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ऐसे बहुत से लोग हैं जो अपने लोन की ईएमआई (Loan EMI) को हल्के में लेते हैं. वह सोचते हैं कि अगर एक ईएमआई समय से नहीं चुकाई या कुछ दिन देर से चुकाई तो क्या दिक्कत है. हालांकि, इससे आपको भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है. आज के समय में एक भी EMI मिस करना एक ‘रेड फ्लैग’ माना जाता है. अगर ईएमआई मिस करना नहीं रुका तो आपके घर रिकवरी एजेंट्स भी पहुंच सकते हैं, जो किसी बिन बुलाए मेहमान से कम नहीं होते. आइए जानते हैं सिर्फ एक ईएमआई मिस करने भर से आपको क्या-क्या नुकसान हो सकता है.
एक ईएमआई मिस कर देने का मतलब है कि आपने एक ईएमआई डिफॉल्ट कर दी है. इसका सीधा असर आपके क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है और वह खराब होता है. बता दें कि क्रेडिट स्कोर के कैलकुलेशन में समय से भुगतान करने का वेटेज करीब 30 फीसदी होता है. एक चूक से आपका क्रेडिट स्कोर 50-70 प्वाइंट तक गिर सकता है, जिसे वापस रिकवर होने में लंबा वक्त लगता है.
एक ईएमआई चुकाने में देर होते ही आपको उस पर लेट फीस भी चुकानी पड़ती है. यह लेट फीस 1-2 फीसदी तक हो सकती है. सुनने में भले ही यह कम लगे, लेकिन अगर बार-बार ईएमआई मिस करने का सिलसिला जारी रहा तो यह जी का जंजाल बन सकता है.
लोन की ईएमआई मिस होने पर आपके ऊपर जुर्माने के तौर पर ब्याज भी लगेगा. यह ब्याज भी काफी ज्यादा हो सकता है. इस तरह एक ईएमआई मिस होने के चलते आपको ज्यादा रकम चुकानी होगी.
अगर कोई लोन 90 दिनों तक नहीं चुकाया गया तो उसे नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित कर दिया जाता है. ऐसा होने पर भविष्य में पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड मिलना लगभग नामुमकिन हो जाता है. इसके अलावा रिकवरी एजेंट्स के कॉल और विज़िट भी शुरू हो सकते हैं. गंभीर मामलों में तो Negotiable Instruments Act 1881 के तहत लीगल नोटिस भी आ सकता है.
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सबसे पहले तो ईएमआई को ऑटोमेट करें, ताकि वह खुद ही आपके अकाउंट से कट जाए. ईएमआई कटने की तारीख सैलरी आने के कुछ दिन बाद की रखें, ताकि कभी सैलरी लेट हो जाए तो भी आपको दिक्कत ना हो. ध्यान रखें कि ईएमआई जितनी रकम को कभी भी ना छेड़ें और अकाउंट में रहने दें. अगर आपकी सैलरी रेगुलर नहीं है तो आपको कम से कम 3 महीने की ईएमआई का इमरजेंसी फंड बनाकर रखना चाहिए.