Home Loan के चलते आजकल लोगों के लिए घर खरीदना काफी आसान हो गया है. होम लोन के जरिए लोगों के पास आसानी से पैसों का इंतजाम हो जाता है और वो अपना पसंदीदा घर खरीद लेते हैं. हालांकि कई बार लोग महंगा घर खरीदने के चक्कर में होम लोन के तौर पर बड़ी रकम बैंक से उठा लेते हैं. बाद में इसकी EMI चुकाने में दिक्कत होती है और लोग डिफॉल्टर भी बन जाते हैं. फिर बैंक और रिकवरी एजेंट्स लोन वसूली करने के लिए उनके पीछे पड़ जाते हैं. आपके सामने ऐसी कोई समस्या आए तो एक गलती मत कीजिएगा क्योंकि अगर आपने लोन से पीछा छुड़ाने के लिए ये फैसला लिया तो अगले 7 वर्षों तक आपकी सिबिल रिपोर्ट पर ऐसा ठप्पा लग जाएगा कि दोबारा बैंक से लोन लेना भी मुश्किल हो जाएगा.
1/5कई बार लोग बैंक और रिकवरी एजेंट से पीछा छुड़ाने के लिए लोन सेटलमेंट करते हैं. इसे OTS यानी One Time Settlement भी कहा जाता है. सेटल्ड लोन बीच का एक रास्ता होता है, जिस पर उधारकर्ता और बैंक दोनों की सहमति होती है. आप लोन सेटलमेंट का फैसला बहुत सोच समझकर करें क्योंकि ये आपका सिबिल रिकॉर्ड खराबकर सकता है.
2/5लोन सेटलमेंट से आपको बैंक और रिकवरी एजेंट्स से तो छुटकारा मिल जाता है, लेकिन आपका सिबिल रिकॉर्ड खराब हो जाता है. सेटलमेंट के बाद क्रेडिट हिस्ट्री में Settled लिख दिया जाता है. इससे क्रेडिट स्कोर 50 से 100 पॉइंट या उससे भी ज्यादा कम हो सकता है. अगर लोन लेने वाला एक से ज्यादा क्रेडिट अकाउंट का सेटलमेंट करता है, तो क्रेडिट स्कोर इससे भी ज्यादा कम हो सकता है.
3/5दिक्कत की बात ये है कि क्रेडिट रिपोर्ट में अकाउंट स्टेटस सेक्शन में इस बात का जिक्र अगले 7 सालों तक रह सकता है आपने अपने लोन को सेटल किया है. ऐसे में आपके लिए आने वाले वर्षों में लोन लेना मुश्किल हो सकता है. आप बैंक द्वारा ब्लैक लिस्टेड भी किए जा सकते हैं.
4/5दरअसल लोन सेटलमेंट के समय डिफॉल्टर को बकाया प्रिंसिपल अमाउंट तो पूरा देना पड़ता है, लेकिन इंटरेस्ट अमाउंट के साथ-साथ पेनल्टी और अन्य चार्ज को आंशिक या पूर्ण रूप से माफ किया जा सकता है. ऐसे में सेटलमेंट करने पर बैंक के पास वो पूरी रकम नहीं पहुंचती जो उधारकर्ता को अपने लोन टेन्योर के बीच ब्याज समेत लौटानी होती है. इसलिए बैंक उसकी सिबिल रिपोर्ट में Settled लिख देते हैं.
5/5जानकार लोगों का मानना है कि डिफॉल्टर बनने की स्थिति ही न आए, इसके लिए आपको लोन लेते समय लोन की राशि, टेन्योर और घर का बजट सबकुछ दिमाग में रखकर डिसीजन लेना चाहिए. कोशिश करें कि आप मकान खरीदते समय ज्यादा से ज्यादा डाउन पेमेंट करें. इससे आपको बहुत लोन नहीं लेना पड़ेगा. आप अगर 30 से 40 प्रतिशत तक डाउन पेमेंट कर देते हैं तो आपके लिए काफी आसानी होगी. इसके अलावा आप जो भी मकान ले रहे हैं, उसकी कॉस्ट आपकी कुल वार्षिक आय से तीन गुना से ज्यादा नहीं हो. आपकी EMI आपकी इनकम की 30 प्रतिशत से ज्यादा न हो. इन बातों का ध्यान रखेंगे तो होम लोन को लेने के बाद आसानी से चुका भी देंगे.