कई बार लोन लेते समय गारंटर की जरूरत पड़ती है. जब कोई दोस्त या रिश्तेदार आपसे कोई लोन गारंटर बनने के लिए कहता है तो आप रिश्ते का लिहाज करते हुए हां कह देते हैं और उसके लोन के गारंटर बन जाते हैं. लेकिन इस मामले में इमोशनल होकर नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल होकर सोचने की जरूरत है क्योंकि लोन लेने वाले के साथ-साथ लोन गारंटर की भी कई जिम्मेदारियां होती हैं. ऐसे में उधारकर्ता की गलतियों का खामियाजा गारंटर को भी भुगतना पड़ सकता है. कैसे? यहां समझ लीजिए.
1/5अगर लोन की रकम बहुत ज्यादा हो और डिफॉल्ट जोखिम ज्यादा लग रहा हो तो गारंटर की जरूरत पड़ती है. बैंक को कर्जदार के पर्याप्त डॉक्यूमेंट्स न मिल पाएं, कर्जदार का निजी क्रेडिट स्कोर खराब हो, मुख्य कर्जदार की उम्र ज्यादा हो या पेशा जोखिम वाला हो या फिर बैंक की नीतिगत जरूरत में लोन गारंटर शामिल हो तो ऐसे में लोन गारंटर की जरूरत पड़ती है.
2/5उधारकर्ता के साथ-साथ लोन गारंटर की भी कई जिम्मेदारियां होती हैं. इसके लिए गारंटर से भी कागजों पर दस्तखत करवाए जाते हैं. डिफॉल्ट की स्थिति में बैंक पहले लोन लेने वाले को नोटिस भेजता है. जवाब न मिलने पर गारंटर को भी नोटिस भेजा जाता है. अगर कर्ज लेने वाला उस कर्ज को नहीं चुका पाता तो गारंटर को उस लोन को चुकाने की जिम्मेदारी लेनी होगी.
3/5लोन गारंटर बनने का एक ये भी नुकसान है कि अगर लोन लेने वाला अपना कर्ज नहीं चुका पाता है तो उसकी लोन की रकम आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में लायबिलिटी के तौर पर दिखेगी. इससे आपका भी सिबिल स्कोर खराब होगा. सिबिल स्कोर खराब होने का पहला तो नुकसान ये है कि आप कभी खुद लोन लेना चाहेंगे तो आपको परेशानी हो सकती है. इसके अलावा ये भी संभव है कि आप दोबारा जल्दी किसी के गारंटर नहीं बन पाएं.
4/5अगर आप ये सोचते हैं कि लोन गारंटर बनने के बाद आप अपनी इस जिम्मेदारी से आसानी से पीछे हट सकते हैं, तो आपको ये जान लेना चाहिए कि आपके पास पीछे हटने के सीमित विकल्प ही होते हैं. आप तभी पीछे हट सकते हैं, जब आपको इसके लिए बैंक की स्वीकृति मिले. बैंक या कोई अन्य वित्तीय संस्थान आपको तभी स्वीकृति देगा, जब लोन लेने वाला व्यक्ति लोन चुकाने का कोई संतोषजनक विकल्प दे.
5/5लोन गारंटर बनने से पहले ये समझ लेना चाहिए कि जिस व्यक्ति के लिए आप गारंटर बन रहे हैं, उसकी आर्थिक स्थिति कैसी है और वो लोन चुकाने में किस हद तक सक्षम है. इसके अलावा आप लोन लेने वाले व्यक्ति को बीमा कंपनी से लोन प्रोटेक्शन पॉलिसी खरीदने के लिए तैयार करें. ऐसे में किसी तरह की अनहोनी होने पर उस लोन को चुकाने की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की होगी.