SC ने राह दिखाई.. लेकिन 'अक्ल' नहीं आई: होटल हयात रीजेंसी और AGSON ग्लोबल लोन सेटलमेंट केस में बड़ा 'गोलमाल'

देश की सरकारी कंपनी 'नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड' (NARCL) इस समय करोड़ों रुपये के लोन सेटलमेंट (One Time Settlement-OTS) में भारी अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों के घेरे में है. एग्सन (AGSON) ग्लोबल मामले में कंपनी के ₹2,172 करोड़ के कर्ज को बिना किसी बिडिंग (बोली) के महज ₹579 करोड़ में सेटल कर दिया गया, जिससे जनता के पैसे का करीब ₹1,600 करोड़ का नुकसान हुआ है.
SC ने राह दिखाई.. लेकिन 'अक्ल' नहीं आई: होटल हयात रीजेंसी और AGSON ग्लोबल लोन सेटलमेंट केस में बड़ा 'गोलमाल'

देश के बैंकिंग और कॉरपोरेट जगत से 'वन टाइम सेटलमेंट' के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई के साथ बड़े गोलमाल की एक बेहद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)

देश के बैंकिंग और कॉरपोरेट जगत से 'वन टाइम सेटलमेंट' (OTS) के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई के साथ बड़े गोलमाल की एक बेहद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है. बैंकों से हजारों करोड़ रुपये का लोन लेकर उसे न चुकाना और बाद में बेहद कम कीमत पर उसे रफा-दफा (सेटल) कर देना, कई डिफाल्टर कंपनियों के लिए एक आसान खेल बन चुका है. लेकिन इस बार कटघरे में कोई प्राइवेट फर्म नहीं, बल्कि देश की सरकारी कंपनी NARCL (नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड) खड़ी है.

सरकारी कंपनी NARCL की तरफ से एग्सन (AGSON) ग्लोबल मामले में की गई संदिग्ध ढिलाई और दूसरी तरफ दिल्ली के भीकाजी कामा प्लेस स्थित नामी-गिरामी होटल हयात रीजेंसी (Hotel Hyatt Regency) के लोन सेटलमेंट केस ने पूरे वित्तीय सिस्टम में हड़कंप मचा दिया है. जहां एक ओर सुप्रीम कोर्ट ने हयात रीजेंसी मामले में खुद कड़ा रुख अपनाते हुए स्क्रूटनी (जांच) शुरू कर दी है, वहीं सवाल उठ रहे हैं कि सरकारी कंपनी NARCL ने करोड़ों के दूसरे मामलों में ऐसी पारदर्शिता क्यों नहीं दिखाई?

होटल हयात रीजेंसी केस: करोड़ों की प्रॉपर्टी.. कौड़ियों में सेटलमेंट की कोशिश!

दिल्ली के भीकाजी कामा प्लेस में स्थित मशहूर 'होटल हयात रीजेंसी' पर एक समय 6-6 बैंकों का भारी-भरकम कर्ज बकाया था. बैंकों का कर्ज न चुका पाने के कारण स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि होटल को पूरी तरह से जब्त (Seize) करने की नौबत आ गई थी. इस कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए होटल प्रबंधन ने बैंकों के सामने 'वन टाइम सेटलमेंट' (OTS) की पेशकश की.

लेकिन इस सेटलमेंट की आड़ में जो खेल खेला गया, वह प्रॉपर्टी की वैल्यूएशन (मूल्यांकन) के आंकड़ों से साफ जाहिर होता है:

वास्तविक वैल्यूएशन (साल 2021): 2021 में दो अलग-अलग स्वतंत्र वैल्यूअर्स ने इस होटल की वास्तविक कीमत ₹2600 करोड़ और ₹2651 करोड़ 39 लाख आंकी थी.

सेटेलमेंट के समय वैल्यूएशन: लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि जब वन टाइम सेटलमेंट की अंतिम रूपरेखा तैयार होने लगी, तो होटल की वैल्यू को रहस्यमयी ढंग से घटाकर महज ₹750 करोड़ से ₹865 करोड़ के बीच दिखा दिया गया.

