RBI Monetary Policy की शुरुआत 4 दिसंबर से हो रही है. तीन दिनों तक चलने वाली इस बैठक के नतीजे 6 दिसंबर को आएंगे. उम्मीद की जा रही है कि इस बार की बैठक में रेपो रेट को लेकर कोई बड़ा फैसला सुनाया जा सकता है. रेपो रेट कम या ज्यादा होने का असर आम आदमी की जेब पर भी पड़ता है. रेपो रेट घटने पर लोन सस्ते हो जाते हैं और रेपो रेट बढ़ने पर लोन महंगे हो जाते हैं. RBI MPC की मीटिंग से नतीजे क्या होंगे, ये तो 6 दिसंबर को पता चलेगा, लेकिन उससे पहले आप यहां जान लीजिए वो 5 तरीके जो आपके सिर पर भारी-भरकम Home Loan की EMI का बोझ हर हाल में कम करने में मदद करेंगे.
1/5अगर आपके होम लोन ब्याज दर ज्यादा है, जिसकी वजह से हर महीने आपको भारी-भरकम EMI देनी पड़ती है, तो आप लोन को रीफाइनेंस करवा सकते हैं. लोन रीफाइनेंसिंग में कम ब्याज दर जैसी शर्तों वाला नया लोन लिया जाता है और पुराने लोन को क्लोज करा दिया जाता है. इसके बाद नए लोन का पुनर्भुगतान शुरू कर दिया जाता है.
2/5जब भी आपको बोनस, बचत या कहीं से एक्स्ट्रा कमाई हो तो उस रकम का इस्तेमाल लोन का प्री-पेमेंट करने के लिए करें. लोन का प्रीपेमेंट करने से आपका प्रिंसिपल अमाउंट कम होगा और आपकी EMI भी छोटी हो जाएगी.
3/5अगर आपकी EMI बहुत ज्यादा है और इसके कारण आपके घर का बजट गड़बड़ा रहा है तो आप अपने लोन के टेन्योर को बढ़ा सकते हैं. टेन्योर बढ़ाने से आपकी EMI छोटी हो जाएगी हालांकि इससे लोन पर लिए जाने वाले कुल ब्याज की रकम बढ़ जाएगी.
4/5अगर आप काफी लंबे समय से टाइम पर लोन का रीपेमेंट करते आ रहे हैं और बैंक के भरोसेमंद ग्राहक हैं, तो आप अपने बैंक से ब्याज दर को कम करने के लिए रिक्वेस्ट कर सकते हैं. कभी-कभी बैंक अपने पुराने ग्राहकों को कम ब्याज दर का फायदा दे देते हैं.
5/5अगर आप पहली बार घर खरीद रहे हैं तो प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) जैसी सरकारी योजनाओं का फायदा लें. इस योजना के तहत ब्याज दर पर सब्सिडी मिलती है. इसके अलावा लोन लेते समय डाउन पेमेंट ज्यादा करने की कोशिश करें. इससे आपकी EMI शुरुआत से ही उतनी ही बनेगी, जितनी आप आसानी से दे सकें.