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RBI बाजार में नकदी बढ़ाने और रुपये को सहारा देने के लिए $5 बिलियन का डॉलर-रुपया स्वाइप ऑक्शन करने जा रहा है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के बैंकिंग सिस्टम में नकदी (Liquidity) बढ़ाने और रुपये को मजबूती देने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय बैंक ने $5 बिलियन (5 अरब अमेरिकी डॉलर) के डॉलर-रुपया स्वाइप ऑक्शन (Swap Auction) यानी अदला-बदली की नीलामी करने का ऐलान किया है.
अगर इसे बिल्कुल आसान शब्दों में समझें, तो इस कदम के जरिए बैंक रिजर्व बैंक को अमेरिकी डॉलर सौंपेंगे और बदले में आरबीआई से भारतीय रुपये लेंगे. इससे बैंकों के पास लोन देने और बाजार में चलाने के लिए पैसों (रुपयों) की कमी पूरी होगी. यह नीलामी 26 मई को एक घंटे की विंडो के दौरान आयोजित की जाएगी.
आरबीआई ने साफ किया है कि यह कदम बैंकिंग प्रणाली की दीर्घकालिक यानी टिकाऊ नकदी आवश्यकताओं (Durable Liquidity Needs) को पूरा करने के लिए उठाया गया है. आइए इसके पीछे के मुख्य कारण और उसके असर के बारे में जानते हैं.
पिछले कुछ महीनों में वैश्विक अनिश्चितता के माहौल के चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार और अन्य एसेट्स से अरबों डॉलर निकाल लिए हैं. जब विदेशी निवेशक भारत से अपना पैसा निकालते हैं, तो वे रुपये को डॉलर में बदलते हैं, जिससे बाजार में डॉलर की मांग बढ़ जाती है और भारतीय रुपया कमजोर होने लगता है. इस दबाव को कम करने के लिए आरबीआई को बाजार में दखल देना पड़ा है.
इस $5 बिलियन के स्वाइप ऑक्शन के जरिए बैंकों के पास रखे अतिरिक्त डॉलर आरबीआई के पास चले जाएंगे और उसके बदले बाजार में भारी मात्रा में भारतीय करेंसी (रुपया) आ जाएगी. जब बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त रुपया होगा, तो बैंकों के लिए नकदी का संकट खत्म होगा और वे आम उपभोक्ताओं व कॉरपोरेट्स को आसानी से लोन दे सकेंगे.
यह एक निश्चित समय के लिए किया गया सौदा है. 26 मई 2026 को डॉलर के बदले जो रुपया बैंकों को मिलेगा, उसका इस्तेमाल वे 3 साल तक कर सकेंगे. इसके बाद, यानी साल 2029 में, बैंक आरबीआई को रुपया लौटाकर अपने डॉलर वापस ले लेंगे. इससे बाजार में नकदी का संतुलन बना रहता है.
आरबीआई का $5 बिलियन डॉलर का करेंसी स्वाइप ऑक्शन भारतीय अर्थव्यवस्था और बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक सही समय पर लिया गया सुरक्षात्मक फैसला है. इससे न केवल बैंकों को अपनी जरूरतों के लिए पर्याप्त कैश मिलेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहे रुपये को भी एक मजबूत सहारा मिलेगा. विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच केंद्रीय बैंक का यह कदम बाजार में स्थिरता लाने में बेहद मददगार साबित होगा.
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