अच्छा सिबिल स्कोर होने के बावजूद भी बैंक रिजेक्‍ट कर सकते हैं आपका लोन, समझ लें ये 8 बड़े कारण

एक अच्छा सिबिल स्कोर लोन मिलने की प्रक्रिया को आसान बनाता है, लेकिन ये इसकी गारंटी नहीं है. लोन देने से पहले बैंक सिबिल स्कोर के अलावा भी काफी कुछ देखता है. आवेदक की इनकम की स्‍टेबिलिटी, मौजूदा कर्ज का बोझ (DTI रेश्यो), नौकरी, उम्र और क्रेडिट हिस्ट्री वगैरह भी देखते हैं. यहां जानिए वो 8 बड़े कारण जिनकी वजह से आपका लोन रिजेक्‍ट हो सकता है.
अच्छा सिबिल स्कोर होने के बावजूद भी बैंक रिजेक्‍ट कर सकते हैं आपका लोन, समझ लें ये 8 बड़े कारण

कई लोगों को लगता है कि अगर उनका सिबिल स्कोर 750 या 800 के पार है, तो उन्हें कोई भी लोन, चाहे वो पर्सनल हो, होम लोन हो या कार लोन, चुटकियों में मिल जाएगा. ये बात काफी हद तक सही है, लेकिन ये पूरा सच नहीं है. एक शानदार क्रेडिट स्कोर लोन अप्रूवल की गारंटी नहीं होता. ये सिर्फ पहली सीढ़ी है.

कई बार ऐसा होता है कि एक बेहतरीन सिबिल स्कोर वाले व्यक्ति की लोन एप्लीकेशन भी बैंक रिजेक्ट कर देता है. ऐसे में लोगपरेशान हो जाते हैं कि आखिर गलती कहां हुई. दरअसल, बैंक या कोई भी वित्तीय संस्थान सिर्फ आपका स्कोर ही नहीं देखता, बल्कि वो आपकी पूरी फाइनेंशियल कुंडली खंगालता है. आइए, उन 8 बड़े कारणों को समझते हैं, जिनकी वजह से एक अच्छा सिबिल स्कोर भी आपको लोन दिलाने में नाकाम हो सकता है.

1. कर्ज का भारी बोझ (High Debt-to-Income Ratio - DTI)

ये लोन रिजेक्शन का सबसे आम और बड़ा कारण है. DTI रेश्यो का मतलब है कि आपकी महीने की कमाई का कितना हिस्सा पहले से चल रही EMI चुकाने में जा रहा है.

कैसे करें कैलकुलेट

(आपकी सभी मौजूदा EMI का कुल जोड़ / आपकी महीने की कुल कमाई) x 100

मान लीजिए आपकी महीने की सैलरी 60,000 रुपये है और आप पहले से ही 25,000 रुपये की EMI भर रहे हैं. तो आपका DTI रेश्यो होगा (25,000 / 60,000) x 100 = 41.66%.

बैंक आमतौर पर 40% से 50% से ज्यादा DTI रेश्यो को जोखिम भरा मानते हैं. अगर आपका DTI पहले से ही ज्यादा है, तो बैंक को लगता है कि एक और लोन का बोझ आप शायद न उठा पाएं और डिफॉल्ट कर सकते हैं. आपका अच्छा सिबिल स्कोर भी इस चिंता को दूर नहीं कर पाता.

2. इनकम का स्थिर न होना (Unstable or Insufficient Income)

आपका सिबिल स्कोर बताता है कि आपने अतीत में कर्ज कैसे चुकाया है, लेकिन आपकी आज की इनकम बताती है कि आप भविष्य में कर्ज चुका पाएंगे या नहीं. अगर आपकी नौकरी स्टेबल नहीं है, आप बार-बार जॉब बदलते हैं या आप किसी ऐसी इंडस्ट्री में काम करते हैं जहां आय की निश्चितता नहीं है (जैसे फ्रीलांसिंग या कुछ बिजनेस), तो बैंक आपको लोन देने में हिचकिचा सकता है. बैंक हमेशा एक स्थिर आय स्रोत देखना चाहता है.

3. खराब क्रेडिट मिक्स (Poor Credit Mix)

अगर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में सिर्फ अनसिक्योर्ड लोन (जैसे पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड लोन) ही भरे पड़े हैं और कोई सिक्योर्ड लोन (जैसे होम लोन, कार लोन) नहीं है, तो इसे एक खराब क्रेडिट मिक्स माना जाता है. ये संकेत देता है कि आप अपनी ज़रूरतों के लिए लगातार महंगे कर्ज पर निर्भर हैं. बैंक एक संतुलित क्रेडिट मिक्स को प्राथमिकता देते हैं.

