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जब भी कोई पर्सनल लोन (Personal Loan) लेता है, तो सबसे जरूरी होता है उसकी ब्याज दर (Interest Rate) को समझना. ब्याज दर का सीधा असर आपकी ईएमआई (EMI) और पूरे लोन की लागत पर पड़ता है. सिर्फ 1-2% ब्याज का फर्क भी आपकी ईएमआई के भुगतान और कुल रीपेमेंट अमाउंट को काफी बढ़ा या घटा सकता है.
भले ही आप मेडिकल जरूरत, शादी, घर की मरम्मत या पढ़ाई के लिए लोन ले रहे हों, हर हाल में आपको पर्सनल लोन की ब्याज दरें कैसे काम करती हैं ये जानना जरूरी है. इसी के आधार पर आप बेहतर वित्तीय फैसले ले सकते हैं. आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं.
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पर्सनल लोन की ब्याज दर वह रकम होती है जो बैंक या लेंडर आपसे लोन के बदले वसूलता है. यही उसका फायदा या कमाई होती है. इसे Annual Percentage Rate (APR) भी कहा जाता है. बैंकों की तरफ से लगाई जाने वाली ब्याज दर दो तरह की होती है:
यह ऐसी ब्याज दर होती है, जो पूरी लोन अवधि तक एक जैसी रहती है. EMI में कोई बदलाव नहीं होता, भले ही रिजर्व बैंक रेपो रेट को कितना भी घटा या बढ़ा दे. इससे आप हर महीने की प्लानिंग आसानी से कर सकते हैं.
यह बाजार की स्थिति या बैंक की पॉलिसी के अनुसार ऊपर-नीचे होती है. अगर आरबीआई की तरफ से रेपो रेट बढ़ाया या घटाया जाता है, तो यह ब्याज दर भी बढ़ या घट जाती है. अगर बाजार में ब्याज दरें बढ़ती हैं तो आपकी EMI भी बढ़ सकती है और अगर दरें घटती हैं तो EMI भी घट सकती है.
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आपके लोन पर ब्याज दर तय करते वक्त बैंक कुछ बातों को ध्यान में रखते हुए अपना फैसला लेते हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में.
अच्छा स्कोर होने पर आपको कम ब्याज दर पर लोन मिल सकता है. इससे बैंक को भरोसा होता है कि आप लोन समय पर चुका पाएंगे.
आपकी आमदनी जितनी ज्यादा होगी, लोन चुकाने की क्षमता उतनी ज्यादा मानी जाएगी. ऐसे में आपको लोन आसानी से मिल सकता है और ब्याज दर भी कम हो सकती है.
अगर आप एक स्थाई नौकरी में हैं, तो आपको कम ब्याज दर पर लोन मिल सकता है. वहीं स्वरोजगार करने वाले लोगों को थोड़ी ज्यादा ब्याज दर लग सकती है. यानी इनकम की अस्थिरता के हिसाब से ब्याज दर बढ़ जाती है.
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कम अवधि के लोन पर ब्याज दर अक्सर कम होती है. वहीं लंबी अवधि वाले लोन में दरें थोड़ी ज्यादा हो सकती हैं. वहीं छोटे लोन पर ब्याज ज्यादा होती है, जबकि बड़े लोन पर यह थोड़ी कम हो सकती है.
आप EMI कैलकुलेटर की मदद से अपनी मासिक किस्त और कुल रीपेमेंट अमाउंट आसानी से जान सकते हैं. ये आपकी बजट प्लानिंग में बहुत काम आता है.
यह लोन आवेदन प्रोसेस करने के लिए एक बार ली जाने वाली फीस होती है. यह फीस भी बैंक की कमाई का एक अहम जरिया होता है.
अगर आप लोन तय समय से पहले चुका देते हैं तो कुछ बैंक चार्ज लगाते हैं. कुछ बैंक एक तय समय के बाद लोन चुकाने पर कोई चार्ज नहीं लेते, लेकिन शुरुआती वक्त में चार्ज लगाते हैं.
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EMI समय पर ना देने पर अतिरिक्त चार्ज लगता है. ध्यान रहे, ऐसा करने से आपका सिबिल भी बुरी तरह प्रभावित होता है. ईएमआई देर से चुकाने का मतलब है कि आपकी वित्तीय हालत ठीक नहीं हैं और इससे आपका सिबिल स्कोर गिरेगा.
प्रोसेसिंग फीस और अन्य सेवाओं पर GST भी लगता है. लोन पर आप जो ब्याज चुका रहे हैं, उस पर आपको जीएसटी भी चुकाना पड़ता है. लोन लेते वक्त यह भी ध्यान रखें.
पर्सनल लोन लेने से पहले उसकी ब्याज दर, EMI और सभी चार्ज को अच्छी तरह समझना बहुत जरूरी है. फिक्स्ड और फ्लोटिंग दरों की तुलना करें और EMI कैलकुलेटर से बजट बनाएं. छोटे से छोटा ब्याज का अंतर भी आपके हजारों रुपये बचा सकता है. सही जानकारी और प्लानिंग के साथ लिया गया लोन आपकी जरूरतें तो पूरी करेगा ही, साथ ही फ्यूचर में वित्तीय बोझ भी नहीं बनेगा.