Digital payment safety tips: देशभर में डिजिटल पेमेंट का चलन इतनी तेजी से बढ़ा है कि अब रोजमर्रा की खरीदारी से लेकर बड़े-बड़े इलेक्ट्रॉनिक आइटम तक सबकुछ ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए हो रहा है. चाहे UPI हो, क्रेडिट कार्ड हो, या वॉलेट पेमेंट लोग अब नकद से ज्यादा डिजिटल पर भरोसा कर रहे हैं. लेकिन जहां सुविधा है, वहीं खतरा भी है. ऑनलाइन पेमेंट, फेक ऑफर, स्क्रीन-शेयरिंग फ्रॉड और फिशिंग जैसे जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं. इसी को देखते हुए SBI Card ने ग्राहकों के लिए बेहद जरूरी चेतावनियां जारी की हैं.
1/10आज सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर हजारों लिंक घूमते रहते हैं, जिनमें से बहुत से फेक होते हैं. ग्राहकों को हमेशा ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट या भरोसेमंद ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से ही खरीदारी करनी चाहिए. रैंडम लिंक पर क्लिक करना डिजिटल फ्रॉड का सबसे आसान रास्ता है.
2/10कई यूजर्स अनजान लोगों की बातों में आकर स्क्रीन शेयर कर देते हैं. कोई भी ऐप, कोई भी एजेंट, कोई भी बैंक आपसे कभी स्क्रीन शेयर करने को नहीं कहता. किसी भी थर्ड पार्टी ऐप (जैसे अनजानी APK फ़ाइल) को डाउनलोड करना सीधे-सीधे धोखाधड़ी को न्योता देना है.
3/10आजकल फर्जी वेबसाइटें 70%, 80% या 90% तक डिस्काउंट दिखाकर ग्राहकों को फंसाती हैं. ऐसे ऑफर्स की पहले ब्रांड से पुष्टि करें. अगर कोई ऑफर “बहुत अच्छा” लग रहा है, तो लगभग तय है कि उसमें कोई गड़बड़ है.
4/10क्रेडिट कार्ड यूजर्स को अक्सर SMS मिलता है, “आपके रिवॉर्ड पॉइंट्स एक्सपायर हो रहे हैं, तुरंत रिडीम करें.” ऐसे मैसेज सबसे बड़े फ्रॉड होते हैं. किसी भी लिंक पर क्लिक न करें और न ही कॉलर को OTP, कार्ड नंबर या CVV बताएं.
5/10यदि कार्ड से कोई अनधिकृत भुगतान हुआ है, तो SMS/ऐप नोटिफिकेशन से तुरंत पता चल जाएगा. इसलिए सभी यूजर्स SMS और In-app अलर्ट ज़रूर एक्टिव रखें. इससे मिनटों में फ्रॉड रोका जा सकता है.
6/10फेक ईमेल और कॉल में कहा जाता है, “आपका अकाउंट ब्लॉक हो जाएगा…” “आपके पॉइंट्स एक्सपायर हो रहे हैं…” “आपका KYC पूरा नहीं है…” किसी भी ऐसी जानकारी के लिए हमेशा आधिकारिक कस्टमर केयर से ही पुष्टि करें. बैंक कभी OTP, PIN, CVV या पासवर्ड नहीं मांगता.
7/10साइबर अपराधी सबसे पहले पुराने फोन, आउटडेटेड ब्राउज़र और पुराने ऐप को निशाना बनाते हैं. फोन, ब्राउज़र और पेमेंट ऐप हमेशा अपडेटेड हों. इससे मालवेयर और वायरस से सुरक्षा बढ़ती है. साथ ही, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन हमेशा ऑन रखें.
8/10ईमेल, बैंकिंग और सोशल मीडिया के पासवर्ड एक जैसे नहीं होने चाहिए. इसे समय-समय पर बदलते रहें.
9/10बहुत लोग शिकायत लिखते समय ट्विटर या फेसबुक पर अपना कार्ड नंबर, मोबाइल नंबर या स्क्रीनशॉट पोस्ट कर देते हैं. ये बेहद खतरनाक है. कोई भी बैंक कभी सोशल मीडिया पर ऐसी जानकारी नहीं मांगता.
10/10अगर आपको SMS आए कि “आपके अकाउंट में रिफंड आया है, इसे क्लेम करें”, तो सबसे पहले बैंक ऐप में बैलेंस चेक करें. बिना पुष्टि किए कोई लिंक न खोलें.