लोन के मामले में Cibil Score बहुत मायने रखता है. अगर आपका सिबिल स्कोर बहुत ज्यादा खराब है तो कई बार बैंक आपको लोन देने से इनकार कर देते हैं क्योंकि सिबिल स्कोर को बैंक विश्वसनीयता का पैमाना मानते हैं. इससे पता चलता है कि आपकी पिछली रीपेमेंट हिस्ट्री कैसी रही है. लेकिन अगर आपको पैसों की बहुत ज्यादा जरूरत हो और बैंक भी लोन देने से इनकार कर दे तो आप कहां से पैसों का जुगाड़ करेंगे? यहां जानिए ऐसे 5 ऑप्शंस जो मुश्किल समय में आपके लिए पैसों का इंतजाम करवा सकते हैं.
1/5अगर आपकी इनकम अच्छी खासी है, तो सिबिल स्कोर कम होने पर आप जॉइंट लोन का भी विकल्प चुन सकते हैं या किसी को अपना गारंटर बना सकते हैं. अगर आपके जॉइंट लोन होल्डर या गारंटर का सिबिल स्कोर अच्छा है तो आप आसानी से लोन ले सकते हैं. इसका एक फायदा ये है कि अगर आपका को एप्लीकेंट (Co-Applicant) महिला है तो आपको ब्याज दरों में भी कुछ फायदा मिल सकता है.
2/5अगर आपके पास सोना है, तो इसके बदले भी आप लोन ले सकते हैं. गोल्ड लोन को सिक्योर्ड लोन की श्रेणी में रखा जाता है. आपको सोने के वर्तमान कीमत का 75 फीसदी तक लोन मिल सकता है. इसमें बहुत ज्यादा कागजी कार्यवाही नहीं होती है, न ही आपके सिबिल स्कोर को देखा जाता है. आपके लोन को गिरवी रखकर ये लोन दिया जाता है.
3/5कुछ कंपनियां सैलरी एडवांस के रूप में लोन देती हैं. ये लोन आपकी सैलरी का तीन गुना तक हो सकता है. एडवांस सैलरी लोन का एक फायदा ये है कि आपको बहुत ज्यादा कागजी कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ती. एडवांस सैलरी लोन भी एक तरह से पर्सनल लोन की तरह ही होता है. ये आपको आसानी से मिल जाता है और इसे आप ईएमआई के जरिए निश्चित अंतराल में चुका सकते हैं. आमतौर पर इसे 15 साल के अंदर चुकाना होता है.
4/5अगर आपका सिबिल स्कोर खराब है, बैंक से लोन नहीं मिल पा रहा है और आपको पैसों की बहुत ज्यादा जरूरत है, तो आप NBFC में आवेदन कर सकते हैं. यहां आपको कम सिबिल स्कोर के साथ भी लोन मिल सकता है. लेकिन ब्याज की दरें बैंक के मुकाबले ज्यादा हो सकती हैं.
5/5अगर आपने कोई FD कराई हुई है, या LIC या PPF जैसी स्कीम्स में निवेश किया है, तो आप इनके बदले में भी लोन ले सकते हैं. इसमें आपकी जमा रकम के आधार पर आपको कर्ज दिया जाता है. इस कर्ज को चुकाने के लिए निर्धारित समय दिया जाता है. अगर आपका पीपीएफ अकाउंट कम से कम एक वित्तीय साल पुराना है तो आप लोन के लिए अप्लाई कर सकते हैं. पांच साल तक इस पर लोन की सुविधा ली जा सकती है, इसके बाद आंशिक निकासी की सुविधा मिल जाती है.