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विदेशों में रहने वाले भारतीयों यानी NRI से आने वाले डिपॉजिट में इस साल बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. अप्रैल से अक्टूबर के बीच NRI Deposit करीब 30 प्रतिशत तक घट गया. ये गिरावट न सिर्फ बैंकों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि इससे देश में विदेशी मुद्रा प्रवाह पर भी असर पड़ा है. आइए समझते हैं कि गिरावट क्यों आई, कौन-कौन सी स्कीम्स शामिल हैं और किन बैंकों को इससे फायदा हो सकता है.
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल इसी अवधि में NRI Deposit फ्लो 11.9 बिलियन डॉलर था. जबकि इस साल ये घटकर 8.3 बिलियन डॉलर रह गया. यानी ओवरसीज इंडियंस से आने वाले फंड में करीब 30% की गिरावट देखने को मिली है. अक्टूबर के अंत तक देश में कुल NRI Deposit 168.8 बिलियन डॉलर रहा.
NRI के लिए भारत में तीन तरह की प्रमुख डिपॉजिट स्कीम्स होती हैं-
1. FCNR (Foreign Currency Non-Resident Deposit)
2. NRE (Non-Resident External Deposit)
3. NRO (Non-Resident Ordinary Deposit)
NRI Deposit घटने के पीछे कई वजहें सामने आई हैं-
हालांकि NRI Deposit में गिरावट आई है, लेकिन कुछ बैंकों की हिस्सेदारी मजबूत बनी हुई है-
| बैंक का नाम | NRI Deposit |
|---|---|
| Federal Bank | 51% |
| SBI (State Bank of India) | 32% |
| Canara Bank | 30% |
| South Indian Bank | 30% |
| CSB Bank | 17% |
| ESAF Small Finance Bank | 21% |
NRI Deposit वो पैसा होता है जो विदेश में रहने वाले भारतीय भारत के बैंकों में जमा करते हैं.
ब्याज दरों में गिरावट और दूसरे एसेट क्लास ज्यादा आकर्षक होने की वजह से FCNR Deposit घटा है.
NRE टैक्स-फ्री होता है, जबकि NRO Deposit पर टैक्स लगता है.
इससे विदेशी मुद्रा प्रवाह और बैंकिंग सिस्टम की लिक्विडिटी पर असर पड़ सकता है.