क्रेडिट कार्ड आज की लाइफस्टाइल का हिस्सा है, लेकिन क्या यह आपको कर्ज में डुबो रहा है? फाइनेंशियल एक्सपर्ट ने क्रेडिट कार्ड के सही इस्तेमाल और पैसे बचाने के 5 'गोल्डन रूल्स' बताए हैं.जी हां 30% लिमिट का इस्तेमाल और पूरा बिल चुकाने जैसे इन टिप्स से आप भारी ब्याज और कर्ज के जाल से बच सकते हैं.
1/11आज के टाइम में क्रेडिट कार्ड केवल एक पेमेंट टूल नहीं, बल्कि लोगों की लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है ऑनलाइन शॉपिंग हो, महंगे गैजेट्स खरीदने हों या अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए, ज्यादातर लोग सबसे पहले क्रेडिट कार्ड ही निकालते हैं. असल में परेशानी तब होती है जब, अभी खरीदो, बाद में चुकाओ वाली आदत पड़ जाती है और वो धीरे-धीरे कर्ज में फंसाती है, जिससे महीने के लास्ट में भारी बिल, बढ़ता ब्याज और लगातार बढ़ती EMI बजट बिगाड़ देती है.
2/11एक्सपर्ट तारेश भाटिया का मानना है कि क्रेडिट कार्ड खुद में खराब नहीं होता, बल्कि गलत तरीके से किया जाने वाला इस्तेमाल उसे परेशानी का कारण बना देता है. एक्सपर्ट के मुताबिक, अगर कुछ बेसिक नियमों का पालन किया जाए, तो क्रेडिट कार्ड आपकी फाइनेंशियल लाइफ को आसान भी बना सकता है.
3/11तारेश भाटिया का कहना है कि आमतौर पर लोग क्रेडिट कार्ड को एक्स्ट्रा पैसा समझने की गलती कर बैठते हैं जबकि सच तो ये है कि ये एक तरह का उधार है, जिसे समय पर न चुकाने पर भारी ब्याज देना पड़ सकता है. असल में क्रेडिट कार्ड का सही यूज आपकी क्रेडिट हिस्ट्री मजबूत करता है और CIBIL स्कोर बेहतर बनाता है जिससे फ्यूचर में आसानी से लोन मिल पाता है.
4/11एक्सपर्ट की सबसे पहली सलाह ये ही है कि अपने कार्ड की कुल लिमिट का 30% से ज्यादा खर्च करने से बचें. मान लें कि आपके कार्ड की लिमिट 1 लाख रुपये है, तो ट्राई करें हीनेभर में 30 हजार रुपये से ज्यादा खर्च न हो.ऐसा करने से CIBIL स्कोर बेहतर रहता है और कर्ज का दबाव कम रहता है. जी हां एक्सपर्ट के मुताबिक, लगातार पूरी लिमिट इस्तेमाल करना बैंक के लिए एक “रिस्क सिग्नल” माना जाता है.
5/11आज के टाइम पर फोन से लेकर टीवी तक EMI पर खरीदना आम हो गया है. लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि यह आदत फ्यूचर की कमाई को पहले से खर्च करने जैसी है. बता दें कि तारेश भाटिया सलाह देते हैं कि जरूरी चीजों और इमरजेंसी के अलावा EMI से बचें. जी हां केवल लाइफस्टाइल या दिखावे के खर्च को फाइनेंस करना लंबे समय में नुकसानदायक हो सकता है. तो उनका कहना है कि अगर किसी चीज के लिए तुरंत पैसा नहीं है, तो खरीदारी टालना ज्यादा समझदारी है.
6/11अक्सर लोगों को मंथ के लास्ट में समझ नहीं आता कि पैसा आखिर गया कहां. एक्सपर्ट के मुताबिक, अपने खर्चों को कैटेगरी के हिसाब से ट्रैक करना बहुत जरूरी है जैसे फूड,शॉपिंग,ट्रैवल,एंटरटेनमेंट,ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन. जी हां इससे यह साफ दिखने लगता है कि कौन से खर्च जरूरी थे और कहां फिजूलखर्ची हुई आज कई मोबाइल ऐप्स यह काम आसान बना रहे हैं.
7/11क्रेडिट कार्ड कंपनियां अक्सर Minimum Due भरने का ऑप्शन देती हैं कई लोग सोचते हैं कि इससे काम चल जाएगा, लेकिन यही सबसे महंगा फैसला साबित हो सकता है. असल में तारेश भाटिया कहते हैं कि हमेशा पूरा बिल चुकाने की कोशिश करें. असल में Minimum Due भरने पर बाकी रकम पर भारी ब्याज लगता है. क्योंकि कई बार यह ब्याज 30% से 40% सालाना तक पहुंच जाता है. एक्सपर्ट हमेशा से ऑटो-पे फीचर इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं ताकि ड्यू डेट मिस न हो और लेट फीस से बचा जा सके.
8/11जैसे-जैसे इनकम बढ़ती है, लोग महंगे गैजेट्स, ब्रांडेड सामान और लग्जरी खर्चों की तरफ तेजी से बढ़ने लगते हैं. लेकिन एक्सपर्ट के हिसाब से लाइफस्टाइल अपग्रेड हमेशा बचत और निवेश के आधार पर होना चाहिए, न कि क्रेडिट कार्ड के उधार पर उनके मुताबिक लाइफस्टाइल अगर कर्ज के भरोसे बढ़ रही है, तो वह लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होती.
9/11तारेश भाटिया एक बेहद आसान लेकिन जरूरी रूल्स बताते हैं कि अगर आप इस मंथ खर्च की गई रकम अगले महीने आराम से नहीं चुका सकते, तो उस चीज को खरीदने से पहले दोबारा सोचिए. यानी कि क्रेडिट कार्ड सुविधा के लिए होना चाहिए, टेंशन के लिए नहीं.
10/11अगर समझदारी से इस्तेमाल किया जाए, तो क्रेडिट कार्ड कई फायदे भी देता है , जैसे कि कैशबैक,एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस,रिवॉर्ड पॉइंट्स,ऑनलाइन ऑफर्स, बेहतर क्रेडिट हिस्ट्री...लेकिन इन फायदों का लाभ तभी है जब बिल टाइम पर चुकाया जाए.
11/11क्रेडिट कार्ड का अगर सही से यूज किया जाए तो यह आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग को मजबूत बना सकता है, लेकिन लापरवाही इसे भारी कर्ज में बदल सकती है. जी हां इसलिए एक्सपर्ट्स मानते हैं कि असली स्मार्टनेस ज्यादा खर्च करने में नहीं, बल्कि खर्च को कंट्रोल करने में है इसलिए अगली बार जब आप कार्ड स्वाइप करें, तो सिर्फ ऑफर और EMI न देखें कि यह भी सोचें कि उसे चुकाने की क्षमता आपके पास है या नहीं.