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PSU बैंकों पर बड़ा फैसला ले सकती है मोदी सरकार
मोदी सरकार (Modi Government) एक बार फिर सरकारी बैंकों के ढांचे को मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में अहम कदम उठाने की तैयारी कर रही है. सरकार चाहती है कि देश में कुछ ऐसे बड़े और मजबूत बैंक हों जो ग्लोबल स्तर पर भी मुकाबला कर सकें. इसके लिए कई स्तरों पर विचार-विमर्श चल रहा है और जल्द ही बड़े फैसले लिए जा सकते हैं.
विदेशी निवेश से मिल सकती है मजबूती
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार अब पब्लिक सेक्टर बैंकों यानी सरकारी बैंकों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा बढ़ाने पर विचार कर रही है. अभी की व्यवस्था में सरकारी बैंकों में विदेशी निवेश की सीमा सीमित है, लेकिन सरकार चाहती है कि इसमें ढील दी जाए ताकि बड़े निवेशकों को आकर्षित किया जा सके. इससे बैंकों की पूंजी स्थिति बेहतर होगी और वे ज्यादा मजबूती से आर्थिक विकास में योगदान दे सकेंगे.
मर्जर की दिशा में बढ़ सकते हैं कदम
सरकार इस दिशा में भी सोच रही है कि कुछ सरकारी बैंकों का आपस में विलय (Merger) कर दिया जाए. इससे कमज़ोर बैंकों को मजबूत बैंकों से जोड़ा जा सकेगा और एक बड़े नेटवर्क के साथ उनकी सेवा क्षमता भी बढ़ेगी. इससे बैंकिंग सेक्टर में कंपटीशन बढ़ेगी, सर्विसेज में सुधार होगा और ग्राहकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी.
नए बैंक परमिट पर भी विचार
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार बैंक परमिट यानी नए बैंकों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया की भी समीक्षा कर सकती है. बीते कुछ वर्षों में भारत में कुछ ही नए बैंक खोले गए हैं, लेकिन अब सरकार चाहती है कि बैंकिंग सेक्टर में नई जान फूंकी जाए. खास तौर पर डिजिटल बैंकिंग के दौर में, सरकार ऐसे संस्थानों को प्रोत्साहित करना चाहती है जो तकनीक की मदद से देश के दूरदराज़ इलाकों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचा सकें.
यहां देखें Video: Bank डूब गया तो क्या होगा? आपकी FD और Savings का पैसा कितना सुरक्षित हैं?
बड़े बैंक बनाने की कोशिश
मोदी सरकार का फोकस अब बड़े बैंक बनाने पर है. यानी भारत के सरकारी बैंक इतने बड़े, मजबूत और आधुनिक हों कि वे सिर्फ देश ही नहीं, दुनिया के दूसरे देशों में भी काम कर सकें. इसके लिए जरूरी है कि उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो, मैनेजमेंट प्रोफेशनल हो और निवेश की कोई कमी न हो. यही वजह है कि सरकार अब विदेशी पूंजी को आकर्षित करने और बैंकों को मर्ज करने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है.
अभी शुरुआती चरण में है योजना
हालांकि, यह पूरी योजना अभी विचार के स्तर पर है. सरकार ने इस पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन रिपोर्ट्स बता रही हैं कि आने वाले समय में इस दिशा में कोई बड़ा ऐलान हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो सरकारी बैंकिंग सिस्टम में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, जो सीधे देश की अर्थव्यवस्था पर असर डालेगा.