चेक बाउंस होना केवल बैंक की गलती नहीं, बल्कि आपराधिक मामला तक बन सकता है,जिसमें आपको जेल तक हो सकती है.तो इसलिए जानें धारा 138 NI Act के तहत कब बनता है केस, क्या हो सकती है सजा, कितने दिन में भेजना होता है लीगल नोटिस और पूरी कानूनी प्रोसेस.
1/8आजकल पैसों का लेन-देन पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है.जी हां कैश की जगह लोग चेक, ऑनलाइन ट्रांसफर या डिजिटल पेमेंट का यूज करते हैं. स्पेशली बड़े अमाउंट के लिए लोग लेन-देन में चेक को ज्यादा सेफ माना जाता है. लेकिन कई लोग यह नहीं जानते कि अगर आपके द्वारा दिया गया चेक बैंक में जाकर बाउंस हो जाए, तो मामला केवल बैंकिंग गलती नहीं रहता यह सीधे कानून के दायरे में आ जाता है. जी हां चेक मामले में आपको जेल तक हो सकती है.
2/8नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 इसी स्थिति से जुड़ी है. जी हां जब कोई इंसानकिसी वैध लोन या कानूनी जिम्मेदारी को चुकाने के लिए चेक देता है और वह चेक बैंक से अस्वीकृत हो जाता है, तब धारा 138 लागू हो सकती है.
3/8चेक बाउंस होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे कि खाते में पर्याप्त बैलेंस न होना,खाता बंद कर देना, चेक देने के बाद बैंक को ‘स्टॉप पेमेंट’ का निर्देश देना. जी हां जब भी बैंक चेक को रिजेक्ट करता है, तो वह एक ‘रिटर्न मेमो’ जारी करता है. फिर इसी डाक्यूमेंट्स से कानूनी प्रोसेस की शुरुआत होती है.
4/8धारा 138 के तहत चेक बाउंस को आपराधिक अपराध माना जाता है. जी हां अगर चेक बाउंस का मामला कोर्ट तक पहुंचता है और आरोप साबित भी हो जाता है, तो फिर आरोपी को अधिकतम 2 साल तक की जेल हो सकती है. इसके अलावा कोर्ट चेक में लिखी रकम का दोगुना तक जुर्माना भी लगा सकता है.इसके साथ ही कई मामलों में जेल और जुर्माना दोनों सजा एक साथ दी जा सकती है.
5/8आपको बता दें कि सबसे पहले, जिस इंसान को पेमेंट मिलना था, उसे बैंक से चेक बाउंस का मेमो मिलने के 30 दिनों के अंदर आरोपी को कानूनी नोटिस भेजना होता है. इस नोटिस में 15 दिनों के अंदर भुगतान करने का मौका दिया जाता है. अगर आरोपी इस टेन्योर में रकम चुका देता है, तो मामला यहीं खत्म हो सकता है.
6/8चेक बाउंस होने के बाद 30 दिनों के अंदर कानूनी नोटिस भेजना होता है, जिस पर 15 दिन में पेमेंट करना होता है, वरना नोटिस टाइमिंग खत्म होने के बाद अगले 30 दिन में शिकायत कोर्ट में दर्ज कर सकते हैं. जी हां अगर 15 दिन गुजर जाने के बाद भी पेमेंट नहीं किया जाता है, तो फिर शिकायतकर्ता नोटिस की अवधि समाप्त होने के 1 महीने के भीतर मजिस्ट्रेट की अदालत में केस दर्ज कर सकता है.फिर अदालत प्राथमिक डाक्यूटमेंट्स की जांच करती है और फिर आरोपी को समन भेजती है, इसके बाद आरोपी को कोर्ट में पेश होकर अपना पक्ष रखना होता है और वह या तो गलती स्वीकार कर सकता है या मुकदमा लड़ सकता है।.
7/8चेक जारी करने से पहले यह तय करें कि आपके खाते में पर्याप्त रकम हो.वैसे किसी विवाद की स्थिति में ‘स्टॉप पेमेंट’ का ऑप्शन हल्का कदम नहीं है, क्योंकि इससे भी मामला धारा 138 के तहत बन सकता है.तो कुल मिलाकर, चेक बाउंस को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। बेहतर यही है कि लेन-देन सोच-समझकर करें और किसी भी कानूनी नोटिस को नजरअंदाज न करें.
8/8असल में हाल ही में बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव चेक बाउंस मामले में फंस गए हैं. एक्टर को दिल्ली की तिहाड़ जेल रात गुजारनी पड़ रही है. असल में एक्टर ने करीब 5 करोड़ रुपये का लोन लिया था,लेकिन लोन नहीं चुकाने पर ब्याज, जुर्माने और देरी के चलते ये अमाउंट बढ़कर लगभग 9 करोड़ हो गया है.