आजकल ज्यादातर लोग मकान खरीदने के लिए Home Loan लेते हैं. होम लोन आपको मिलेगा या नहीं मिलेगा और अगर मिलेगा तो किस ब्याज दर के साथ मिलेगा, ये सब कुछ बैंक आपकी Cibil Report को देखकर डिसाइड करते हैं. बैंक आपका सिबिल स्कोर देखकर आपकी विश्वसनीयता को परखते हैं. हालांकि इसके अलावा भी कुछ फैक्टर्स होते हैं, लेकिन CIBIL इसमें सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर है. इसलिए अगर आप सस्ती ब्याज दर के साथ होम लोन लेना चाहते हैं तो अपने सिबिल स्कोर को मेंटेन करके रखिए. जानिए इसके लिए आपका सिबिल स्कोर कितना होना चाहिए.
1/6सिबिल स्कोर एक तरह का रिपोर्ट कार्ड जैसा है. सिबिल स्कोर से आवेदक की क्रेडिट हिस्ट्री पता चलती है और उसके लोन बिहेवियर को जांचा जाता है. सिबिल स्कोर का दायरा 300 से 900 के बीच होता है. स्कोर जितना बेहतर होगा, आपको लोन भी उतनी ही अच्छी ब्याज दर के साथ मिल जाएगा.
2/6अगर किसी ग्राहक का 300 से 550 के बीच सिबिल स्कोर है तो इसके खराब माना जाता है. 550 से 650 के बीच है, इसे औसत माना जाता है. 650 से 750 के बीच है तो इस अच्छा माना जाता है और अगर 750 से 900 के बीच है तो इसे बहुत अच्छा माना जाता है.
3/6जानकारों की मानें तो होम लोन के लिए आपका सिबिल स्कोर 550 से 650 के बीच है तो ये औसत माना जाएगा. ऐसे में बैंक आपको लोन दे भी सकते हैं और इनकार भी कर सकते हैं. लेकिन अगर सिबिल स्कोर 650 से 750 के बीच है, तो बैंक इसे कंसीडर करते हैं और लोन दे देते हैं. वहीं अगर सिबिल स्कोर 750-900 के बीच है तो फिर बैंक बिना देरी किए सबसे बेहतर ब्याज दर के साथ आवेदक को लोन ऑफर कर देगा.
4/6सिबिल स्कोर अगर कम है तो दिक्कत बढ़ेगी. बैंक से लोन मिलने में मुश्किल पेश आएगी. लोन की मंजूरी/नामंजूरी क्रेडिट स्कोर पर निर्भर होती है. कम स्कोर हो तो लोन नामंजूर होने की आशंका ज्यादा होती है. कम स्कोर का असर लोन की रकम पर भी पड़ता है. मतलब अगर लोन मंजूर हो भी जाए तो संभव है कि अप्रूवल उतनी रकम के लिए न मिले, जितनी आप लेना चाहते हैं.
5/6तमाम क्रेडिट ब्यूरो सिबिल स्कोर को जारी करते हैं. इनमें ट्रांसयूनियन सिबिल, इक्विफैक्स, एक्सपेरियन और सीआरआईएफ हाईमार्क जैसी क्रेडिट इंफर्मेशन कंपनियों को प्रमुख माना गया है, इन कंपनियों को लोगों के वित्तीय रिकॉर्ड इकट्ठा करने, इसे मेंटेन करने और इस डेटा के आधार पर क्रेडिट रिपोर्ट / क्रेडिट स्कोर जेनरेट करने का लाइसेंस प्राप्त है.
6/6किसी भी तरह के लोन का भुगतान समय पर करें. होम लोन, ऑटो लोन, पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल में तालमेल बनाकर रखें. क्रेडिट कार्ड का बिल भरें. क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो कम रखें. क्रेडिट कार्ड पर लोन लेने से बचें. क्रेडिट स्कोर समय-समय पर चेक करें.