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कई लोगों को लगता है कि अगर उनका सिबिल स्कोर 750 या 800 के पार है, तो उन्हें कोई भी लोन, चाहे वो पर्सनल हो, होम लोन हो या कार लोन, चुटकियों में मिल जाएगा. ये बात काफी हद तक सही है, लेकिन ये पूरा सच नहीं है. एक शानदार क्रेडिट स्कोर लोन अप्रूवल की गारंटी नहीं होता. ये सिर्फ पहली सीढ़ी है.
कई बार ऐसा होता है कि एक बेहतरीन सिबिल स्कोर वाले व्यक्ति की लोन एप्लीकेशन भी बैंक रिजेक्ट कर देता है. ऐसे में लोगपरेशान हो जाते हैं कि आखिर गलती कहां हुई. दरअसल, बैंक या कोई भी वित्तीय संस्थान सिर्फ आपका स्कोर ही नहीं देखता, बल्कि वो आपकी पूरी फाइनेंशियल कुंडली खंगालता है. आइए, उन 8 बड़े कारणों को समझते हैं, जिनकी वजह से एक अच्छा सिबिल स्कोर भी आपको लोन दिलाने में नाकाम हो सकता है.
ये लोन रिजेक्शन का सबसे आम और बड़ा कारण है. DTI रेश्यो का मतलब है कि आपकी महीने की कमाई का कितना हिस्सा पहले से चल रही EMI चुकाने में जा रहा है.
(आपकी सभी मौजूदा EMI का कुल जोड़ / आपकी महीने की कुल कमाई) x 100
मान लीजिए आपकी महीने की सैलरी 60,000 रुपये है और आप पहले से ही 25,000 रुपये की EMI भर रहे हैं. तो आपका DTI रेश्यो होगा (25,000 / 60,000) x 100 = 41.66%.
बैंक आमतौर पर 40% से 50% से ज्यादा DTI रेश्यो को जोखिम भरा मानते हैं. अगर आपका DTI पहले से ही ज्यादा है, तो बैंक को लगता है कि एक और लोन का बोझ आप शायद न उठा पाएं और डिफॉल्ट कर सकते हैं. आपका अच्छा सिबिल स्कोर भी इस चिंता को दूर नहीं कर पाता.
आपका सिबिल स्कोर बताता है कि आपने अतीत में कर्ज कैसे चुकाया है, लेकिन आपकी आज की इनकम बताती है कि आप भविष्य में कर्ज चुका पाएंगे या नहीं. अगर आपकी नौकरी स्टेबल नहीं है, आप बार-बार जॉब बदलते हैं या आप किसी ऐसी इंडस्ट्री में काम करते हैं जहां आय की निश्चितता नहीं है (जैसे फ्रीलांसिंग या कुछ बिजनेस), तो बैंक आपको लोन देने में हिचकिचा सकता है. बैंक हमेशा एक स्थिर आय स्रोत देखना चाहता है.
अगर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में सिर्फ अनसिक्योर्ड लोन (जैसे पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड लोन) ही भरे पड़े हैं और कोई सिक्योर्ड लोन (जैसे होम लोन, कार लोन) नहीं है, तो इसे एक खराब क्रेडिट मिक्स माना जाता है. ये संकेत देता है कि आप अपनी ज़रूरतों के लिए लगातार महंगे कर्ज पर निर्भर हैं. बैंक एक संतुलित क्रेडिट मिक्स को प्राथमिकता देते हैं.
अगर आप कम समय में कई बैंकों और NBFC में लोन के लिए अप्लाई करते हैं, तो हर बार आपकी क्रेडिट रिपोर्ट चेक की जाती है. इसे 'हार्ड इन्क्वायरी' कहते हैं. बहुत सारी हार्ड इन्क्वायरी आपके सिबिल स्कोर को तो थोड़ा कम करती ही हैं, साथ ही ये बैंकों को सिग्नल देती है कि आप कर्ज के लिए बहुत बेचैन हैं. इसे 'क्रेडिट हंगरी' व्यवहार माना जाता है और बैंक ऐसे ग्राहकों को रिस्की समझते हैं.
आप किस कंपनी में काम करते हैं, ये बात भी बहुत मायने रखती है. बैंक कंपनियों को उनकी प्रतिष्ठा, स्थिरता और आकार के आधार पर लिस्टेड (CAT A, CAT B, आदि) करते हैं. अगर आप किसी छोटी, नई या नॉन-लिस्टेड कंपनी में काम करते हैं, तो बैंक आपको लोन देने में थोड़ा कतरा सकता है, भले ही आपकी सैलरी अच्छी हो.
खासकर होम लोन जैसे लंबी अवधि के लोन के लिए उम्र एक बड़ा फैक्टर है. अगर आप रिटायरमेंट के करीब हैं, तो बैंक आपको 20-25 साल का लंबा लोन देने से बचेगा क्योंकि आपकी कमाई के साल कम बचे हैं. बैंक ये सुनिश्चित करना चाहता है कि आपकी नौकरी खत्म होने से पहले लोन पूरा चुक जाए.
हो सकता है कि आपने अतीत में किसी लोन को चुकाने में दिक्कत होने पर बैंक के साथ 'सेटलमेंट' किया हो. भले ही इसके बाद आपको ईएमआई देने से मुक्ति मिल गई हो, लेकिन आपने मेहनत करके अपना सिबिल स्कोर सुधार लिया हो, लेकिन आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में ये निगेटिव एंट्री लंबे समय दिखती रहती है. ऐसे में बैंक आपको नया लोन देने से इनकार कर सकते हैं. बेहतर होगा कि आप नए लोन के लिए अप्लाई करने से पहले पुराने लोन को क्लोज करें.
ये एक बहुत ही छोटी लेकिन आम गलती है. कई बार लोग एप्लीकेशन फॉर्म में गलत जानकारी भर देते हैं या जो जानकारी देते हैं, वो उनके दिए गए दस्तावेजों (पैन, आधार, सैलरी स्लिप) से मेल नहीं खाती. ऐसी किसी भी गड़बड़ी पर बैंक तुरंत एप्लीकेशन को रिजेक्ट कर देता है.
बैंक सिबिल स्कोर के अलावा आपकी महीने की आय, आपकी नौकरी कितनी स्थिर है, आपके ऊपर पहले से कितना कर्ज है (DTI Ratio), और आप किस कंपनी में काम करते हैं, इन सब बातों पर गौर करता है.
आमतौर पर, बैंक चाहते हैं कि आपका DTI रेश्यो 40% से ज्यादा न हो. इसका मतलब है कि आपकी सारी EMI आपकी महीने की कमाई के 40% हिस्से से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
सबसे पहले रिजेक्शन का कारण पता करें. बैंक से पूछें या अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें. उस कमी को दूर करें (जैसे पुराना कर्ज चुकाकर DTI कम करें) और कम से कम 3-6 महीने रुकने के बाद ही दोबारा अप्लाई करें.
अगर आप 6 महीने के अंदर 3-4 से ज्यादा बार लोन के लिए अप्लाई करते हैं, तो इसे बहुत ज्यादा माना जाता है और ये आपके प्रोफाइल पर निगेटिव असर डालता है.
हां, अगर आपके प्रोफाइल में कोई कमी है लेकिन आपके को-एप्लीकेंट (जैसे पति/पत्नी) का फाइनेंशियल प्रोफाइल मजबूत है, तो ज्वाइंट लोन अप्लाई करने से लोन अप्रूव होने के चांस बढ़ जाते हैं.