पर्सनल लोन लेते समय उसकी टेन्योर को हर किसी को समझना चाहिए.छोटा टेन्योर चुनने पर EMI तो ज्यादा होगी, लेकिन ब्याज कम देना पड़ेगा, जबकि लंबा टेन्योर EMI को तो हल्का बनाता है, लेकिन कुल ब्याज काफी बढ़ा देता है.यानी लोन लेने के टाइम समझदारी से लिया गया फैसला आपको बड़ी मुसीबतों से बचा सकता है.
1/8पर्सनल लोन लेने से पहले उसकी अवधि (टेन्योर) को समझना हर किसी के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि यही तय करता है कि आपको हर महीने कितनी EMI आपको देनी होगी और कुल कितना ब्याज चुकाना पड़ सकता है. तो लोन टेन्योर छोटा रखने पर EMI ज्यादा होगी लेकिन ब्याज कम देना होगा, जबकि लंबी अवधि की EMI कम लेकिन कुल ब्याज ज्यादा होता है. ऐसे में अपनी इनकम, खर्च, फ्यूचर की जरूरतें और रिस्क उठाने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए ही लोन की अवधि तय करें. इससे आपका क्रेडिट स्कोर भी बेहतर बना रहेगा और फाइनेंशियल प्लानिंग भी मजबूत हो सकती है.
2/8आपको बता दें कि पर्सनल लोन का टेन्योर यानी अवधि वह तय टाइम होता है, जिसमें आपको अपने लोन की पूरी राशि और उस पर लगने वाला ब्याज चुकाना होता है.हमारे देश में वैसे आमतौर पर पर्सनल लोन की अवधि 12 से 60 महीनों के बीच की होती है, लेकिन कुछ मामलों में यह 84 महीनों तक भी जा सकती है. तो ऐसे में हमेशा सही टेन्योर को चुनना आपकी EMI और कुल ब्याज भुगतान को सीधे प्रभावित करता है. इसलिए लोन लेने से पहले अपनी आय, खर्च और फ्यूचर की जरूरतों के आधार पर टाइम पीरियड का चुनें, ताकि आर्थिक बोझ न बढ़े.
3/8अगर आप जल्दी कर्ज से छुटकारा पाना चाहते हैं तो फिर कम टेन्योर वाला लोन चुनना फायदेमंद हो सकता है. इसमें EMI थोड़ी ज्यादा होती है, लेकिन ब्याज कम देना पड़ता है. जी हां यह ऑप्शन उन लोगों के लिए बेस्ट होता है जिनकी इनकम अच्छी है और जो फाइनेंशियली स्टेबल हैं. इतना ही हीं इससे क्रेडिट स्कोर भी मजबूत बना रहता है.
4/8अगर आपकी मौजूदा आय सीमित या कहें कि कम है या पहले से कोई लोन चल रहा है, तो लॉन्ग टर्म वाला पर्सनल लोन आपके लिए अच्छा हो सकता है. हालांकि इसमें EMI कम होती है जिससे हर महीने का बोझ हल्का पड़ता है, हालांकि कुल ब्याज राशि ज्यादा देनी पड़ सकती है. यह ऑप्शन वित्तीय दबाव को कम करने में मदद करता है.
5/8पर्सनल लोन के लिए कोई एक सही टेन्योर सभी के लिए फिक्स नहीं होता, क्योंकि यह पूरी तरह आपकी आर्थिक स्थिति और जरूरतों पर निर्भर करता है. जी हां अगर आप हर महीने बड़ी राशि की EMI चुका सकते हैं, तो छोटा टेन्योर चुनना बेहतर होगा, इससे ब्याज कम देना पड़ेगा. लेकिन अगर आपकी इनकम लिमिटेड है, तो लंबा टेन्योर EMI का बोझ हल्का करता है.तो हमेशा ध्यान रखें, आपकी कुल EMI आपकी मासिक आय का 30-40% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. ऐसे में सही टेन्योर का चुनाव आपके फाइनेंशियल हेल्थ को संतुलित बनाए रखता है.
6/8हमेशा हर किसी के लिए एक सही EMI प्लान आपके फाइनेंशियल लाइफ को बैलेंस और तनावमुक्त बनाता है. जिससे रोजमर्रा के खर्चों के बाद भी आपको टेंशन फ्री जीने की सुविधा मिलती है. आपकी EMI समय पर देने से डिफॉल्ट की नौबत नहीं आती और क्रेडिट स्कोर भी मजबूत बना रहता है.इसके साथ ही, जब लोन तय समय पर चुकता हो जाता है, तो फ्यूचर की फाइनेंशियल प्लानिंग करना आसान हो जाता है.
7/8जीहां लोन का टेन्योर चुनते समय कुछ अहम बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. इसमें सबसे पहले देखें कि आपकी मासिक आय और खर्च क्या हैं और लोन के बाद कितनी राशि बचती है. अगर पहले से कोई लोन चल रहा है, तो फिर लॉन्ग टर्म का ऑप्शन बेस्ट हो सकता है. साथ ही, याद रखें कि लंबे टेन्योर पर ब्याज ज्यादा चुकाना पड़ता है, जबकि छोटे टेन्योर में EMI ज्यादा होती है, लेकिन ब्याज कम देना पड़ता है. तो यदि आप फ्यूचर में किसी बड़े वित्तीय टारगेट की प्लानिंग कर रहे हैं, तो लोन जल्दी खत्म करने के लिए छोटा टेन्योर चुनना समझदारी होगी.
8/8आप EMI तय करते समय केवल मंथली किस्त को ना देखकर, अपने पूरे फाइनेंशियल प्रोफाइल को समझें.आप इमरजेंसी खर्चों के लिए पर्याप्त जगह छोड़ें, ताकि अचानक जरूरत पड़ने पर परेशानी ना हो. इसके अलावा केवल कम EMI देखकर लोन ना लें, कुल ब्याज और कुल लोन लागत जरूर जांचें. साथ ही, समय-समय पर लोन की समीक्षा करना ना भूलें.(नोट-खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है)