देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ग्राहकों को बड़ा झटका दिया है. बैंक ने एक बार फिर बैंक की सावधी जमा दराें में कमी की है. 10 फरवरी से SBI की सावधि जमा या FD की दरों में कटौती लागू हो गई है. कुछ दिन पहले ही एसबीआई ने लगातार नौवीं बार वित्त वर्ष 2019-20 के लिए मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (MCLR) में कटौती का एलान किया था. एकमुश्त FD (बल्क टर्म डिपॉजिट) पर मिलने वाले ब्याज में भी कमी की गई है.
1/5सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी होने के चलते SBI ने रिटेल टर्म डिपॉजिट्स और बल्क टर्म डिपॉजिट की दरों में भी बदलाव किया है. बैंक ने 1 साल से लेकर 10 साल में मैच्योर होने वाले रिटेल सेगमेंट के लिए FD की दरों में 0.10 फीसदी से 0.50 फीसदी तक की कटौती करने का ऐलान किया है. वहीं, लॉन्ग टर्म डिपॉजिट्स पर 0.25%-0.50% कटौती की है.
2/5भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी मौद्रिक नीति में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था. रेपो रेट 5.15 फीसदी पर बरकरार है. लेकिन एसबीआई ने एमसीएलआर में कटौती की है. RBI ने लोन को बढ़ावा देने के लिए ऐलान किया. आरबीआई ने बैंकों को कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) में कटौती करने की छूट दे दी है, जो जुलाई 2020 तक लागू रहेगी.
3/5फिक्स्ड डिपॉजिट (दो करोड़ रुपए से कम) पर भी एसबीआई ने 10 से 50 बेसिस प्वाइंट की कमी की है. एकमुश्त एफडी (बल्क टर्म डिपॉजिट यानी दो करोड़ रुपए से ज्यादा) पर मिलने वाले ब्याज में 25 से 50 बेसिस प्वाइंट की कमी की है.
4/5MCLR वह दर होती है, जिससे नीचे पर बैंक लोन नहीं दे सकता. इसके कम होने पर कम दर पर बैंक से लोन मिल सकता है. इससे होम लोन से लेकर ऑटो लोन तक सब सस्ते हो सकते हैं.
5/5नई दरों का फायदा नए ग्राहकों के साथ-साथ सिर्फ उन्हीं ग्राहकों को मिलेगा, जिन्होंने अप्रैल 2016 के बाद लोन लिया है. क्योंकि, उसके पहले लोन देने के लिए तय मिनिमम रेट बेस रेट कहलाती थी.