अक्सर लोग चेक के पीछे साइन तो कर देते हैं, लेकिन जानते नहीं कि इसका असली कारण क्या है.लेकिन गर सही तरीके से साइन न किया जाए तो भुगतान में दिक्कत आ सकती है या फ्रॉड का खतरा बढ़ सकता है.तो इसलिए इस नियम को जानना बेहद जरूरी है.
1/7कई बार लोग चेक के पीछ साइन को लेकर कंफ्यूजन में रहते हैं कि इसके पीछे साइन करें या फिर नहीं.इसी कंफ्यूजन में कुछ लोग साइन कर देते हैं तो कुछ बिना समझें ब्लैंक छोड़ देते हैं. लेकिन सभी इसकी सच्चाई को समझा है आपने. असल में साइन इस बात पर निर्भर करता है कि चेक किस प्रकार का है और उसे कौन कैश करा रहा है.चेक के कंफ्यूजन को दूर करने के लिए चेक के दोनों प्रकार को समझें.
2/7बेयरर चेक सबसे आम लेकिन सबसे रिस्क भरा चेक मानते हैं. इसमें पेमेंट पाने वाले का नाम और उसके आगे “Or Bearer” लिखा होता है, जिसका मतलब है कि यह चेक जिस किसी के पास होगा, वह सीधे बैंक काउंटर पर जाकर पैसा निकाल सकता है. इसमें पहचान की सख्त जांच नहीं होती है, तो इसलिए अगर यह चेक खो जाए या गलत हाथों में पड़ जाए, तो कोई भी इसे कैश करा सकता है.इसलिए ऐसे चेक को संभालकर रखना जरूरी है.
3/7अकाउंट पेयी चेक को सबसे सेफ चेक माना जाता है, क्योंकि इसमें धोखाधड़ी का रिस्क बहुत कम होता है. इस चेक के ऊपरी बाएं कोने पर दो तिरछी लाइनें खींचकर "A/c Payee Only" लिखा होता है. इसका मतलब होता है कि इस चेक का पैसा हाथ में कैश नहीं मिलेगा, बल्कि सीधे उसी इंसान के बैंक खाते में जमा होगा, जिसके नाम पर चेक बना है. इस तरह, कोई भी और व्यक्ति इसे कैश नहीं करा सकता, जिससे आपका पैसा सेफ रहता है.
4/7आरबीआई के नियम के मुताबिक हमेशा चेक के पीछे साइन करने का नियम खासतौर पर बेयरर चेक पर लागू होता है. तो अगर कोई व्यक्ति किसी और के नाम पर जारी किया गया बेयरर चेक बैंक में कैश कराने जाता है, तो फिर बैंक सेफ्टी और रिकॉर्ड के लिए उससे चेक के पीछे साइन करवाता है, असल में इसका मकसद यह तय करना है कि पेमेंट सही इंसान को ही हो रहा है और बाद में लेनदेन का प्रमाण भी मौजूद रहे.असल में यह प्रक्रिया धोखाधड़ी रोकने में मदद करती है.
5/7असल में बैंक चेक के पीछे साइन इसलिए करवाता है ताकि पेमेंट का पक्का सबूत रहे. वैसे यह साइन रिकॉर्ड में दर्ज होता है और दिखाता है कि पैसा किसने पाए हैं. अगर फ्यूचर में कोई विवाद, धोखाधड़ी या चोरी जैसी स्थिति पैदा होती है, तो बैंक इस साइन को सबूत के रूप में पेश कर सकता है.स्पेशली बेयरर चेक में यह नियम अहम है, क्योंकि इसमें कैश सीधे काउंटर से मिलता है. तो यह प्रक्रिया बैंक और ग्राहक दोनों की सेफ्टी के लिए जरूरी है.
6/7वैसे तो यह साइन केवल इस बात की रसीद होता है कि आपने पेमेंट प्राप्त कर लिया है. वहीं, अकाउंट पेयी चेक में इस तरह के साइम की जरूरत नहीं होती, क्योंकि इसका पैसा सीधे आपके बैंक खाते में जमा होता है. यह छोटा-सा रूल अक्सर लोगों को कन्फ्यूज कर देता है, लेकिन बैंकिंग प्रक्रिया में यह जरूरी कदम है.
7/7चेक से पेमेंट करते समय, हमेशा A/c Payee पेरी चेक का ही इस्तेमाल करें. इसका मतलब है कि पैसे सीधे व्यक्ति के बैंक खाते में ही जाएंगे. बेयरर चेक देने से बचें, क्योंकि अगर यह खो जाए तो कोई भी इसका गलत इस्तेमाल कर सकता है.चेक के पीछे साइन करने से पहले हमेशा सतर्क रहें.(नोट-खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है,अधिक जानकारी के लिए बैंक से संपर्क करें)