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पर्सनल लोन आज के टाइम में कई लोगों के लिए फटाफट पैसे पाने का एक आसान सा ऑप्शन बन गया है. शादी, मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई या किसी भी खर्च के लिए बिना ज्यादा सोच-विचार किए पर्सनल लोन के लिए अप्लाई कर देते हैं. एक बात हमेशा याद रखिए कि लोन मिलते ही राहत तो मिल जाती है, लेकिन असली खतरा तब शुरू होता है, जब लोग लोन एग्रीमेंट को ठीक से पढ़े बिना उस पर साइन कर देते हैं.
बस फिर बाद में यही जल्दबाजी भारी ब्याज, छिपे चार्ज और पेनाल्टी के रूप में बड़ा पछतावा बन जाती है.तो फि इसलिए पर्सनल लोन लेते समय एग्रीमेंट की हर शर्त को समझना बहुत जरूरी होता है.
सबसे पहले बात करते हैं प्रीपेमेंट और फोरक्लोजर चार्जेज की. अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर फ्यूचर में पैसे आ गए तो लोन जल्दी चुका देंगे, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता है कि बैंक या एनबीएफसी इसके बदले मोटा चार्ज ले सकता है. आमतौर पर ये चार्ज बाकी बचे लोन अमाउंट का 2% से 5% तक हो सकता है. ऐसे में एग्रीमेंट साइन कर रहे हैं तो पहले इसके बारे में जान और समझ लें.
दूसरा अहम पॉइंट है जो लोगों को समझना चाहिए वो है लेट पेमेंट और डिफॉल्ट पेनाल्टी.तो अगर आपकी एक भी ईएमआई लेट हो जाती है, तो न केवल पेनाल्टी लगती है बल्कि आपका क्रेडिट स्कोर भी खराब सकता है. ऐसे में कुछ बैंक फिक्स रकम वसूलते हैं, तो कुछ ईएमआई का फीसदी चार्ज करते हैं.ऐसे में बार-बार देरी करने पर ब्याज का बोझ तेजी से बढ़ सकता है.तो इससे बचने के लिए ऑटो-डेबिट सुविधा समझदारी भरा कदम हो सकता है.
तीसरी चीज है कि छिपे हुए प्रोसेसिंग और सर्विस चार्जेस को समझना. बैंक अक्सर केवल ब्याज दर पर जोर देते हैं, लेकिन प्रोसेसिंग फीस, डॉक्यूमेंटेशन चार्ज, जीएसटी और बाकी फीस आपकी जेब पर एक्स्ट्रा बोझ डाल सकते हैं.ऐसे में कई बार फोरक्लोजर लेटर या लोन स्टेटमेंट के लिए भी फीस लिया जाता है.तो इसलिए यह जरूर पूछें कि कुल मिलाकर आपको कितना पैसा मिलेगा और कितने चार्ज कटने वाला है.
ब्याज दर में बदलाव की शर्तें को जानना भी अहम होता है.जी हां अगर आपका पर्सनल लोन फ्लोटिंग रेट पर है, तो ब्याज दर बढ़ने पर आपकी ईएमआई भी बढ़ सकती है. असल में कुछ बैंक हर तिमाही दरें बदलते हैं, तो कुछ साल में एक बार बदलते हैं. ऐसे में एग्रीमेंट में यह जरूर पढ़ें कि ब्याज दर कैसे और कब बदलेगी, ताकि बाद में अचानक बढ़ी ईएमआई से झटका कभी ना लगे.
बीमा और क्रॉस-सेलिंग को लिस्ट में साइन करते टाइम जरूर समझ लें. असल में कई बैंक लोन के साथ बीमा पॉलिसी जोड़ देते हैं और उसे जरूरी बताने की कोशिश करते हैं. जबकि ज्यादातर मामलों में यह ऑप्शनल होता है. बीमा लेना है या नहीं, इसका फैसला सोच-समझकर करें और उसकी प्रीमियम लागत जरूर जांचना चाहिए.
कुल मिलाकर, पर्सनल लोन लेने में कोई बुराई नहीं होती है, लेकिन एग्रीमेंट पर साइन करने से पहले इन बातों को ध्यान से जांचना और समझना हर किसी के लिए बहुत जरूरी है.क्योंकि थोड़ी सी सावधानी आपको फ्यूचर में बड़े फाइनेंशियल नुकसान से बचा सकती है.(नोट: खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है, अधिक जानकारी के लिए किसी वित्तीय सलाहाकार से उचित राय लें)
खबर से जुड़े FAQs
1. पर्सनल लोन एग्रीमेंट साइन करने से पहले क्या जांचना चाहिए?
ब्याज दर, प्रीपेमेंट चार्ज, लेट पेमेंट पेनाल्टी, प्रोसेसिंग फीस और बीमा से जुड़ी शर्तें जरूर जांचें.
2. क्या पर्सनल लोन जल्दी चुकाने पर चार्ज लगता है?
हां, कई बैंक और NBFC प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर पर 2% से 5% तक चार्ज लेते हैं.
3. एक EMI लेट होने से क्या नुकसान होता है?
लेट EMI पर पेनाल्टी लगती है और क्रेडिट स्कोर खराब हो सकता है.
4. क्या पर्सनल लोन के साथ बीमा लेना जरूरी होता है?
नहीं, ज्यादातर मामलों में बीमा वैकल्पिक होता है, इसे जबरन जोड़ना सही नहीं है.
5. फ्लोटिंग रेट पर्सनल लोन में क्या जोखिम है?
ब्याज दर बढ़ने पर EMI बढ़ सकती है, इसलिए रेट बदलने की शर्तें पहले समझें.
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