Home Loan लेने के बाद अगर आप उसकी किस्तें समय से न चुका पाएं तो बैंक आपको Loan Defaulter घोषित कर देते हैं. नियम के मुताबिक अगर आप लगातार 3 किस्तें न चुकाएं तो बैंक लोन अकाउंट को NPA मान लेता है और उधारकर्ता को डिफॉल्टर घोषित कर देता है. उधारकर्ता के लोन डिफॉल्टर बनने के बाद बैंक संपत्ति की नीलामी के लिए कार्रवाई शुरू करता है. हालांकि अगर आप चाहें तो डिफॉल्टर बनने के बाद भी अपनी संपत्ति को नीलाम होने से रोक सकते हैं. यहां जानिए वो 3 तरीके जो आपको लोन डिफॉल्टर बनने से बचा सकते हैं और अगर आप डिफॉल्टर बन गए हैं तो आपकी संपत्ति को नीलाम होने से रोकने में मददगार हो सकते हैं. इन तरीकों के बारे में बैंक ने खुद जानकारी दी है.
1/5SBI के अनुसार हर उधारकर्ता को डिफॉल्ट से बचना चाहिए. हालांकि जब आप डिफॉल्ट करते हैं, तब भी आपके पास 6-7 महीने का समय होता है, जिसके दौरान आप स्थिति को ठीक कर सकते हैं और चीजों को सामान्य स्थिति में ला सकते हैं. नीचे की स्लाइड्स में जानिए वो 3 तरीके जो डिफॉल्ट होने के बाद भी सब कुछ फिर से ठीक करने में मददगार हो सकते हैं.
2/5बैंक से ग्रेस पीरियड मांगें. आरबीआई के नियमों के तहत, बैंक कुछ नियमों और शर्तों के साथ आपको 6 महीने की मोहलत दे सकते हैं. इसके अलावा आप अपने लोन को फिर से रीस्ट्रक्चर करने पर भी विचार कर सकते हैं. रीस्ट्रक्चर कराते समय आप बैंक को प्रस्ताव दे सकते हैं कि मौजूदा समय में ईएमआई को कम किया जाए और बाद में बडी किस्तें (बैलून पेमेंट्स) दी जाएं. अगर आप पारदर्शी रहेंगे तो बैंक आपको समस्या के समाधान के लिए नए रास्ते भी दे सकते हैं.
3/5दूसरा तरीका ये है कि आप आप अपने कुछ निवेशों को भुना सकते हैं या फिर अपने पीएफ बैलेंस का इस्तेमाल करके अंतरिम बकाया चुकाने के लिए कर सकते हैं और फिर सामान्य स्थिति में वापस आ सकते हैं. हालांकि इस फैसले से आपकी दीर्घकालिक वित्तीय योजनाओं पर असर पड़ सकता है, लेकिन इससे आप मौजूदा हालात सुधारने में मदद मिलेगी. आप बाद में अपनी बचत फिर से कर सकते हैं.
4/5तीसरा तरीका है कि आप अपनी संपत्तियों जैसे सोना, प्रॉपर्टी या बीमा पॉलिसी वगैरह के बदले लोन ले सकते हैं. इन लोन पर ब्याज दरें आमतौर पर वाजिब होती हैं, जैसे ही आपके हालात सुधरें, आप इन लोन को चुका सकते हैं. इससे न केवल आपका होम लोन डिफॉल्ट होने से बचेगा, बल्कि आपका घर भी बैंक के कब्जे में जाने से सुरक्षित रहेगा.
5/5SBI के मुताबिक होम लोन डिफॉल्ट का आपके सिबिल स्कोर और क्रेडिट स्टैंडिंग पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है, इससे भविष्य में आपके लिए लोन लेना मुश्किल हो सकता है. इसके अलावा घर खोने या रिकवरी एजेंट्स से निपटने का तनाव मानसिक रूप से बहुत परेशान कर सकता है. ऐसे में लोन डिफॉल्ट से बचने का हर संभव प्रयास करना बेहतर है.