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कभी बच्चों की पढ़ाई, कभी घर की मरम्मत, तो कभी अचानक आई मेडिकल इमरजेंसी... जिंदगी में कई बार हमें पैसों की अचानक जरूरत पड़ती है. ऐसे में पर्सनल लोन (Personal Loan) एक बहुत बड़ा सहारा बनता है. लेकिन क्या हो जब आप पूरी उम्मीद से पर्सनल लोन के लिए अप्लाई करें और बैंक आपकी अर्जी खारिज कर दें? अगर ये बार-बार हो, तो निराशा बढ़ जाती है.
अक्सर लोग सोचते हैं कि सिर्फ खराब क्रेडिट स्कोर की वजह से लोन रिजेक्ट होता है, लेकिन सच्चाई ये नहीं है. ऐसी कई छोटी-छोटी गलतियां हैं जिन पर हमारा ध्यान नहीं जाता और हमारी Loan Application Rejected हो जाती है. चलिए बताते हैं उन 5 बड़ी वजहों के बारे में-
सबसे पहली और सबसे जरूरी चीज है आपका क्रेडिट स्कोर. ये तीन अंकों का एक नंबर होता है जो आपकी कर्ज चुकाने की आदत को दिखाता है. पर्सनल लोन एक अनसिक्योर्ड लोन है, यानी इसके लिए बैंक आपसे कुछ भी गिरवी नहीं रखवाता. ऐसे में बैंक सिर्फ आपके Credit Score पर भरोसा करके ये तय करता है कि आप
समय पर EMI चुकाएंगे या नहीं.
अगर आपने पहले कभी लोन या क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाने में देरी की है, तो आपका क्रेडिट स्कोर खराब हो जाता है. 750 से कम स्कोर को अक्सर बैंक जोखिम भरा मानते हैं और कम क्रेडिट स्कोर के कारण आपकी एप्लीकेशन रिजेक्ट कर देते हैं.
लोन अप्लाई करने से पहले हमेशा अपना क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें. अगर स्कोर कम है, तो उसे सुधारने के लिए अपने बिल समय पर चुकाएं.
ये एक बहुत ही आम गलती है. लोन एप्लीकेशन फॉर्म भरते समय हम कई बार जल्दबाजी में कुछ गलत जानकारी भर देते हैं या कोई कॉलम अधूरा छोड़ देते हैं.
बैंक आपकी दी गई जानकारी को आपके दस्तावेजों (पैन कार्ड, आधार कार्ड) से मिलाता है. अगर नाम की स्पेलिंग, पता, या कंपनी के नाम में कोई भी अंतर पाया जाता है, तो बैंक इसे धोखाधड़ी का संकेत मानकर आपकी अर्जी तुरंत रिजेक्ट कर सकता है.
एप्लीकेशन फॉर्म को सबमिट करने से पहले दो बार ध्यान से पढ़ें. सुनिश्चित करें कि सारी जानकारी आपके डॉक्यूमेंट्स से मेल खाती हो.
बैंक आपको लोन देते समय यह सुनिश्चित करना चाहता है कि आपकी इनकम का जरिया स्थिर है ताकि आप हर महीने EMI भर सकें. अगर आप बहुत जल्दी-जल्दी नौकरी बदलते हैं, तो ये बैंक के लिए एक रेड फ्लैग होता है.
Job Instability से बैंक को ये मैसेज जाता है कि आपकी आमदनी स्थिर नहीं है और भविष्य में आप लोन चुकाने में डिफॉल्ट कर सकते हैं. आमतौर पर, बैंक यह उम्मीद करते हैं कि आप अपनी मौजूदा कंपनी में कम से कम 1 साल से काम कर रहे हों.
अगर आप लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो कुछ समय के लिए नौकरी बदलने से बचें. अपनी नौकरी में स्थिरता दिखाएं.
बैंक ये भी देखता है कि आपकी महीने की कमाई का कितना हिस्सा पहले से चल रही EMI में जा रहा है. इसे डेट-टू-इनकम रेश्यो (DTI Ratio) कहते हैं.
अगर आपकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा (आमतौर पर 50% से ज्यादा) पहले से ही लोन की EMI चुकाने में जा रहा है, तो बैंक को लगता है कि आप एक और लोन का बोझ नहीं उठा पाएंगे. High debt-to-income ratio लोन रिजेक्शन का एक बड़ा कारण है.
नए लोन के लिए अप्लाई करने से पहले अपने छोटे-मोटे कर्ज चुकाने की कोशिश करें. इससे आपका DTI रेश्यो बेहतर होगा और लोन मिलने की संभावना बढ़ जाएगी.
जब हमें पैसों की सख्त जरूरत होती है, तो हम एक साथ कई बैंकों और NBFC में लोन के लिए अप्लाई कर देते हैं. ये आदत आपके लिए बहुत नुकसानदायक साबित हो सकती है.
जब भी आप लोन के लिए अप्लाई करते हैं, तो बैंक आपकी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करता है, जिसे 'हार्ड इन्क्वायरी' कहते हैं. हर हार्ड इन्क्वायरी से आपका क्रेडिट स्कोर थोड़ा कम हो जाता है. एक साथ कई इन्क्वायरी देखकर बैंकों को लगता है कि आप पैसों के लिए बेचैन हैं और आपको लोन देने में जोखिम है.
पहले अच्छी तरह रिसर्च करें, बैंकों की ब्याज दरें और शर्तें जानें और फिर सिर्फ एक या दो जगह ही अप्लाई करें जहां आपके अप्रूवल के चांस सबसे ज्यादा हों.
आमतौर पर, आपको कम से कम 3 से 6 महीने का इंतजार करना चाहिए. इस बीच, जिन कारणों से आपका लोन रिजेक्ट हुआ है, उन्हें सुधारने पर काम करें, जैसे अपना क्रेडिट स्कोर सुधारना या DTI रेश्यो कम करना.
सिर्फ एप्लीकेशन रिजेक्ट होने से स्कोर कम नहीं होता है, लेकिन जब बैंक आपकी एप्लीकेशन के लिए 'हार्ड इन्क्वायरी' करता है, तो उससे आपका स्कोर थोड़ा प्रभावित हो सकता है.
750 या उससे अधिक का क्रेडिट स्कोर बहुत अच्छा माना जाता है. इससे आपको आसानी से और कम ब्याज दर पर लोन मिलने की संभावना बढ़ जाती है.
हां, कुछ NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां) कम क्रेडिट स्कोर पर भी लोन देती हैं, लेकिन उनकी ब्याज दरें आमतौर पर बैंकों से ज्यादा होती हैं. आप चाहें तो किसी गारंटर के साथ या गोल्ड लोन जैसा सिक्योर्ड लोन भी ट्राई कर सकते हैं.