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विदेश जा रहे हैं या NRI बन चुके हैं? तो जान लें अपने बैंक खाते से जुड़े ये जरूरी रूल्स(प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt)
विदेश में नौकरी, पढ़ाई या बिजनेस के लिए जाने वाले लाखों भारतीयों के लिए वीजा, टैक्स और निवेश की प्लानिंग जितनी जरूरी होती है, उतना ही जरूरी होता है भारत में मौजूद बैंक खातों से जुड़े नियमों को समझना. अक्सर लोग विदेश में शिफ्ट होने के बाद अपने पुराने बैंक सेविंग्स अकाउंट को उसी तरह चलाते रहते हैं, लेकिन ऐसा करना FEMA (Foreign Exchange Management Act) के नियमों के तहत परेशानी खड़ी कर सकता है.
तो फिर आइए जानते हैं कि विदेश जाने के बाद आपके बैंक खाते का क्या होता है और भारत लौटने पर क्या आप उसी खाते का फिर से कैसे इसको यूजकर सकते हैं.
भारतीय बैंकिंग रूल्स के मुताबिक किसी व्यक्ति के बैंक खाते का प्रकार उसके रेजिडेंशियल स्टेटस पर निर्भर करता है. तो जैसे ही कोई व्यक्ति नौकरी, हाई एजूकेशन या लंबे समय के लिए विदेश जाता है, उसे NRI (Non-Resident Indian) माना जाता है।
ऐसी स्थिति में उसके सामान्य सेविंग्स अकाउंट को NRO (Non-Resident Ordinary) अकाउंट में बदलना जरूरी हो जाता है.असल में यह प्रक्रिया केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि नियामकीय आवश्यकता है.
एक बात समझ लें कि अगर कोई व्यक्ति विदेश चला गया लेकिन उसने अपने सेविंग्स अकाउंट को NRO अकाउंट में नहीं बदला और खाता पहले की तरह चलता रहा, तो यह FEMA नियमों के तहत तकनीकी उल्लंघन माना जा सकता है.
असल में कई बार परिवार के सदस्य भारत में रहकर उस खाते का यूज करते रहते हैं. हालांकि, नियमों के अनुसार खाते में जमा रकम अकाउंट होल्डर की ही मानी जाती है, इसलिए ऐसी स्थिति में भी कंप्लायंस से जुड़ी दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं.
इसका सीधा जवाब है- नहीं....
होता ये है कि NRO अकाउंट में कन्वर्ट न कराने से खाते में जमा पैसा खत्म या जब्त नहीं होता. लेकिन टैक्स और बैंकिंग नियमों के लिहाज से समस्याएं पैदा हो सकती हैं. क्योंकि रेजिडेंट और NRI ग्राहकों के लिए बैंक अलग-अलग नियम लागू करते हैं.
तो अगर बैंक को यह जानकारी नहीं दी गई कि खाताधारक विदेश में रह रहा है, तो खाता पुराने रेजिडेंट नियमों के तहत चलता रहेगा, जिससे टैक्स ट्रीटमेंट और रिपोर्टिंग में गड़बड़ी हो सकती है.
फेमा (FEMA) नियमों के मुताबिक, जैसे ही आप NRI बनते हैं, अपने नॉर्मल सेविंग्स अकाउंट को NRO अकाउंट में बदलवाना कानूनी तौर पर जरूरी होता है.तो अगर आप से यह चूक हो गई है, तो घबराएं नहीं छोटे-मोटे लेनदेन (जैसे पेंशन या छोटे चेक) वाले मामलों में बैंक आमतौर पर सहयोग करते हैं और खाते को अपडेट कर देते हैं.
लेकिन, अगर आपके खाते में बड़ी रकम या विदेशी करेंसी का लेनदेन हुआ है, तो बैंक इसकी जानकारी सीधे RBI को दे सकता है, जो आपके लिए कानूनी मुश्किल खड़ी कर सकता है.तो फिर इसलिए समझदारी इसी में है कि विदेश शिफ्ट होते ही बैंक को सूचित करें और अकाउंट का स्टेटस बदलवा लें, ताकि आप टैक्स और फ्यूचर के किसी भी कानूनी पचड़े से दूर रहें.
अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में भारत लौटने के बाद आप अपना पुराना बैंक अकाउंट दोबारा यूज कर सकते हैं.तो इसके लिए आपको बैंक को अपनी वापसी की जानकारी देनी होगी, KYC दस्तावेज अपडेट कराने होंगे और खाते को फिर से सामान्य रेजिडेंट अकाउंट में कन्वर्ट कराना होगा.असल में यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद खाता पहले की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है.
एनआरआई (NRI) का सीधा मतलब है वो भारतीय नागरिक जो काम, पढ़ाई या बिजनेस के लिए साल में 182 दिनों से ज्यादा विदेश में रहता है. असल में इनके पास भारतीय पासपोर्ट ही होता है, यानी ये पक्के तौर पर भारत के नागरिक ही रहते हैं. बस, बैंक और टैक्स के नियमों के लिए इन्हें 'अनिवासी' माना जाता है.यानी कि आसान शब्दों में, जो भारतीय अपना ज्यादातर समय विदेश में बिताता है, उसे एनआरआई कहते हैं.
इनकम टैक्स कानून के मुताबिक, साल 2026-27 में अगर आप भारत में 182 दिनों से कम रुकते हैं, तो आप एनआरआई (NRI) कहलाएंगे. लेकिन एक खास नियम यह भी है कि अगर आपकी भारत में होने वाली कमाई 15 लाख रुपये से ज्यादा है, तो 120 दिन से ज्यादा रुकते ही आपको 'निवासी' मान लिया जाएगा. कम कमाई वालों के लिए 182 दिन वाला पुराना नियम ही लागू रहेगा.
विदेश जाने की तैयारी कर रहे हैं या NRI बन चुके हैं, तो अपने बैंक खाते का स्टेटस जरूर जांच लें.असल में एक छोटी सी चूक फ्यूचर में टैक्स और कंप्लायंस से जुड़ी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है.तो वहीं, समय पर खाते को NRO में कन्वर्ट कराकर आप बैंकिंग से जुड़ी सभी सेवाओं का बिना किसी रुकावट के लाभ उठा सकते हैं.
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