EMI का पूरा सच: बैंक किस फॉर्मूले से करते हैं हिसाब? जानिए कैसे कम कर सकते हैं अपना बोझ

लोन लेने से पहले हर किसी को EMI की गणना समझना बेहद जरूरी है.बैंक किस फॉर्मूले से EMI तय करते हैं, टेन्योर और ब्याज दर का कितना असर पड़ता है और कैसे कम ब्याज चुकाया जा सकता है, यहां आसान भाषा में पूरा समझें.
EMI का पूरा सच: बैंक किस फॉर्मूले से करते हैं हिसाब? जानिए कैसे कम कर सकते हैं अपना बोझ

आज के टाइम में लोग अपनी जरूरत के हिसाब से डिफरेंट टाइप के लोन लेते हैं और फिर ईएमआई के जरिए बैंक को वो पैसा वापस देते हैं. लेकिन जब भी कोई व्यक्ति होम लोन, पर्सनल लोन या कार लोन लेने की सोचता है, तो सबसे पहले उसके मन में यही सवाल आता है कि हर महीने कितनी EMI देनी होगी. वैसे तो बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि बैंक मनमाने तरीके से EMI तय कर देते हैं, लेकिन सच आपकी इस सोच से बिल्कुल ही अलग होता है. दरअसल, बैंक एक फिक्स कैलकुलेशन फॉर्मूले के जरिए EMI को कैलकुलेट करता है, जिसमें लोन की राशि, ब्याज दर और लोन की टाइमिंग अहम भूमिका निभाती है.

वैसे आपको बता दें कि हाल के दिनों में RBI द्वारा रेपो रेट में कटौती के बाद लोग उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी EMI कम होगी. ऐसे में यह समझना और भी जरूरी हो जाता है कि EMI आखिर बनती कैसे है और किन बातों पर निर्भर करती है. तो चलिए जानेंगे इस फॉर्मूले से आपकी ईएमआई कैलकुलेट की जाती है.

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EMI कैलकुलेशन का बेसिक फॉर्मूला

बैंक EMI निकालने के लिए इस फॉर्मूले का यूज करते हैं:

EMI = P × R × (1+R)^N / [(1+R)^N – 1]

इस फॉर्मूले में-

P का मतलब है लोन की मूल राशि (Principal)
R से मतलब है मंथली ब्याज दर
N लोन की टोटल टेन्योर अवधि (महीनों में)

अब यहां पर ध्यान देने वाली बात ये है कि बैंक सालाना ब्याज दर को पहले मंथली ब्याज दर में बदलते हैं.तो उदाहरण के तौर पर, अगर ब्याज दर 7.2% सालाना है, तो इसे 12 से भाग देकर और 100 से डिवाइड करके मंथली दर निकाली जाती है, यानि कि R = 7.2 / 12 / 100 = 0.006.

उदाहरण से समझेंगे EMI का पूरा कैलकुलेशन

चलिए हम मान लेते हैं कि किसी इंसान ने10 लाख रुपये का लोन 10 साल (120 महीने) के लिए लेता है और ब्याज दर 7.2% सालाना है,तो फॉर्मूले के अनुसार-

EMI = 10,00,000 × 0.006 × (1 + 0.006)^120 / [(1 + 0.006)^120 – 1]

इस हिसाब से उस इंसान की EMI करीब-करीब ₹11,714 प्रति माह के आसपास की बनने वाली है.

वैसे तो आजकल ग्राहक चाहें तो बैंक या फाइनेंस वेबसाइट पर मौजूद ऑनलाइन EMI कैलकुलेटर की मदद से भी आसानी से यह कैलकुलेशन कर सकते हैं.

लोन का टेन्योर बढ़ेगा तो EMI घटेगी, लेकिन…

आमतौर पर लोग कम EMI के चक्कर में लोन के टेन्योर को लंबा यानी कि ज्यादा रख लेते हैं.वैसे यह सही है कि लंबी अवधि का लोन लेने पर EMI कम हो जाती है, लेकिन इसका नुकसान भी होता है, वो यह है कि कुल ब्याज ज्यादा चुकाना पड़ता है. जबकि, कम टेन्योर वाले लोन में EMI थोड़ी ज्यादा होती है, लेकिन टोटल ब्याज खर्च काफी कम हो जाता है.

पहले से लिए गए लोन में क्या करें?

तो फिर अगर आपने पहले से लॉन्ग टर्म का लोन ले रखा है, तो आप बैंक से लोन री-स्ट्रक्चरिंग या प्रीपेमेंट का ऑप्शन चुनना बेस्ट हो सकता है. इससे लोन की अवधि घटाई जा सकती है, हालांकि EMI थोड़ी बढ़ सकती है.ब्याज दरें आपके क्रेडिट स्कोर, लोन अमाउंट और टेन्योर पर भी डिपेंडेट करती है.यानी कि कुल मिलाकर, EMI समझदारी से चुनना जरूरी है, ताकि आपकी जेब पर ज्यादा बोझ न पड़े और ब्याज में बेवजह ज्यादा पैसा न देना पड़े.


खबर से जुड़े FAQs

Q1. EMI क्या होती है?
EMI यानी इक्वेटेड मंथली इंस्टॉलमेंट, जो लोन की रकम, ब्याज और अवधि मिलाकर हर महीने चुकाई जाती है.

Q2. बैंक EMI किस आधार पर तय करते हैं?
बैंक लोन अमाउंट, ब्याज दर और लोन टेन्योर के आधार पर तय फॉर्मूले से EMI निकालते हैं.

Q3. लोन टेन्योर बढ़ाने से क्या फायदा होता है?
टेन्योर बढ़ाने से EMI कम होती है, लेकिन कुल ब्याज ज्यादा देना पड़ता है.

Q4. कम ब्याज देने के लिए क्या करना चाहिए?
कम अवधि का लोन चुनें, समय-समय पर प्रीपेमेंट करें और अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखें.

Q5. EMI कैलकुलेशन कहां से चेक कर सकते हैं?
आप बैंक की वेबसाइट या ऑनलाइन EMI कैलकुलेटर की मदद से आसानी से EMI जान सकते हैं.

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