यह कीमत होटल की वास्तविक और एक्चुअल मार्केट वैल्यू के एक-तिहाई (One-third) से भी कम थी. वैल्यूएशन में की गई इस भारी कटौती और खेल के खिलाफ मामला देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया.

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: तलब किए मूल रिकॉर्ड

होटल की कीमत और सेटलमेंट के दौरान प्रॉपर्टी की वैल्यू में आई इस भारी गिरावट को सुप्रीम कोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया है. अदालत ने मामले की तह तक जाने और यह जांचने के लिए कि जिस कीमत पर लोन का सेटलमेंट किया जा रहा है वह सही है या नहीं, प्रक्रिया पर कड़े सवाल खड़े किए हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने लोन सेटलमेंट की प्रक्रिया से ठीक पहले की होटल हयात रीजेंसी की वैल्यूएशन रिपोर्ट, बैंकों के मूल (ओरिजिनल) रिकॉर्ड और बकाया पैसों की पूरी विस्तृत जानकारी अपने पास तलब कर ली है.

सरकारी कंपनी NARCL के 'गोलमाल' पर उठे सवाल

जब देश की सर्वोच्च अदालत होटल हयात रीजेंसी केस को लेकर दस्तावेजों और तथ्यों की इतनी बारीकी से स्क्रूटनी कर रही है, तो सबसे बड़ा सवाल सरकारी कंपनी NARCL की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है. आखिर इस सरकारी कंपनी ने एग्सन (AGSON) ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड के वन टाइम सेटलमेंट केस में ऐसी गहन जांच-पड़ताल करने की हिम्मत क्यों नहीं दिखाई?

एग्सन ग्लोबल केस का पूरा गणित:

NARCL को एग्सन ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर अप्रेस गर्ग से कुल ₹2,172 करोड़ की भारी-भरकम राशि रिकवर (वसूल) करनी थी.

लेकिन बिना किसी कड़ी कानूनी प्रक्रिया या जांच के, सरकारी कंपनी NARCL ने इस बड़े डिफॉल्टर को बड़ी राहत देते हुए महज ₹579 करोड़ में ही पूरे लोन का सेटलमेंट कर दिया.

इस मनमाने और शॉर्टकट सेटलमेंट के कारण देश की जनता के पैसे (Public Money) का सीधे तौर पर ₹1600 करोड़ का भारी नुकसान हो गया.

बिना बिडिंग (बोली) के ही प्रमोटर को सौंप दिया लोन!

वित्तीय विशेषज्ञों और जांचकर्ताओं के अनुसार, NARCL ने जनता के पैसों का नुकसान करने के लिए स्थापित नियमों की पूरी तरह से अनदेखी की. सबसे बड़ा नियम उल्लंघन यह था कि:

बिडिंग प्रक्रिया से परहेज: सरकारी कंपनी NARCL ने इस लोन सेटलमेंट के लिए किसी भी अन्य कंपनी या संभावित खरीदार को बोली (Bidding) लगाने के लिए आमंत्रित ही नहीं किया.

अगर NARCL नियमों के तहत 'प्राइस डिस्कवरी' (Price Discovery) करती, यानी लोन सेटलमेंट के लिए पारदर्शी तरीके से बिडिंग या नीलामी करवाती, तो पूरी संभावना थी कि ₹579 करोड़ की जगह कोई अन्य बिडर ₹1000 करोड़ या ₹1500 करोड़ तक की ऊंची बोली लगा देता. इसका सबसे बड़ा उदाहरण खुद होटल हयात रीजेंसी का केस है, जहां ओपन बिडिंग के दौरान दो बिडर्स ने ₹2,600 करोड़ तक की बोली लगाई थी. लेकिन एग्सन के केस में NARCL ने किसी भी बाहरी बिडर को खुली प्रतियोगिता या बोली लगाने का मौका ही नहीं दिया और अंदरखाने ही मामला रफा-दफा कर दिया.

(परिवेश वात्स्यायन, ज़ी मीडिया, दिल्ली)

Add Zee Business as a Preferred Source
  1. 1
  2. 2
  3. 3
  4. 4
  5. 5
  6. 6