ज्यादातर लोग लोन लेते वक्त सिर्फ ब्याज दर (Interest Rate) पर ध्यान देते हैं. लेकिन बैंक की कमाई और आपकी EMI दोनों का सीधा रिश्ता Loan Interest Spread से होता है, जिसे आमतौर पर ‘स्प्रेड’ कहा जाता है. ये वो नंबर है जो लोन की पूरी अवधि में लाखों रुपये का फर्क डाल सकता है. खास बात ये है कि इसके बारे में अधिकतर लोगों को जानकारी भी नहीं होती. इसके कारण वो अनजाने में खुद का लाखों का नुकसान कर लेते हैं और उन्हें इसकी खबर तक नहीं लगती. जानिए इसके बारे में.
1/7दरअसल आपकी फाइनल ब्याज दर दो चीज़ों से मिलकर बनती है - फाइनल ब्याज दर = RBI का रेपो रेट + बैंक का स्प्रेड. रेपो रेट RBI तय करता है, लेकिन स्प्रेड हर बैंक का अपना मुनाफ़ा या रिस्क प्रीमियम होता है. ये वो अतिरिक्त ब्याज है जो बैंक रेपो रेट के ऊपर लगाकर आपसे कमाता है. यही वो असली नंबर है जो हर बैंक के लिए अलग-अलग होता है और जिस पर सबसे ज्यादा ध्यान देना है.
2/7अगर RBI का रेपो रेट 5.5% है. बैंक A का स्प्रेड: 2.1%, ऐसे में फाइनल ब्याज दर 7.6% हुई. वहीं बैंक B का स्प्रेड: 2.3% तो फाइनल ब्याज दर 7.8% हुई. रेपो रेट समय-समय पर बदलता है लेकिन इस स्प्रेड में कोई बदलाव नहीं होता. अब जब कभी RBI रेपो रेट 6% कर देगा, तो फर्क और साफ दिखेगा. बैंक A की नई दर 8.1%, जबकि बैंक B की 8.3% हो जाएगी. वहीं रेपो रेट 6.5% होने पर बैंक A की नई दर 8.6%, जबकि बैंक B की 8.8% हो जाएगी. यही छोटा सा 0.2% का अंतर होम लोन की पूरी अवधि में भारी पड़ सकता है और आपका अच्छा खासा नुकसान करवा सकता है.
3/7हर ग्राहक के लिए बैंक अलग स्प्रेड तय करता है. ये कुछ बातों पर निर्भर करता है जैसे- क्रेडिट स्कोर: जितना ऊंचा, उतना कम स्प्रेड. जॉब प्रोफाइल: स्थिर नौकरी = कम रिस्क = कम स्प्रेड. लोन की रकम और LTV रेश्यो: कम रेश्यो, बेहतर स्प्रेड.
4/7पहला- आपका एक्सटर्नल बेंचमार्क (रेपो रेट) क्या है? दूसरा- आप कितना ‘स्प्रेड’ लगा रहे हैं? तीसरा- क्या अच्छे क्रेडिट स्कोर पर स्प्रेड कम हो सकता है? इन सवालों से आप खुद को लाखों रुपये के अनावश्यक ब्याज से बचा सकते हैं.
5/7आमतौर पर, एक बार फिक्स हो जाने के बाद स्प्रेड पूरी लोन अवधि तक वैसा ही रहता है. हां, अगर आपकी साख (Credit Profile) बहुत बिगड़ जाती है, तो बैंक इसे रिव्यू कर सकता है, लेकिन ऐसे मामले बहुत कम होते हैं.
6/7स्प्रेड का कॉन्सेप्ट सिर्फ होम लोन तक सीमित नहीं है. ये हर उस लोन पर लागू होता है जो फ्लोटिंग रेट पर और किसी एक्सटर्नल बेंचमार्क (जैसे रेपो रेट) से जुड़ा हो जैसे- कार लोन, एजुकेशन लोन या लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी.
7/7रेपो रेट घटने पर आपकी फाइनल ब्याज दर भी कम होती है. बैंक कई बार EMI घटाने की बजाय लोन की अवधि कम कर देते हैं ताकि आप जल्दी लोन चुका सकें. हालांकि, आप चाहें तो EMI कम कराने का विकल्प चुन सकते हैं.