भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में नीतिगत दर रेपो रेट (Repo Rate) में कोई बदलाव नहीं किया और उसे 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा. आरबीआई ने कहा कि खाने के सामान की ऊंची महंगाई को नरअंदाज नहीं किया जा सकता और इसके अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव को रोकने के लिए सतर्क रहने की जरूरत है. भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से रेपो रेट को लगातार नौवीं बार ना बदलने के बाद कुछ बैंकों ने अपनी दरों (Bank Lending Rates) में बदलाव किया है.
1/5पब्लिक सेक्टर के केनरा बैंक ने फंड की सीमांत लागत आधारित ब्याज यानी एमसीएलआर (MCLR) को 0.05 फीसदी बढ़ा दिया है. यह बढ़ोतरी सभी अवधि के लोन के लिए की गई है. इससे ज्यादातर कंज्यूमर लोन महंगे हो जाएंगे. वर्तमान में यह दर 8.95 फीसदी है, जो अब 9 फीसदी हो जाएगी.
2/53 साल के लिए MCLR रेट 9.40 फीसदी होगी, जबकि 2 साल की अवधि के लिए इस दर को 0.05 प्रतिशत बढ़ाकर 9.30 प्रतिशत कर दिया गया है. 1, 3 और 6 महीने की अवधि के लिए ब्याज दर 8.35-8.80 प्रतिशत के दायरे में होगी. बता दें कि ये नई दरें 12 अगस्त, 2024 से प्रभावी होंगी.
3/5इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा ने 12 अगस्त से कुछ अवधि के लिए एमसीएलआर को बढ़ा दिया है. बैंक ने 3, 6 और 12 महीने की अवधि के लिए लेंडिंग रेट्स में 5 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है. 3 महीने की एमसीएलआर को 8.45 फीसदी से बढ़ाकर 8.5 फीसदी कर दिया गया है. वहीं 6 महीने की एमसीएलआर को 8.70 फीसदी से बढ़ाकर 8.75 फीसदी कर दिया गया है. वहीं 1 साल की एमसीएलआर को 8.90 फीसदी से बढ़ाकर 8.95 फीसदी कर दिया गया है.
4/5यूको बैंक ने भी ब्याज दरों को बढ़ा दिया है. बैंक ने अपने MCLR के साथ साथ अन्य बेंचमार्क रेट्स में भी बढ़ोतरी की है. बैंक का ओवरनाइट MCLR 8.20 फीसदी हो गया है. वहीं एक महीने का MCLR 8.35 फीसदी कर दिया गया है. बैंक ने तीन महीने का MCLR 8.50 फीसदी कर दिया है. इनके अलावा छह महीने का MCLR 8.80 फीसदी और एक साल का MCLR 8.95 फीसदी कर दिया गया है. वहीं दूसरी ओर, एक साल का TBLR 6.85 फीसदी पर पहुंच गया है. बैंक ने बाकी दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है. बता दें कि ये नई दरें 10 अगस्त 2024 से लागू हो गई हैं.
5/5भारतीय रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति समीक्षा में लगातार नौवीं बार नीतिगत दर रेपो में कोई बदलाव नहीं किया और इसे 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा. एमपीसी के छह सदस्यों में से चार ने नीतिगत दर को यथावत रखने के पक्ष में मतदान किया. एमपीसी ने बीते वर्ष फरवरी में नीतिगत दर में संशोधन किया था और इसे बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत किया था. आरबीआई ने रेपो दर को ऐसे समय यथावत रखा है जब विकसित देशों में कई केंद्रीय बैंकों ने नीतिगत दर में बदलाव किया है.