देश के बैंकों में बड़ी मात्रा में ऐसे पैसे पड़े हैं जिनका कभी किसी ने कोई क्लेम ही नहीं किया है. करोड़ों ऐसे अकाउंट हैं जिससे लंबे समय से कोई ट्रांजेक्शन ही नहीं हुए हैं. कई बार लोग लंबे समय तक पिछले बैंक अकाउंट में पैसे का लेन-देन नहीं करते हैं. ऐसे में अगर आपको काफी समय बाद पैसे निकालने की जरूरत हो या अचानक याद आ जाता है तो आपको इसके लिए भागदौड़ करनी होती है. लेकिन ऐसा नहीं है कि आप उस पैसे को निकाल नहीं सकते हैं. हां आपको कुछ प्रक्रियाओं से गुजरना होता है.
1/5अगर आप अपने अकाउंट में 12 महीने से अधिक समय तक कोई लेन-देन नहीं करते हैं तो वह निष्क्रिय (डिएक्टिवेटेड) हो जाता है. यदि आप अकाउंट में 24 महीने तक लेन-देन नहीं करते तो उसे बैंक की भाषा में 'डॉरमैंट' करार दिया जाता है. इसे बट्टा खाता भी कहते हैं. हालांकि आरबीआई के मुताबिक, डॉरमैंट अकाउंट और डिएक्टिवेटेड अकाउंट में कोई फर्क नहीं होता. (पीटीआई)
2/5ऐसे डॉरमैंट या डिएक्टिवेटेड अकाउंट की अपनी अलग समस्या होती हैं. उनसे कुछ जोखिम भी जुड़े रहते हैं. पहले तो इस्तेमाल नहीं किए जा रहे खाते में पड़ी राशि पर केवल 4 प्रतिशत का ब्याज मिलेगा, जो नवंबर के 5.54 फीसदी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से भी कम है. यदि इसी राशि को PPF में निवेश किया जाता तो 8.65 प्रतिशत का ब्याज मिलता.(रॉयटर्स)
3/5भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि बैंकों के लिए 10 साल या उससे अधिक समय से बेकार पड़े डिएक्टिवेटेड अकाउंट्स की सूची अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करना जरूरी है. कस्टमर को इस तरह के खाते की डीटेल की जांच करनी चाहिए. (pixabay)
4/5अगर आपने पाया कि डिएक्टिवेटेड अकाउंट है तो आपको उसमें जमा राशि का दावा करने के लिए फॉर्म भरना होगा. साथ ही उसके साथ आपको आईडी प्रूफ और एड्रेस प्रूफ भी जमा करना होगा. अगर आप खाताधारक के कानूनी वारिस हैं तो आपको दावे के फॉर्म और आईडी प्रूफ और एड्रेस प्रूफ के साथ अकाउंट होल्डर का मृत्यु प्रमाणपत्र भी जमा करना होगा. इस पर बैंक आपके क्लेम की समीक्षा करेगा और क्लेम मंजूर होने पर उसे निपटाने की सामान्य प्रक्रिया अपनाएगा. (पीटीआई)
5/5जानकार बताते हैं कि यदि 10 साल या उससे ज्यादा समय तक राशि का क्लेम नहीं किया गया तो रिजर्व बैंक के निर्देश के अनुसार यह राशि जमाकर्ता शिक्षा एवं जागरुकता फंड में जमा कर दी जाएगी. हां, ऐसा नहीं है कि आप इसके बाद भी क्लेम नहीं कर सकते. (पीटीआई)