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भारत के सरकारी बैंकों (Public Sector Banks-PSBs) ने इस बार ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने देश के बैंकिंग सेक्टर में नई उम्मीदें जगा दी हैं. वित्तीय सेवाएं विभाग (Department of Financial Services-DFS) की अर्धवार्षिक समीक्षा बैठक (H1 FY2025–26 Review) में यह साफ दिखा कि सरकारी बैंक न सिर्फ मुनाफा कमा रहे हैं, बल्कि डिजिटल परफॉर्मेंस (Digital Performance) और एसेट क्वालिटी (Asset Quality) के मामले में भी रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं.
बैंकों का कुल नेट प्रॉफिट (Net Profit) अब ₹93,675 करोड़ तक पहुंच चुका है, जो अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन है. इससे यह साफ है कि बैंक अब सिर्फ लोन देने वाले संस्थान नहीं, बल्कि देश के आर्थिक विकास (Economic Growth) के प्रमुख स्तंभ बन चुके हैं.
2025-26 की पहली छमाही में पब्लिक सेक्टर बैंकों ने शानदार वित्तीय प्रदर्शन किया. बैंकों का कुल बिजनेस बढ़कर ₹261 लाख करोड़ हो गया। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का नेट प्रॉफिट 93,675 करोड़ तक पहुंच गया. Gross NPA घटकर 2.30% पर और शुद्ध एनपीए (Net NPA) 0.45% तक चला गया है, जो कई सालों का सबसे निचला स्तर है.
यह आंकड़े इस बात का सबूत हैं कि सरकारी बैंक अब पहले जैसी मुश्किल स्थिति से बाहर निकल चुके हैं और अब एक स्ट्रॉन्ग, प्रॉफिटेबल और सस्टेनेबल बैंकिंग सिस्टम की दिशा में बढ़ रहे हैं. यह सुधार बैंकों के बेहतर रिस्क मैनेजमेंट (Risk Management), सख्त निगरानी, और क्रेडिट मॉनिटरिंग सिस्टम की वजह से आया है.
सरकारी बैंकों ने इस बार विशेष रूप से MSME (Micro, Small and Medium Enterprises) और एग्रीकल्चर सेक्टर (Agriculture Sector) में लोन फ्लो बढ़ाने पर जोर दिया है. यह दो सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं.
इसका लक्ष्य छोटे उद्योगों के लिए सस्ता क्रेडिट उपलब्ध कराना है. साथ ही किसानों को लो-इंटरेस्ट एग्रीकल्चर लोन देना और महिला उद्यमियों (Women Entrepreneurs) के लिए विशेष लोन स्कीम लॉन्च करना है. इससे ग्रामीण भारत में फाइनेंशियल इंक्लूजन (Financial Inclusion) को भी बढ़ावा मिल रहा है.
वित्तीय सेवाएं विभाग ने बताया कि अब सरकारी बैंक तेजी से डिजिटल रूपांतरण (Digital Transformation) की ओर बढ़ रहे हैं. UPI, JanSamarth Portal, और AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम ने बैंकिंग को आसान और सुरक्षित बनाया है. इस बैठक में PSB Manthan 2025 रिपोर्ट भी जारी की गई, जिसमें भारत के विकसित राष्ट्र बनने के रोडमैप को दिखाया गया है.
भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अब उस दौर में हैं, जहां वे सिर्फ सरकारी संस्थान नहीं, बल्कि इकोनॉमिक इंजिन बन चुके हैं. एनपीए घटे हैं, प्रॉफिट बढ़ा है, और डिजिटल बैंकिंग ने बैंकिंग को और पारदर्शी बनाया है. भविष्य का भारत अब “विकसित भारत 2047” की दिशा में चल पड़ा है और इस सफर के सबसे भरोसेमंद साथी होंगे हमारे Public Sector Banks. “बैंक अब सिर्फ पैसे रखने की जगह नहीं, बल्कि भारत के विकास की धड़कन बन चुके हैं.”
₹93,675 करोड़, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है.
Gross NPA 2.30% और Net NPA 0.45% है.
₹261 लाख करोड़ तक पहुंच गया है.
MSME, कृषि, ग्रीन फाइनेंस और डिजिटल बैंकिंग.
यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जहां अब स्टार्टअप्स के लिए लोन मॉड्यूल भी लॉन्च किया गया है.
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