4. बहुत ज्यादा लोन की पूछताछ करना (Multiple Recent Loan Inquiries)

अगर आप कम समय में कई बैंकों और NBFC में लोन के लिए अप्लाई करते हैं, तो हर बार आपकी क्रेडिट रिपोर्ट चेक की जाती है. इसे 'हार्ड इन्क्वायरी' कहते हैं. बहुत सारी हार्ड इन्क्वायरी आपके सिबिल स्कोर को तो थोड़ा कम करती ही हैं, साथ ही ये बैंकों को सिग्नल देती है कि आप कर्ज के लिए बहुत बेचैन हैं. इसे 'क्रेडिट हंगरी' व्यवहार माना जाता है और बैंक ऐसे ग्राहकों को रिस्की समझते हैं.

5. कंपनी या एम्प्लॉयर की प्रोफाइल (Employer's Credibility)

आप किस कंपनी में काम करते हैं, ये बात भी बहुत मायने रखती है. बैंक कंपनियों को उनकी प्रतिष्ठा, स्थिरता और आकार के आधार पर लिस्टेड (CAT A, CAT B, आदि) करते हैं. अगर आप किसी छोटी, नई या नॉन-लिस्टेड कंपनी में काम करते हैं, तो बैंक आपको लोन देने में थोड़ा कतरा सकता है, भले ही आपकी सैलरी अच्छी हो.

6. उम्र और बचे हुए सर्विस के साल (Age and Remaining Service Years)

खासकर होम लोन जैसे लंबी अवधि के लोन के लिए उम्र एक बड़ा फैक्टर है. अगर आप रिटायरमेंट के करीब हैं, तो बैंक आपको 20-25 साल का लंबा लोन देने से बचेगा क्योंकि आपकी कमाई के साल कम बचे हैं. बैंक ये सुनिश्चित करना चाहता है कि आपकी नौकरी खत्म होने से पहले लोन पूरा चुक जाए.

7. पुराने लोन का 'सेटल्ड' होना

हो सकता है कि आपने अतीत में किसी लोन को चुकाने में दिक्कत होने पर बैंक के साथ 'सेटलमेंट' किया हो. भले ही इसके बाद आपको ईएमआई देने से मुक्ति मिल गई हो, लेकिन आपने मेहनत करके अपना सिबिल स्कोर सुधार लिया हो, लेकिन आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में ये निगेटिव एंट्री लंबे समय दिखती रहती है. ऐसे में बैंक आपको नया लोन देने से इनकार कर सकते हैं. बेहतर होगा कि आप नए लोन के लिए अप्‍लाई करने से पहले पुराने लोन को क्‍लोज करें.

8. एप्लीकेशन फॉर्म में गलती या जानकारी का मेल न खाना

ये एक बहुत ही छोटी लेकिन आम गलती है. कई बार लोग एप्लीकेशन फॉर्म में गलत जानकारी भर देते हैं या जो जानकारी देते हैं, वो उनके दिए गए दस्तावेजों (पैन, आधार, सैलरी स्लिप) से मेल नहीं खाती. ऐसी किसी भी गड़बड़ी पर बैंक तुरंत एप्लीकेशन को रिजेक्ट कर देता है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. सिबिल स्कोर के अलावा बैंक क्या देखता है?

बैंक सिबिल स्कोर के अलावा आपकी महीने की आय, आपकी नौकरी कितनी स्थिर है, आपके ऊपर पहले से कितना कर्ज है (DTI Ratio), और आप किस कंपनी में काम करते हैं, इन सब बातों पर गौर करता है.

2. डेट-टू-इनकम (DTI) रेश्यो कितना होना चाहिए?

आमतौर पर, बैंक चाहते हैं कि आपका DTI रेश्यो 40% से ज्यादा न हो. इसका मतलब है कि आपकी सारी EMI आपकी महीने की कमाई के 40% हिस्से से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.

3. लोन रिजेक्ट होने के बाद मुझे क्या करना चाहिए?

सबसे पहले रिजेक्शन का कारण पता करें. बैंक से पूछें या अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें. उस कमी को दूर करें (जैसे पुराना कर्ज चुकाकर DTI कम करें) और कम से कम 3-6 महीने रुकने के बाद ही दोबारा अप्लाई करें.

4. कितनी लोन इन्क्वायरी (पूछताछ) खराब मानी जाती है?

अगर आप 6 महीने के अंदर 3-4 से ज्यादा बार लोन के लिए अप्लाई करते हैं, तो इसे बहुत ज्यादा माना जाता है और ये आपके प्रोफाइल पर निगेटिव असर डालता है.

5. क्या ज्वाइंट लोन अप्लाई करने से मदद मिल सकती है?

हां, अगर आपके प्रोफाइल में कोई कमी है लेकिन आपके को-एप्लीकेंट (जैसे पति/पत्नी) का फाइनेंशियल प्रोफाइल मजबूत है, तो ज्वाइंट लोन अप्लाई करने से लोन अप्रूव होने के चांस बढ़ जाते हैं.

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