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पीआईबी (PIB) फैक्ट चेक ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस दावे की सच्चाई बताते हुए बड़ा अलर्ट जारी किया है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
डिजिटल दौर में जहां बैंकिंग सुविधाएं आसान हुई हैं, वहीं साइबर अपराधियों (Cyber Fraudsters) के हौसले भी बुलंद हो गए हैं. आजकल जालसाज लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए देश की सबसे भरोसेमंद संस्थाओं के नाम का सहारा ले रहे हैं. ऐसा ही एक नया मामला सामने आया है, जहां भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नाम पर एक फर्जी ईमेल सोशल मीडिया और इंटरनेट पर तेजी से घूम रहा है.
इस ईमेल में दावा किया जा रहा है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया 'डोनेशन प्रोग्राम 2026' (Donation Program 2026) चला रहा है या फिर लोगों को लॉटरी जीतने के बदले मुआवजा राशि (Lottery Compensation) दे रहा है. इसके लिए लोगों से क्रेडिट फीस या प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर पैसों की मांग की जा रही है.
जब यह मामला सरकार के संज्ञान में आया, तो प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक टीम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस दावे की पूरी सच्चाई सामने रखी. पीआईबी फैक्ट चेक ने साफ किया है कि यह ईमेल पूरी तरह से फर्जी (Fake) है और रिजर्व बैंक ऐसी कोई भी योजना नहीं चला रहा है.
सरकार के मुताबिक, यह ईमेल असल में एक 'फिशिंग' (Phishing) हमला है. इसका एकमात्र मकसद भोले-भाले लोगों को लालच देकर उनके साथ धोखाधड़ी करना, उनसे पैसे ऐंठना और उनकी संवेदनशील फाइनेंशियल जानकारी चुराना है.
साइबर ठग इस फर्जी ईमेल के जरिए लोगों का भरोसा जीतने के लिए आरबीआई के नाम का इस्तेमाल करते हैं और फिर उनसे नीचे दी गई जरूरी जानकारियां मांगते हैं:
पीआईबी ने साफ तौर पर कहा है कि न तो आरबीआई और न ही कोई अन्य सरकारी अथॉरिटी इस तरह का कोई डोनेशन प्रोग्राम, लॉटरी मुआवजा, इनहेरिटेंस फंड (उत्तराधिकार कोष) या इससे जुड़ी कोई योजना चला रही है. लोग भारी-भरकम रकम मिलने के लालच में आकर किसी भी तरह का एडवांस पेमेंट या प्रोसेसिंग फीस देने की गलती बिल्कुल न करें.
ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए एक्सपर्ट्स और सरकार ने नागरिकों को कुछ बेहद जरूरी सलाह दी हैं:
संदेहास्पद लिंक्स से बचें: ईमेल या मैसेज में आए किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें.
गोपनीयता बनाए रखें: अपने बैंक की डिटेल, पासवर्ड, ओटीपी (OTP) या कोई भी व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ शेयर न करें.
पैसे मांगने वाले मैसेज को नजरअंदाज करें: अगर कोई ईमेल एडवांस पेमेंट या फीस की मांग करता है, तो उसे तुरंत इग्नोर करें.
ऑफिशियल सोर्स से जांचें: किसी भी स्कीम या जानकारी की पुष्टि केवल सरकार या आरबीआई की ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए ही करें.
अगर आपको भी केंद्र सरकार, आरबीआई या किसी सरकारी योजना से जुड़ा कोई संदिग्ध ईमेल या मैसेज मिलता है, तो आप इसकी शिकायत सीधे पीआईबी फैक्ट चेक टीम से इन माध्यमों के जरिए कर सकते हैं:
व्हाट्सएप (WhatsApp) नंबर: +91 8799711259
ईमेल आईडी: factcheck@pib.gov.in
साइबर अपराधी अक्सर लोगों के लालच और डर का फायदा उठाते हैं. आरबीआई जैसी प्रतिष्ठित संस्था के नाम पर आने वाले लॉटरी या डोनेशन के ईमेल पूरी तरह फर्जी होते हैं, क्योंकि केंद्रीय बैंक कभी भी आम जनता से सीधा इस तरह का वित्तीय व्यवहार नहीं करता है. सतर्क रहें, जागरूक रहें और ऐसे किसी भी झांसे में आकर अपनी गाढ़ी कमाई न गंवाएं.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 पीआईबी (PIB) फैक्ट चेक क्या है और यह क्या काम करता है?
यह भारत सरकार की एक आधिकारिक एजेंसी है, जो सरकार, सरकारी योजनाओं और संस्थानों से जुड़ी फर्जी खबरों (फेक न्यूज) और फ्रॉड दावों की सच्चाई सामने लाती है.
Q2 क्या आरबीआई (RBI) कभी आम जनता को सीधे कोई लॉटरी, इनाम या फंड ट्रांसफर करता है?
नहीं, आरबीआई एक केंद्रीय बैंक है जो आम जनता के साथ सीधे पैसों का लेनदेन, लॉटरी या कोई व्यक्तिगत इनाम योजना नहीं चलाता है.
Q3 फिशिंग (Phishing) ईमेल क्या होते हैं और इनसे कैसे बचें?
ये ऐसे फर्जी ईमेल होते हैं जो दिखने में असली बैंक या सरकारी संस्था जैसे लगते हैं, इनसे बचने के लिए कभी भी इनमें दिए गए लिंक्स पर क्लिक न करें.
Q4 साइबर ठग लोगों को फंसाने के लिए आरबीआई (RBI) के नाम का ही इस्तेमाल क्यों करते हैं?
आरबीआई देश की सबसे बड़ी और भरोसेमंद वित्तीय संस्था है, इसलिए जालसाज इसके नाम का दुरुपयोग करते हैं ताकि लोग उनके झांसे में आसानी से आ जाएं.
Q5 क्या पीआईबी फैक्ट चेक किसी भी निजी या कमर्शियल खबर की भी जांच करता है?
नहीं, पीआईबी फैक्ट चेक मुख्य रूप से केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों, योजनाओं और आरबीआई जैसे सरकारी संस्थानों से जुड़ी खबरों और दावों की ही प्रामाणिकता की जांच करता है.