Personal loans: कैसे करें EMI कैलकुलेट? ताकि फंस ना जाएं कर्ज के जाल में, बड़ा ही आसान है तरीका

पर्सनल लोन (Personal Loan) लेते समय सबसे जरूरी चीज है ईएमआई (EMI-Equated Monthly Instalment) को समझना. लोन अमाउंट (Loan Amount), ब्याज दर (Interest Rate) और लोन की अवधि (Loan Tenure), ये तीन फैक्टर आपकी ईएमआई तय करते हैं. ईएमआई ज्यादा होगी तो लोन जल्दी खत्म होगा, लेकिन कम ईएमआई का मतलब लंबी अवधि तक कर्ज चुकाना.
Personal loans: कैसे करें EMI कैलकुलेट? ताकि फंस ना जाएं कर्ज के जाल में, बड़ा ही आसान है तरीका

आज के समय में पर्सनल लोन (Personal Loan) लेना काफी आसान हो गया है. बैंक और फाइनेंस कंपनियां (Finance Companies) ऑनलाइन प्रोसेस से तुरंत लोन दे रही हैं. लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत आती है ईएमआई तय करने में. ईएमआई (EMI) का सीधा असर आपकी जेब और बजट पर पड़ता है.

ईएमआई तय करने के लिए 3 चीजें देखी जाती हैं- लोन अमाउंट, ब्याज दर और लोन की अवधि. इन तीनों का सही बैलेंस ही आपको बेहतर ईएमआई दिला सकता है. अगर आप इसे समझ लेंगे तो लोन चुकाना कभी मुश्किल नहीं लगेगा.

ईएमआई कैलकुलेटर कैसे काम करता है?

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ईएमआई कैलकुलेटर (EMI Calculator) एक ऑनलाइन टूल है जो लोन अमाउंट, ब्याज दर और अवधि डालने पर आपकी ईएमआई निकाल देता है. इसमें आप अलग-अलग आंकड़े डालकर देख सकते हैं कि किस स्थिति में कितनी ईएमआई बनेगी. ईएमआई कैलकुलेटर का इस्तेमाल करने के लिए आपको 3 चीजों की जरूरत होगी, लोन अमाउंट, ब्याज दर और लोन की अवधि.

लोन अमाउंट का असर

लोन अमाउंट जितना ज्यादा होगा, ईएमआई भी उतनी ज्यादा होगी. मान लीजिए आप 10 लाख का लोन लेते हैं तो आपकी ईएमआई कम होगी, लेकिन जैसे ही अमाउंट 11 लाख होगा, ईएमआई बढ़ जाएगी.

ब्याज दर का असर

ब्याज दर (Rate of Interest) का सीधा असर ईएमआई पर पड़ता है. अगर ब्याज 10% है तो ईएमआई एक स्तर पर होगी, लेकिन जैसे ही ब्याज 12% हो जाएगा, ईएमआई भी बढ़ जाएगी. इसी तरह ब्याज घटने पर ईएमआई कम हो जाएगी.

लोन अवधि का असर

लोन की अवधि (Tenure) और ईएमआई का रिश्ता उल्टा है. यानी अवधि बढ़ेगी तो ईएमआई घट जाएगी. उदाहरण के लिए, अगर लोन 5 साल का है तो ईएमआई ज्यादा होगी. लेकिन अगर इसे 6 साल कर दिया जाए तो ईएमआई कम हो जाएगी. हालांकि, ऐसे में आपको अधिक ब्याज चुकाना होगा.

सैलरी और खर्चों का रखें ध्यान

पर्सनल लोन की ईएमआई कैलकुलेट करते वक्त अपनी सैलरी और उससे होने वाले खर्चों का भी ध्यान रखें. ध्यान रहे कि ईएमआई की वजह से आपके बाकी खर्चे, जैसे ग्रॉसरी, रेंट, ट्रांसपोर्टेशन, बच्चों की स्कूल फीस और कुछ छोटे-मोटे खर्चे ना रुकें.

सही ईएमआई कैसे चुनें?

ज्यादा ईएमआई का मतलब है लोन जल्दी खत्म होगा लेकिन हर महीने ज्यादा बोझ पड़ेगा. कम ईएमआई से मासिक बोझ कम होगा लेकिन लोन चुकाने में लंबा समय लगेगा. ईएमआई चुनते समय अपनी इनकम और खर्चों का संतुलन जरूर देखें. ज्यादा ईएमआई चुनने पर बाकी खर्चों में कटौती करनी पड़ सकती है. कम ईएमआई लेने पर ब्याज ज्यादा देना पड़ेगा.

ईएमआई प्लानिंग के फायदे

  • बजट मैनेजमेंट आसान हो जाता है.
  • समय पर लोन चुकाना आसान होता है.
  • क्रेडिट स्कोर (Credit Score) बेहतर बनता है.
  • आर्थिक तनाव कम होता है.

गलत ईएमआई प्लानिंग के नुकसान

  • लोन डिफॉल्ट का खतरा बढ़ता है.
  • ब्याज का बोझ ज्यादा हो सकता है.
  • क्रेडिट स्कोर खराब हो सकता है.
  • फाइनेंशियल गोल्स पूरे करना मुश्किल हो जाता है.

Conclusion

पर्सनल लोन लेना आसान है लेकिन ईएमआई को समझना और सही तरह से मैनेज करना सबसे जरूरी है. लोन अमाउंट, ब्याज दर और टेन्योर तीनों पर ध्यान देकर अगर आप सही ईएमआई चुनते हैं तो लोन चुकाना कभी बोझ नहीं बनेगा. हमेशा ईएमआई कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें और अपनी क्षमता के हिसाब से फैसला लें.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. EMI क्या होती है?

ईएमआई यानी हर महीने दी जाने वाली किस्त, जिसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं.

2. क्या ईएमआई बदल सकती है?

हां, अगर ब्याज दर फ्लोटिंग है तो ईएमआई बदल सकती है.

3. क्या मैं लोन अवधि के बीच ईएमआई बदल सकता हूं?

कुछ बैंकों में टेन्योर बदलकर ईएमआई एडजस्ट की जा सकती है.

4. क्या ज्यादा ईएमआई देना सही है?

अगर आपकी इनकम अच्छी है तो ज्यादा ईएमआई देकर लोन जल्दी खत्म करना फायदेमंद है.

5. क्या कम ईएमआई से नुकसान होता है?

कम ईएमआई से ब्याज ज्यादा देना पड़ सकता है.

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