CIBIL Score कम या माइनस होने पर भी लोन मिल सकता है.असल में बैंक सिर्फ क्रेडिट स्कोर नहीं, बल्कि आपकी इनकम, नौकरी की स्थिरता, प्रॉपर्टी और मौजूदा कर्ज जैसे फैक्टर्स भी देखते हैं.तो जानें किन 5 जरूरी बातों से कम स्कोर में भी लोन मंजूर हो सकता है और कैसे अपनी प्रोफाइल मजबूत बनाएं.
1/11अगर आपका CIBIL Score कम है या ‘-1’ यानी माइनस में दिख रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है.असल में ज्यादातर लोग यही मान लेते हैं कि कम सिबिल स्कोर होने पर बैंक कभी भी लोन नहीं देंगे, लेकिन हकीकत इससे थोड़ी अलग हो सकती है. सिबिल स्कोर लोन लेने के लिए जरूर अहम होता है, लेकिन यह अकेला फैसला करने वाला फैक्टर नहीं है. बैंक आपकी पूरी प्रोफाइल को देखता है,आपकी कमाई, नौकरी, प्रॉपर्टी और भुगतान करने की क्षमता. अगर ये चीजें मजबूत हैं, तो कम स्कोर के बावजूद भी लोन मिलने के चांस बने रहते हैं.
2/11सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि सिबिल स्कोर कम क्यों होता हैय CIBIL Score 300 से 900 के बीच होता है और यह आपकी क्रेडिट हिस्ट्री पर डिपेंड करता है. अगर आपने टाइम पर EMI या क्रेडिट कार्ड बिल नहीं भरा, या अपनी क्रेडिट लिमिट का जरूरत से ज्यादा यूज किया, तो स्कोर गिर जाता है. इसके अलावा अगर आप एक साथ कई लोन के लिए अप्लाई करते हैं, तो भी इसका असर पड़ता है.
3/11अगर आपने पहले कभी कोई लोन या क्रेडिट कार्ड लिया ही नहीं है, तो आपका स्कोर ‘–1’ या ‘NH’ (No History) दिख सकता है. यह स्थिति खासतौर पर युवाओं या पहली बार लोन लेने वालों के साथ होती है. यानी कि माइनस स्कोर का मतलब खराब रिकॉर्ड नहीं, बल्कि कोई रिकॉर्ड नहीं होना भी हो सकता है.
4/11सीधा जवाब है नहीं...जी हां बैंक सिर्फ सिबिल स्कोर पर निर्भर नहीं करते हैं. वो आपकी पूरी फाइनेंशियल स्थिति को समझते हैं. उनका मकसद यह जानना होता है कि आप लोन की EMI समय पर चुका पाएंगे या नहीं.तो इसलिए वे कई दूसरे फैक्टर्स को भी ध्यान में रखते हैं, जो आपकी विश्वसनीयता को साबित करते हैं.
5/11अगर आपकी मंथली इनकम अच्छी है और नियमित है, तो बैंक का भरोसा अपने आप बढ़ जाता है.असल में बैंक यह देखता है कि आपकी इनकम इतनी है या नहीं कि आप EMI आराम से चुका सकें.जी हां आपकी सैलरी स्लिप, बैंक स्टेटमेंट और फॉर्म-16 जैसे डॉक्यूमेंट्स इस बात का सबूत होते हैं.असल में कई बार अच्छी इनकम कम सिबिल स्कोर की कमी को पूरा कर देती है.
6/11बैंक ऐसे लोगों को ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं जो लंबे समय से एक ही कंपनी या प्रोफेशन में काम कर रहे हैं.तो अगर आप 3 से 5 साल से लगातार एक ही नौकरी में हैं, तो यह आपकी फाइनेंशियल स्थिरता को दिखाता है. इससे बैंक को यह भरोसा मिलता है कि आपकी आय अचानक बंद नहीं होगी और आप EMI समय पर दे पाएंगे.
7/11अगर आप होम लोन ले रहे हैं, तो बैंक उस प्रॉपर्टी को भी ध्यान में रखते हैं जिसे आप खरीद रहे हैं. अच्छी लोकेशन, क्लियर डाक्यूमेंट्स और अच्छी रीसेल वैल्यू वाली प्रॉपर्टी बैंक के लिए कम रिस्क वाली होती है.तो फिर ऐसे में बैंक को लगता है कि अगर फ्यूचर में कोई समस्या आती भी है, तो वे उस प्रॉपर्टी को बेचकर पैसा रिकवर कर सकते हैं.यही वजह है कि अच्छी प्रॉपर्टी होने पर कम सिबिल स्कोर के बावजूद लोन मिल सकता है.
8/11LTV यानी Loan-to-Value Ratio का मतलब है कि बैंक प्रॉपर्टी की कीमत के मुकाबले कितना लोन दे रहा है.तो अगर आप खुद ज्यादा डाउन पेमेंट कर रहे हैं और बैंक से कम प्रतिशत का लोन ले रहे हैं, तो बैंक का रिस्क कम हो जाता है. ऐसे में बैंक आसानी से लोन मंजूर कर देते हैं, भले ही आपका सिबिल स्कोर थोड़ा कम क्यों न हो.
9/11अगर आपके ऊपर पहले से ज्यादा कर्ज नहीं है, तो यह आपके लिए प्लस पॉइंट होता है.असल में बैंक यह मानते हैं कि अगर आपकी मौजूदा देनदारी कम है, तो आप नई EMI आसानी से संभाल सकते हैं.लेकिन अगर पहले से कई लोन चल रहे हैं, तो बैंक थोड़ा सतर्क हो जाते हैं.
10/11साफ है कि अगर आपका CIBIL Score कम है, तो इसका मतलब यह नहीं कि आपके लिए सारे दरवाजे बंद हो गए हैं.तो अगर आपकी इनकम अच्छी है, नौकरी स्थिर है और आपके पास मजबूत फाइनेंशियल प्रोफाइल है, तो आप फिर भी लोन पाने के हकदार हो सकते हैं.इसलिए जरूरी यह है कि आप अपनी प्रोफाइल को मजबूत बनाएं और सही तरीके से अप्लाई करें.
11/11याद रखिए कि कम या माइनस CIBIL Score होने पर भी लोन मिल सकता है, बस आपको अपनी बाकी प्रोफाइल मजबूत रखनी होगी.जी हां सही इनकम, स्थिर नौकरी, कम कर्ज और अच्छी प्रॉपर्टी-असल में ये सभी फैक्टर्स मिलकर आपके लिए लोन का रास्ता खोल सकते हैं.तो इसलिए याद रखें कि CIBIL Score नहीं, आपकी पूरी फाइनेंशियल प्रोफाइल ही असली गेम चेंजर है.