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भारत के Public Sector Banks ने FY 2025–26 में ₹1.98 लाख करोड़ का रिकॉर्ड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
भारत के Public Sector Banks ने FY 2025–26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ₹1.98 लाख करोड़ का रिकॉर्ड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है. यह अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक लाभ माना जा रहा है. लगातार चौथे साल सरकारी बैंकों ने मुनाफा कमाया है, जिससे यह साफ संकेत मिला है कि देश के सरकारी बैंक अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत और स्थिर स्थिति में पहुंच चुके हैं.
सरकारी बैंकों के बिजनेस, डिपॉजिट और लोन ग्रोथ में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली है. FY 2025–26 में PSBs का कुल बिजनेस बढ़कर ₹283.3 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जबकि Gross Advances में 15.7% की बढ़ोतरी हुई और ये ₹127 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गए. साथ ही NPA में लगातार गिरावट और रिकवरी में सुधार ने बैंकों की बैलेंस शीट को और मजबूत किया है.
सरकारी बैंकों ने इस वित्त वर्ष में Operating Profit के मामले में भी मजबूत प्रदर्शन किया है. कुल Operating Profit बढ़कर ₹3.21 लाख करोड़ पहुंच गया, जो यह दिखाता है कि बैंकों की कमाई केवल ब्याज तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनकी परिचालन क्षमता भी बेहतर हुई है.
मुनाफे में लगातार बढ़ोतरी ने सरकारी बैंकों की निवेश क्षमता और बाजार भरोसे को मजबूत किया है. चौथे लगातार साल लाभ दर्ज करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि PSBs अब पुराने खराब ऋण संकट से काफी हद तक बाहर निकल चुके हैं और स्थिर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं.
डिपॉजिट ग्रोथ: FY 2025–26 में सरकारी बैंकों के कुल डिपॉजिट बढ़कर ₹156.3 लाख करोड़ हो गए. यह पिछले साल की तुलना में 10.6% ज्यादा है. बढ़ते डिपॉजिट यह दिखाते हैं कि आम लोगों का सरकारी बैंकों पर भरोसा लगातार मजबूत बना हुआ है.
लोन ग्रोथ: सरकारी बैंकों के Gross Advances में 15.7% की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज हुई और कुल लोन ₹127 लाख करोड़ तक पहुंच गए. बढ़ती क्रेडिट डिमांड और मजबूत आर्थिक गतिविधियों का सीधा फायदा बैंकिंग सेक्टर को मिला है.
Retail Loan Growth: Retail सेक्टर में 18.1% की शानदार क्रेडिट ग्रोथ दर्ज हुई. Home Loan, Auto Loan और Personal Loan की बढ़ती मांग ने इस सेगमेंट को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है.
Agriculture और MSME Growth: Agriculture Loan Growth 15.5% और MSME Loan Growth 18.2% रही. इससे साफ है कि छोटे कारोबार और कृषि क्षेत्र में क्रेडिट सपोर्ट लगातार बढ़ रहा है, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
Gross NPA Ratio: सरकारी बैंकों का Gross NPA Ratio घटकर 1.93% रह गया है, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है. इससे यह पता चलता है कि खराब कर्जों पर नियंत्रण पहले की तुलना में काफी बेहतर हुआ है.
Net NPA और Recovery: Net NPA Ratio घटकर सिर्फ 0.39% रह गया है. वहीं FY 2025–26 में बैंकों ने ₹86,971 करोड़ की रिकवरी की. Fresh Slippage Ratio भी घटकर 0.7% पर आ गया, जिससे Asset Quality में बड़ा सुधार देखने को मिला है.
Capital Adequacy मजबूत: PSBs की Capital Adequacy Ratio बढ़कर 16.6% हो गई है, जो नियामकीय आवश्यकता 11.5% से काफी ज्यादा है. इससे यह संकेत मिलता है कि सरकारी बैंकों के पास भविष्य की आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त पूंजी मौजूद है.
नई पूंजी जुटाना: FY 2025–26 में सरकारी बैंकों ने ₹50,551 करोड़ की नई पूंजी भी जुटाई है. इससे बैंकों को भविष्य में क्रेडिट विस्तार और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
FY 2025–26 सरकारी बैंकों के लिए बेहद मजबूत और ऐतिहासिक साल साबित हुआ है. रिकॉर्ड नेट प्रॉफिट, कम NPA, तेज लोन ग्रोथ और मजबूत Capital Adequacy ने यह दिखाया है कि भारत के Public Sector Banks अब पहले से कहीं ज्यादा स्थिर और मजबूत स्थिति में हैं. आने वाले समय में यह प्रदर्शन देश की अर्थव्यवस्था और क्रेडिट ग्रोथ को और मजबूती दे सकता है.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 PSB क्या होते हैं?
PSB यानी Public Sector Banks ऐसे बैंक होते हैं जिनमें सरकार की हिस्सेदारी 50% से ज्यादा होती है. ये बैंक देश की बैंकिंग व्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं.
Q2 Gross Advances क्या होते हैं?
Gross Advances बैंकों द्वारा ग्राहकों को दिए गए कुल लोन को कहा जाता है. इसमें सभी तरह के Retail, Business और Corporate Loan शामिल होते हैं.
Q3 NPA क्या होता है?
NPA यानी Non-Performing Asset ऐसा लोन होता है जिसकी EMI या ब्याज तय समय तक जमा नहीं होता.
Q4 Gross NPA और Net NPA में क्या अंतर होता है?
Gross NPA कुल खराब ऋण दिखाता है, जबकि Net NPA में Provision घटाने के बाद वास्तविक जोखिम दिखाया जाता है.
Q5 Retail Loan किन लोन को कहा जाता है?
Home Loan, Car Loan, Personal Loan और Education Loan जैसे व्यक्तिगत ऋण Retail Loan की श्रेणी में आते हैं.