अक्सर देखा गया है कि ज़्यादातर लोग बिना गहराई से समझे ही पर्सनल लोन (Personal Loan), गोल्ड लोन (Gold Loan), होम लोन (Home Loan), क्रेडिट कार्ड (Credit Card) और दूसरे तरह की क्रेडिट लाइन (Credit Line) के लिए अप्लाई कर देते हैं. किसी भी तरह का लोन लेने से पहले उसके एग्रीमेंट, मुख्य शर्तें और नियम-कायदों को अच्छी तरह समझना जरूरी है. आइए जानते हैं लोन से जुड़े 10 जरूरी शब्दों के मतलब, जिनके बारे में सबको पता होना चाहिए.
1/10यह वह असली रकम है जो आप बैंक या लोन कंपनी से लेते हैं. ब्याज (Interest) इसी पर लगाया जाता है और जैसे-जैसे आप किस्त चुकाते हैं, यह रकम घटती जाती है.
2/10यानी उधार ली गई रकम पर लगने वाला प्रतिशत. यह फिक्स्ड भी हो सकता है (जो नहीं बदलता) या फ्लोटिंग भी (जो मार्केट रेट्स के हिसाब से बदलता है). किसी भी लोन को चुनने में ब्याज दर सबसे बड़ा फैक्टर होता है.
3/10ईएमआई यानी इक्वेटेड मंथली इंस्टॉलमेंट. यह हर महीने चुकाई जाने वाली तय रकम होती है जिसमें प्रिंसिपल और ब्याज दोनों शामिल रहते हैं. ईएमआई इस तरह से बनाई जाती है कि पूरी लोन अवधि में आसानी से रीपेमेंट हो सके.
4/10यह वह समय होता है, जिसमें आपको लोन चुकाना होता है. लंबी अवधि में ईएमआई छोटी होती है, लेकिन ब्याज ज़्यादा देना पड़ता है. वहीं छोटी अवधि में ईएमआई बड़ी होती है लेकिन ब्याज कम देना पड़ता है.
5/10यह लोन की पूरी सालाना लागत दिखाता है. इसमें ब्याज के साथ-साथ बाकी सारे चार्ज भी शामिल होते हैं. एपीआर देखने से आपको असली खर्च का अंदाज़ा हो जाता है.
6/10प्रीपेमेंट मतलब लोन की रकम समय से पहले चुकाना. इससे ब्याज का बोझ कम होता है. लेकिन कई बार बैंक या कंपनी इस पर पेनल्टी भी लगा सकती है, इसलिए शर्तें पहले से समझना ज़रूरी है.
7/10लोन मंज़ूर करने की प्रोसेस में बैंक जो चार्ज लेता है उसे प्रोसेसिंग फीस कहते हैं. यह या तो शुरू में काट ली जाती है या लोन अमाउंट में जोड़ दी जाती है. लोन चुनने से पहले अलग-अलग बैंकों की फीस ज़रूर तुलना करनी चाहिए.
8/10इसका मतलब है समय से पहले ही लोन को बंद करना. इसके लिए आपको बचे हुए प्रिंसिपल के साथ-साथ कुछ फोरक्लोजर चार्ज भी चुकाना पड़ता है.
9/10यह वह संपत्ति होती है जिसे लोन के बदले गिरवी रखा जाता है, जैसे – प्रॉपर्टी, गोल्ड या फिक्स्ड डिपॉजिट. अगर लोन नहीं चुकाया गया तो बैंक उस संपत्ति को बेचकर अपनी रकम निकाल सकता है.
10/10यह बताता है कि बैंक आपकी संपत्ति की कीमत के मुकाबले कितनी रकम देने को तैयार है. कम LTV का मतलब है कि बैंक के लिए रिस्क कम है. इसी आधार पर ब्याज दर और लोन शर्तें तय होती हैं.