारी उपलब्ध करानी होगी. RBI ने यह भी कहा है कि बैंकों को डिस्क्लोजर्स का रिकॉर्ड कम से कम 10 साल तक सुरक्षित रखना होगा. इसका मकसद ट्रांसपेरेंसी और रेगुलेटरी मॉनिटरिंग को मजबूत करना है.
नए प्रस्ताव के तहत बैंकों को हर तिमाही अपना लीवरेज रेशियो सार्वजनिक करना होगा. साथ ही RBI को भी इसकी तिमाही रिपोर्टिंग करनी होगी. इसके अलावा बैंकों को अपने कैपिटल पोजिशन, लिक्विडिटी प्रोफाइल और रिस्क एक्सपोजर से जुड़ी ज्यादा जानकारी साझा करनी होगी. RBI का मानना है कि इससे बैंकिंग सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी बेहतर होगी.
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RBI का यह ड्राफ्ट इंटरनेशनल बेसल नॉर्म्स के अनुरूप तैयार किया गया है. बेसल स्टैंडर्ड्स का उद्देश्य ग्लोबल बैंकिंग सिस्टम को ज्यादा मजबूत और पारदर्शी बनाना है. RBI ने प्रस्तावित ड्राफ्ट पर स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे हैं. नए नियम 30 सितंबर 2026 से लागू हो सकते हैं.