अगर आप किसी FD में निवेश करते हैं तो उस Fixed Deposit के मैच्योरिटी की एक निश्चित तारीख होती है. आप उस तारीख से पहले अगर FD को तुड़वाते हैं तो आपको उस पेनल्टी देनी पड़ती है. लेकिन SBI में एक एफडी ऐसी भी है, जिसमें कोई लॉक-इन पीरियड नहीं होता. आप इसमें अपने निवेश पर एफडी वाले ब्याज का फायदा ले सकते हैं और जरूरत पड़ने पर कभी भी एफडी का पैसा निकाल सकते हैं. जानिए इस एफडी से जुड़ी खास बातें.
1/6हम बात कर रहे हैं SBI (MODS) स्कीम की. इसका पूरा नाम SBI Multi Option Deposit Scheme है. इस स्कीम में डिपॉजिटर को उतना ही ब्याज मिलता है जितना कि दूसरी एफडी पर. इस स्कीम का फायदा ये है कि आपका पैसा हमेशा लिक्विड रहता है, यानि आप FD की मैच्योरिटी के पहले कभी भी बिना पेनल्टी दिए पैसा निकाल सकते हैं.
2/6ये पैसा आप एटीएम या चेक के जरिए निकाल सकते हैं, ठीक उसी तरह जिस तरह से आप सेविंग अकाउंट से पैसा निकालते हैं. दरअसल इस एफडी स्कीम को डिपॉजिटर के सेविंग्स या करंट अकाउंट से लिंक्ड रखा जाता है. ऐसे में डिपॉजिटर्स को एफडी में से जरूरतभर की रकम कभी भी एटीएम के जरिए निकालने की सुविधा मिलती है.
3/6आमतौर पर जब आप कोई एफडी तुड़वाते हैं, तो उसकी पूरी रकम की निकासी करते हैं, लेकिन SBI (MODS) में ऐसा करना जरूरी नहीं. आप अपनी जरूरत के हिसाब से पैसा निकाल सकते हैं और शेष रकम अकाउंट में ही बनी रहने दें. बची हुई रकम पर एफडी का ब्याज मिलता रहेगा.
4/6इसमें 1,000 रुपए के मल्टीपल्स में पैसे जमा किए जा सकते हैं और 1,000 रुपए के मल्टीपल्स में ही निकाले भी जा सकते हैं. ऐसा भी नहीं कि रकम निकालने की सुविधा एक बार के लिए है, आप 1000 रुपए के गुणांक में कई बार पैसे निकाल सकते हैं.
5/6SBI (MODS) में आप एक साल से लेकर 5 साल तक के लिए पैसा डिपॉजिट कर सकते हैं. साल के हिसाब से ब्याज दरें अलग-अलग हैं. 1-2 साल की एफडी पर 6.8%, 2-3 साल पर 7% और 3-5 साल की एफडी पर 6.75% के हिसाब से ब्याज मिलता है. वरिष्ठ नागरिकों को 0.50% का अतिरिक्त ब्याज मिलता है. इस स्कीम में नॉमिनेशन की फैसिलिटी भी मिलती है.
6/6आप इस अकाउंट को दूसरे ब्रांच में ट्रांसफर भी करवा सकते हैं. ध्यान रखें कि MOD अकाउंट से लिंक्ड सेविंग्स अकाउंट में मिनिमम मंथली एवरेज बैलेंस रखना जरूरी है. अगर आप भी एसबीआई की इस सुविधा का फायदा लेना चाहते हैं तो अकाउंट ऑनलाइन भी खुलवा सकते हैं या किसी भी नजदीकी ब्रांच में जाकर खुलवाया जा सकता है. इसमें मिलने वाले ब्याज पर आपको टैक्स देना पड़ता है.