Credit Card Charges: अगर आप क्रेडिट कार्ड खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपको कुछ बातों का यानी की इस पर लगने वाले चार्जिसेस का ध्यान जरूर रखना चाहिए. क्योंकि आज के समय में क्रेडिट कार्ड लेते समय सबसे ज्यादा खुशी इस बात की होती है कि अब कुछ भी खरीदने के लिए सैलरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा. कोई भी इमरजेंसी होगी तो हम तुरंत कार्ड (Credit Card charges) से पेमेंट कर देंगे और कैश भी निकाल लेंगे. लेकिन सबसे जरूरी है ये जानना कि बैंक आपसे इसी कार्ड पर कितने तरह के चार्ज वसूलता है और आपको पता भी नहीं चलता है. आइए समझते हैं इन चार्जेस के बारे में डिटेल में.
1/10फ्री क्रेडिट कार्ड का ऑफर एक साल में खत्म हो जाता है. उसके बाद कार्ड के प्रकार और क्रेडिट लिमिट के आधार पर 500 से 3,000 रुपए तक एनुअल फीस वसूली जाती है.
2/10क्रेडिट लिमिट पार करने पर ग्राहक से यह फीस वसूली जाती है. सामान्य तौर पर यह ओवरड्रॉ करने की लिमिट का एक निश्चित प्रतिशत होती है. कई बार ये अधिक भी हो सकती है.
3/10यदि ग्राहक आउटस्टेशन चेक से क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान करता है तो चेक राशि के निश्चित प्रतिशत के तौर पर सर्विस फीस वसूली जाती है. इसमें न्यूनतम शुल्क तय होता है.
4/10ज्यादातर क्रेडिट कार्ड कंपनियां डुप्लिकेट स्टेटमेंट जारी करने पर निश्चित रशि वसूलती हैं. इस बारे में किसी भी कार्ड कंपनी की कोई एक समान राशि तय नहीं है.
5/10विदेशी मुद्रा में लेन-देन को नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर (मास्टर/वीजा) की तय दर के आधार पर रुपए में बदला जाता है. इस राशि पर एक तय प्रतिशत फीस के तौर पर वसूली जाती है.
6/10क्रेडिट कार्ड से पेट्रोल और रेलवे टिकट खरीदने पर निश्चित राशि फीस के तौर पर वसूली जाती है. ये एक सुविधा है, जिसे अक्सर लोग अदा करने में दिक्कत महसूस नहीं करते.
7/10क्रेडिट कार्ड से कैश विथड्रॉ करने पर भी फीस वसूली जाती है. यह ट्रांजेक्शन की राशि का निश्चित प्रतिशत हो सकती है. इसे कुछ सामान्य तो कुछ जरूरत से अधिक ही वसूलते हैं.
8/10ड्यू डेट के बाद हर महीने 1.99% से 4.00% तक की दर से ब्याज चुकाना पड़ सकता है. भले ही यह चार्ज मुनासिब लगे, पर सालाना तौर पर देखें तो यह 27% से 48% हो जाता है.
9/10क्रेडिट कार्ड की फीस, ब्याज और अन्य चार्जेस पर भी 18 फीसदी की दर से जीएसटी वसूला जाता है, इसलिए ब्याज और अन्य चार्जेस को कम कर जीएसटी से भी राहत मिलती है.
10/10क्रेडिट कार्ड कंपनियां ग्राहक द्वारा देरी से किए गए हर पेमेंट पर लेट पेमेंट फीस वसूलती हैं. यह एक निश्चित राशि या बकाया राशि का एक निश्चित प्रतिशत हो सकता है.