अगर आपने नौकरी बदलने के बाद अपने पुराने सैलरी अकाउंट को बंद नहीं कराया है, तो यह आपके लिए वित्तीय परेशानियों का कारण बन सकता है. बैंक के नियमों के अनुसार,अगर सैलरी अकाउंट में दो से तीन महीने तक सैलरी नहीं आती है, तो वह सामान्य सेविंग अकाउंट में बदल जाता है.तो ऐसे में न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने पर बैंक पेनल्टी वसूल सकता है.तो जानेंगे अगर आपने अपना पुराना सैलरी अकाउंट बंद नहीं कराया है, तो इसे तुरंत बंद करवाना आपके लिए क्यों जरूरी होता है.
1/8नई नौकरी लगते ही नया सैलरी अकाउंट खुलवाना ये तो आम सी बात है. लेकिन आपके पुराने सैलरी अकाउंट का क्या होगा? अधिकतर लोग पुराने सैलरी अकाउंट को यूं ही छोड़ देते हैं, वो भी यह सोचकर कि 'पड़ा रहने दो, क्या फर्क पड़ता है.लेकिन क्या आप जानते हैं आपकी ये सोच भारी पड़ सकती है? बैंक आपके इस पुराने ना यूज होने वाले सैलरी अकाउंट पर न केवल कई तरह के चार्ज लगा सकता है, बल्कि पेनल्टी भी ठोक सकता है. तो हम जानेंगे सैलरी अकाउंट बंद ना करवाने के बड़े नुकसान क्या हो सकते हैं?
2/8जब भी आपके सैलरी बैंक अकाउंट में लगातार 2-3 महीने तक सैलरी क्रेडिट नहीं होती है, तो फिर ज्यादातर बैंक उसे एक सामान्य बचत खाते (Regular Savings Account) में खुद ही बदल देते हैं.सामान्य खाते में बदलते ही, यहीं से शुरू होती है चार्जेज की कहानी.असल में सैलरी अकाउंट अक्सर जीरो बैलेंस जैसी सुविधाओं के साथ खोले जाते हैं, क्योंकि कंपनी का बैंक के साथ टाई-अप होता है और सैलरी बंद होने पर ये बेनेफिट्स खत्म हो जाते हैं.
3/8असल में होता ये है कि जैसे ही आपका सैलरी वाला अकाउंट सामान्य बचत खाते में बदलता है, उस पर मिनिमम एवरेज बैलेंस (MAB) बनाए रखने की सारी शर्त भी अप्लाई हो जाती हैं. अगर आप इस बैलेंस को मेंटेन नहीं करेंगे तो फिर बैंक हर महीने या तिमाही में पेनल्टी काटता रहता है.वैसे यह बैंक और ब्रांच (शहरी/ग्रामीण) के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है.
4/8अक्सर सैलरी अकाउंट में तो ये फायदा मिलता है कि उसमें डेबिट कार्ड की सालाना फीस माफ होती है या कम होती है,लेकिन जैसे ही ये सामान्य बचत खाते में बदलता है तो यह पूरी वसूली जाती है.इसके अलावा, SMS अलर्ट जैसी सेवाओं के लिए भी चार्ज लगना शुरू हो सकता है जो सैलरी अकाउंट में मुफ्त होती हैं.
5/8अगर आप अपने खाते में मान लीजिए 1-2 साल तक कोई लेनदेन नहीं करते (न पैसा जमा करते हैं, न निकालते हैं), तो बैंक उसे 'इनऑपरेटिव' या 'डोरमेंट' (निष्क्रिय) में बदला जा सकता है.इस तरह के खाते से फिर पैसे निकालना या उसे दोबारा चालू करना लंबा हो सकता है,जिसमें KYC दोबारा करवानी पड़ती है.
6/8आपके सैलरी अकाउंट में मिनिमम बैलेंस ना होने के कारण बार-बार चार्ज कटते हैं और बैलेंस निगेटिव में चला जाता है, जिसका असर आपके क्रेडिट स्कोर पर भी बुरा पड़ता है.बैंक इसे एक तरह की 'देनदारी न चुकाने' के तौर पर रिपोर्ट कर सकता है.
7/8अगर पुराना सैलरी अकाउंट है तो सबसे अच्छा तरीका है कि पुराने सैलरी अकाउंट को फॉर्म भरकर विधिवत बंद करा दें. साथ ही अगर रखना ही है, तो उसमें मिनिमम बैलेंस जरूर बनाए रखें.इस खाते से एक-दो बार छोटा-मोटा लेनदेन करते रहें ताकि अकाउंट एक्टिव रहे.
8/8हो सकता है कि आपको पुराना सैलरी अकाउंट छोटा सा मामला लगे, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है, ये आपको वित्तीय नुकसान पहुंचा सकता है और बेवजह की परेशानी में डाल सकता है.ऐसे में स्मार्ट बनें, अपने पैसों की कद्र समझें(नोट-खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है)