RBI फरवरी से जून के बीच रेपो रेट में 1% की कटौती कर चुका है. इसके बाद तमाम बैंकों ने भी लोन सस्ते करना शुरू कर दिए हैं. लेकिन अगर आपको लगता है कि आपके बैंक ने अब तक लोन सस्ता नहीं किया है, जिसके कारण आपको रेपो रेट कम होने के बहुत ज्यादा फायदा नहीं मिल पा रहा है, तो एक ऐसा तरीका है जिससे इस समस्या का समाधान तुरंत निकल सकता है, लेकिन इसके लिए आपको अपनी जेब से थोड़ा पैसा खर्च करना पड़ेगा. जान लीजिए क्या है वो तरीका.
1/6अगर आपको लगता है कि रेपो रेट घटने के बाद भी बैंक ने आपकी ब्याज दर को नहीं घटाया है, या फिर आपको अपना लोन दूसरे बैंक में मिल रहे लोन की तुलना में महंगा लगता है, तो आप इस स्थिति में लोन रीफाइनेंसिंग का सहारा ले सकते हैं और अपने लोन के ब्याज को तुरंत कम करवा सकते हैं.
2/6लोन रीफाइनेंसिंग में कम ब्याज दर जैसी शर्तों वाला नया लोन लिया जाता है और पुराने लोन को क्लोज करा दिया जाता है. इसके बाद नए लोन का पुनर्भुगतान शुरू कर दिया जाता है. अगर आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है तो दूसरे बैंक बहुत आसानी से आपको मौजूदा इंटरेस्ट रेट के मुकाबले सस्ता लोन ऑफर कर देते हैं.
3/6रीफाइनेंसिंग में सस्ते लोन का फायदा आपको तुरंत मिलना शुरू हो जाता है. नए लोन की ब्याज दर कम होती है, इससे आपकी ईएमआई भी कम हो जाती है. इससे आपको काफी राहत मिलती है.
4/6जब आप लोन रीफाइनेंसिंग करवाते हैं तो आपको लोन रीस्ट्रक्चरिंग का मौका मिलता है. नया लोन लेते समय आप लोन के टेन्योर को अपने हिसाब से कम या ज्यादा करवा सकते हैं. अगर आप सस्ते ब्याज दर के साथ लोन लेते हैं और टेन्योर भी कम करवा लेते हैं तो ब्याज के लाखों रुपए बचा सकते हैं.
5/6जब भी आप रीफाइनेंसिंग का डिसीजन लेते हैं तो हो सकता है कि मौजूदा बैंक में आपको फोरक्लोजर फीस वगैरह का भुगतान करना पड़े. इसके अलावा नए बैंक में स्टाम्प ड्यूटी के साथ लोन प्रोसेसिंग फीस और अन्य फीस देनी पड़ सकती है. हालांकि रीफाइनेंसिंग कराने के बाद आपको तमाम फायदे भी मिलेंगे.
6/6बअगर आपको दूसरे बैंक में सस्ती दर पर नया लोन मिल रहा हो तो आप ये डिसीजन ले सकते हैं. इसके अलावा अगर आपने निश्चित ब्याज दर पर लोन लिया हो, लेकिन कुछ समय बाद ब्याज दरें घटना शुरू हो गई हों. आप नई ब्याज दरें अपनाना चाहते हों, लेकिन आपका बैंक इस स्थिति में आपको फ्लोटिंग रेट लोन का विकल्प देने को राजी न हो, तो आप लोन रीफाइनेंसिंग करवा सकते हैं. अगर आप पर ईएमआई का बोझ बहुत ज्यादा है और आप फिर से रीस्ट्रक्चरिंग करके ईएमआई को छोटा करना चाहते हों तो आप ये डिसीजन ले सकते हैं.