Fixed Deposit mistakes: एफडी में इन्वेस्टमेंट सालों साल से सेफ माना जाता है. लेकिन फिर भी कई बार आधे से ज्यादा लोग अनजाने में इस इन्वेस्टमेंट में ऐसी गलती कर देते हैं जो फ्यूचर में उन के मुनाफे पर भारी तक पड़ जाती है, तो हम आज जानेंगे एफडी निवेश की 5 छुपी हुई गलतियों जो हमको कभी नहीं करना चाहिए.
1/8भारत में बैंक एफडी (Fixed Deposit) को सबसे हमेशा से सबसे सेफ और बेस्ट ऑप्शन माना जाता है. आमतौर पर इन्वेस्टर्स को लगता है कि एफडी में लगाया गया पैसा पूरी तरह सेफ होता है और ब्याज दर पहले से तय होने के कारण बाजार के उतार-चढ़ाव का इस पर कोई असर नहीं पड़ता. एक बार बैंक में एफडी कर दी, तो तय ब्याज मिलता ही है ऐसा माना जाता है.वैसे अक्सर एफडी में निवेश करने वाले कुछ मिस्टेक कर देते हैं जिससे बाद में मुनाफे से चूक जाते हैं?
2/8जवाब है,नहीं...क्योंकि निवेश के दौरान कुछ गलती कर दी जाती हैं.इससे जुड़े कुछ ऐसे जोखिम हैं, जो लोग अक्सर इग्नोर कर देते हैं.एफडी में निवेश के दौरान कौन सी गलती कभी नहीं करना चाहिए?
3/8एफडी में ब्याज तो पहले से फिक्स होता है, लेकिन महंगाई कभी फिक्स नहीं रहती ,तो जब महंगाई अचानक बढ़ जाती है, तो एफडी का फायदा अपने आप कम हो जाता है. हमेशा बाहर की चीजें महंगी हो जाएं, तो एफडी का ब्याज उतना काम का नहीं रहता, जैसे कि मान लीजिए महंगाई 7% है और एफडी पर 6–7% ही मिल रहा है.तो ऐसे में असली कमाई लगभग जीरो जैसी हो जाती है. वैसे कई बार तो महंगाई ब्याज से आगे निकल जाती है और नुकसान होने लगता है.तो इसलिए एफडी में पैसा लगाते समय महंगाई को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.
4/8भारत के सभी बैंक आरबीआई के रूल्स के हिसाब से चलते हैं.अगर किसी बैंक की हालत बिगड़ती है, तो आरबीआई उस पर रोक लगा सकता है. ऐसी स्थिति में खाताधारकों का पैसा तुरंत नहीं निकल पाता है.लेकिन कई बार एफडी की रकम कुछ टाइम के लिए फंस भी सकती है.इसलिए एफडी कराते वक्त बैंक चुनना बहुत सोच-समझकर करना चाहिए.
5/8बैंक अक्सर एफडी की ब्याज दरें 6 महीने, 1 साल या 3 साल जैसे तय टेन्योर पर बदलते हैं.लेकिन कई बार इन राउंड फिगर वाली एफडी पर ब्याज थोड़ा कम रहता है.हैरानी की बात यह है कि 1 दिन कम या 1 दिन ज्यादा वाली एफडी पर रेट बेहतर मिल जाता है.तो इसलिए केवल 1 साल या 3 साल देखकर एफडी न करें.हमेशा एफडी कराने से पहले अलग-अलग टेन्योर की दरें जरूर मिलान कर लें
6/8ज़्यादातर लोग सोचते हैं कि एफडी में रखा पूरा पैसा 100% सुरक्षित होता है.लेकिन सच यह है कि सुरक्षा की भी एक तय सीमा होती है.जी हां अगर बैंक या फाइनेंस कंपनी डिफॉल्ट कर जाए, तो पूरी रकम वापस नहीं मिलती है.DICGC के नियमों के तहत सिर्फ ₹5 लाख तक की गारंटी मिल सकती है. बता दें कि ₹5 लाख से ऊपर रखी गई एफडी पर कोई सुरक्षा कवर नहीं होता है.तो इसलिए बड़ी रकम एफडी में डालते समय ये बात समझना बेहद जरूरी है.
7/8एफडी को जरूरत पड़ने पर समय से पहले तोड़ा जा सकता है.लेकिन ऐसा करने पर बैंक प्री-मैच्योर पेनल्टी काट लेता है.यह पेनल्टी हर बैंक में अलग-अलग हो सकती है. वैसे टैक्स सेविंग एफडी 5 साल से पहले तोड़ने पर टैक्स छूट चली जाती है.तो इसलिए एफडी करने से पहले नियम और पेनल्टी जरूर समझ लें.
8/8बैंक एफडी सुरक्षित जरूर है, लेकिन इसे पूरी तरह रिस्क फ्री समझना गलती हो सकती है. इन्वेस्टमेंट से पहले महंगाई, बैंक की स्थिति, बीमा सीमा और लिक्विडिटी जैसे पहलुओं को जरूर समझें, ताकि आपका पैसा सच में सेफ और फायदे में रहे( डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें)