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RBI Policy का फैसला आया
न्यूट्रल रुख रखने पर सभी सदस्य सहमत
रेपो रेट को 5.5% पर स्थिर रखने की घोषणा
आरबीआई एमपीसी बैठक अगस्त 2025 लाइव: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) का फैसला आ गया है. तीन दिनों तक चलने वाली इस मीटिंग के बाद बुधवार, 6 अगस्त को गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अपने संबोधन में बताया कि न्यूट्रल रुख बरकरार रखने पर सभी सदस्य सहमत हुए हैं और रेपो रेट को 5.5% पर स्थिर रखने का फैसला किया गया है. ज़ी बिज़नेस के पोल के मुताबिक, 60 फीसदी एक्सपर्ट्स का मानना था कि ब्याज दरों में कटौती नहीं होगी. हालांकि, 40 फीसदी एक्सपर्ट्स ने उम्मीद जताई थी कि एक बार फिर RBI ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) की कटौती कर सकता है.
एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि अमेरिका की तरफ से जारी टैरिफ वॉर और ग्लोबल अनिश्चितताओं के चलते GDP ग्रोथ पर असर देखने को मिल सकता है. ऐसे में RBI ग्रोथ के इंजन को रफ्तार और सपोर्ट देने के लिए एक और बार कटौती कर सकता है, हालांकि, फिलहाल रेट कट नहीं आया है.
RBI ने इस साल लगातार तीन बार में ब्याज दरों में कटौती की है. करीब 5 साल बाद आरबीआई की तरफ से ये कटौती की गई थी. फरवरी से अब तक कुल 1% की कटौती हो चुकी है. फरवरी की मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट को 6.50% से घटाकर 6.25% किया गया था. दूसरी बार अप्रैल में भी रेपो रेट में 0.25% की कटौती की गई. तीसरी बार जून में भी कटौती की गई. फिलहाल रेपो रेट 5.50% पर है. रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर बैंक RBI से कर्ज लेते हैं. रेपो रेट घटने से आपके लोन की EMI कम होने की भी संभावना रहती है. बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है तो वो इसका फायदा ग्राहकों तक भी पहुंचाता है.
06 Aug 2025, 3:00 PM (IST)
इंडियन ओवरसीज़ बैंक के एमडी और सीईओ अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि आरबीआई ने रेपो रेट 5.5% पर बनाए रखने और तटस्थ रुख अपनाने का जो फैसला किया है, वह महंगाई को काबू में रखने और अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए सोच-समझकर उठाया गया कदम है. अभी कोर महंगाई करीब 4% के आसपास स्थिर है, FY26 में CPI महंगाई औसतन 3.1% रहने का अनुमान है और जीडीपी ग्रोथ भी 6.5% पर स्थिर रहने की उम्मीद है। ये सभी आंकड़े दिखाते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है.
हम तरलता (लिक्विडिटी) प्रबंधन के लिए आरबीआई के कदम और जरूरत के हिसाब से नीतियों में बदलाव के इरादे का स्वागत करते हैं. इससे आर्थिक स्थिरता बनी रहेगी और कर्ज की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी. आरबीआई का खुदरा निवेशकों को SIP के जरिए ट्रेजरी बिल में निवेश का मौका देना और बैंक लॉकर व खाता दावा निपटान को मानकीकृत करने का फैसला, ऐसे कदम हैं जो वित्तीय समावेशन बढ़ाएंगे और निवेशकों का भरोसा मजबूत करेंगे.
जन धन योजना के 10 साल पूरे होने पर बैंक भी ज्यादा से ज्यादा लोगों को खाते खोलने के लिए कैंप लगा रहे हैं. इंडियन ओवरसीज़ बैंक इस पॉलिसी रुख को विकास और स्थिरता के लिए सही मानता है और हम व्यक्तियों और कारोबारियों दोनों की कर्ज की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
06 Aug 2025, 12:44 PM (IST)
नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल ने कहा, "नीतिगत दरों का स्थिर रहना और सरप्लस लिक्विडिटी अधिक पूर्वानुमान प्रदान करते हैं, साथ ही, इससे घर खरीदारों के लिए अफोर्डेबिलिटी भी बनी रहती है. कुछ बैंकों की ओर से होम लोन ब्याज दरों को घटा दिया गया है. इससे मध्यम और निम्न आय सेगमेंट के घरों की मांग को सपोर्ट मिला है और अभी घटी हुई ब्याज दरों का फायदा धीरे-धीरे नीचे के क्रम में पहुंच रहा है."
नारेडको महाराष्ट्र के अध्यक्ष प्रशांत शर्मा ने कहा, "महंगाई में कमी के बावजूद रेपो दर को 5.5 प्रतिशत पर बनाए रखने का आरबीआई का निर्णय वैश्विक चुनौतियों और घरेलू स्थिरता के प्रबंधन के प्रति एक सतर्क लेकिन संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है. रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए, दरों का स्थिर होना घर खरीदारों की धारणा में निरंतर गति सुनिश्चित करती है और यह घरों के लिए अफोर्डेबिलिटी को बनाए रखती है."
इंडिया सोथबी इंटरनेशनल रियल्टी के एमडी अमित गोयल ने कहा, "आरबीआई का तटस्थ नीतिगत रुख, 6.5 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान और मुद्रास्फीति में नरमी, स्थिर व्यापक आर्थिक आत्मविश्वास को दर्शाता है. मजबूत खपत और स्थिर शहरी मांग पहले से ही भारत के हाउसिंग सेंटीमेंट को समर्थन दे रही है."
(IANS Hindi)
06 Aug 2025, 12:42 PM (IST)
PL Capital के इकोनॉमिस्ट अर्श मोगरे का मानना है कि यह फैसला वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की मजबूती को बनाए रखने में मदद करेगा. उन्होंने कहा, “रेपो रेट को 5.50% पर बनाए रखना सिर्फ एहतियात भर नहीं है, बल्कि यह वैश्विक नाजुकता और घरेलू मजबूती के बीच एक संतुलित ठहराव है. हेडलाइन महंगाई फिलहाल काबू में है और जून का 50 बेसिस प्वाइंट का फ्रंट-लोडेड कट अभी भी सिस्टम में ट्रांसमिट हो रहा है, लेकिन एमपीसी इस बात से वाकिफ है कि टैरिफ के असर से ग्रोथ पर आने वाले डाउनसाइड रिस्क अभी पूरी तरह से कीमतों में शामिल नहीं हुए हैं.”
06 Aug 2025, 12:42 PM (IST)
Emkay Global Financial Service की चीफ इकोनॉमिस्ट माधवी अरोड़ा ने कहा, “आरबीआई ने महंगाई का अनुमान पहले के 3.7% से घटाकर 3.1% कर दिया है, फिर भी रेट को स्थिर रखने का फैसला उनके एक साल आगे की महंगाई के अनुमान पर फोकस को दर्शाता है, जो 4% से ऊपर सहज स्थिति में है. आरबीआई के नजरिए में, वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद ग्रोथ अच्छी बनी हुई है.”
06 Aug 2025, 12:38 PM (IST)
Indian Bank के एमडी और सीईओ बिनोद कुमार ने कहा कि आरबीआई का फैसला उम्मीद के मुताबिक और स्वागतयोग्य है. उन्होंने कहा, “चूंकि आरबीआई पहले ही रेट कट कर चुका था, इसलिए स्टेटस क्वो बनाए रखने की उम्मीद थी. यह स्वागत योग्य कदम है, लेकिन आने वाले महीनों में इसे दोबारा विचारने की गुंजाइश बनी हुई है, क्योंकि सीपीआई काबू में है और ग्रोथ को बढ़ावा देने की जरूरत पड़ सकती है.”
06 Aug 2025, 11:28 AM (IST)
Kotak Institutional Equities के चीफ इकोनॉमिस्ट्स सुवोदीप रक्षित ने कहा कि "आरबीआई ने अगस्त की पॉलिसी में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है. इसका कारण यह है कि 4QFY26 से महंगाई में धीरे-धीरे बढ़ोतरी की संभावना है, हालांकि आरबीआई को CY2025 (साल 2025) के बाकी समय के लिए महंगाई के आंकड़े काफी कम लग रहे हैं."
"ऐसा लगता है कि आरबीआई बाजार में पर्याप्त नकदी बनाए रखेगा, ताकि ब्याज दरों में कटौती का असर आगे भी बना रहे. आरबीआई अब लंबी अवधि तक ब्याज दरों को नहीं बदलेगा, क्योंकि उसका ध्यान अब FY2027 की महंगाई और आर्थिक विकास की स्थिरता पर है. आगे चलकर आरबीआई का रुख नरम करना मुश्किल होगा और यह तभी होगा जब आर्थिक विकास की संभावनाएं काफी कमजोर दिखें."
06 Aug 2025, 10:53 AM (IST)
RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट को 5.5% पर यथावत रखा है. ANAROCK ग्रुप के चेयरमैन Anuj Puri के मुताबिक, रियल एस्टेट सेक्टर इस समय दबाव में है. ट्रम्प प्रशासन के नए 25% टैरिफ और बड़े शहरों में हाउसिंग सेल्स में 20% की गिरावट ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है. Q2 2025 में सिर्फ 96,285 घर बिके, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1,20,335 था.
बीते दो साल में टॉप 7 शहरों में आवासीय दाम 39% बढ़े हैं, जिससे सस्ती आवास परियोजनाओं पर और दबाव बढ़ गया है. टैरिफ और ग्लोबल ट्रेड टेंशन का असर MSME सेक्टर पर भी पड़ सकता है, जो अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए मुख्य खरीदार हैं.
अनुज पुरी का मानना है कि अगर RBI ने रेट कट किया होता तो सस्ते लोन से अफोर्डेबल हाउसिंग को मजबूती मिलती. फिलहाल, खरीदार शॉर्ट-टर्म रेट कट के बजाय लंबे समय के भरोसे पर खरीदारी कर रहे हैं. आने वाले त्योहारों के मौसम में डेवलपर्स ऑफर्स और फ्लेक्सिबल पेमेंट प्लान्स के जरिए मांग को बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं.
06 Aug 2025, 10:48 AM (IST)
Oyster Capital के अतुल जोशी ने कहा कि टैरिफ का असर देखने के बाद ही RBI कोई बड़ा फैसला लेगा. बहुत संभव है कि अगली पॉलिसी में 25 बेसिस पॉइंट का रेट कट आ जाए. लेकिन उसके साथ जीडीपी के अनुमान में भी एडजस्टमेंट होगा. दरें नहीं घटीं तो GDP के अनुमान में कटौती करनी पड़ेगी. मार्च-अप्रैल में सरकार ने 4 लाख करोड़ का कैपेक्स किया है. इससे हमारा जीएसटी कलेक्शन बढ़ा है. जीडीपी को सपोर्ट करने के लिए आरबीआई को रेट कट करना पड़ेगा. टैरिफ के चलते ये उम्मीद है कि अगली पॉलिसी में या उसके पहले एक्सपोर्टर्स और MSMEs के लिए कुछ इंसेंटिव दिया जा सकता है.
06 Aug 2025, 10:48 AM (IST)
मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा ने कहा कि इस साल एक और रेट कट आ सकता है. अगली पॉलिसी आरबीआई के पास इसके लिए मौका है. फेस्टिव सीजन के पहले रेट कट आना चाहिए. इससे इकोनॉमी को बूस्ट मिलता है. दिसंबर से पहले एक बार दरों में कटौती दिख सकती है.
06 Aug 2025, 10:32 AM (IST)
Complete Circle Wealth के गुरमीत चड्ढा ने कहा कि दरों में कटौती न होने से निराशा है. इकोनॉमी को और पुश करने की जरूरत है. ऐसा लग रहा है कि हम अंडरअचीव कर रहे हैं. अगले कुछ महीनों में एक रेट कट आना चाहिए. महंगाई अगर 3% पर आती है तो ब्याज दर 5% पर होनी चाहिए. उन्होंने ये भी कहा कि सरकार को कई पहलू हैं जहां ब्रीदर देना चाहिए, जीएसटी रेट्स घटाने चाहिए.
06 Aug 2025, 10:31 AM (IST)
06 Aug 2025, 10:30 AM (IST)
06 Aug 2025, 10:25 AM (IST)
06 Aug 2025, 10:18 AM (IST)
06 Aug 2025, 10:16 AM (IST)
| अवधि | पिछला अनुमान | नया अनुमान |
|---|---|---|
| FY26 | 3.7% | 3.1% |
| Q2FY26 | 3.4% | 2.1% |
| Q3FY26 | 3.9% | 3.1% |
| Q4FY26 | 4.4% | 4.4% |
| Q1FY27 | — | 4.9% |
06 Aug 2025, 10:13 AM (IST)
| अवधि | पिछला अनुमान | नया अनुमान |
|---|---|---|
| FY26 | 6.5% | 6.5% |
| Q1FY26 | 6.5% | 6.5% |
| Q2FY26 | 6.7% | 6.7% |
| Q3FY26 | 6.6% | 6.6% |
| Q4FY26 | 6.3% | 6.3% |
| FY27 | — | 6.6% |
06 Aug 2025, 10:10 AM (IST)
06 Aug 2025, 10:08 AM (IST)
गवर्नर ने कहा कि टैरिफ की अनिश्चितता बनी हुई है. पॉलिसी दरों में कटौती का ट्रांसमिशन जारी है. अनिश्चितताओं से दरों में बदलाव नहीं करने का फैसला लिया गया है. ग्रामीण मांग में तेजी बनी हुई है, शहरी मांग में सुधार बना हुआ है. सरकारी कैपेक्स से ग्रोथ को बढ़ावा दिया जा रहा है.
06 Aug 2025, 10:06 AM (IST)
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि सरकार को बेहतर इकोनॉमी की उम्मीद है. मीडियम टर्म में अर्थव्यवस्था के शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है. ग्लोबल स्तर पर चुनौतियां बनी हुई हैं. इस बार की मीटिंग में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है. रेपो रेट 5.50% पर बरकरार है. RBI ने न्यूट्रल रुख बरकरार रखा.
06 Aug 2025, 10:00 AM (IST)
RBI MPC Meeting LIVE Updates: आरबीआई गवर्नर का संबोधन शुरू.
06 Aug 2025, 9:06 (IST)
MPC दरों में 0.25% की कटौती हुई तो EMI में कितनी गिरावट संभव है? 1 साल की पर्सनल लोन EMI 10.10% हो तो क्या कैलकुलेशन बनेगा?
| लोन राशि | पहले EMI (₹) | अब EMI (₹) | सालाना बचत (₹) |
|---|---|---|---|
| 2 लाख | 17,592 | 17,569 | 276 |
| 3 लाख | 26,389 | 26,354 | 420 |
| 5 लाख | 43,981 | 43,923 | 696 |
06 Aug 2025, 9:04 (IST)
MPC दरों में 0.25% की कटौती हुई तो EMI में कितनी गिरावट संभव है? 5 साल के ऑटो लोन की EMI 9% हो तो क्या कैलकुलेशन बनेगा?
| लोन राशि | पहले EMI (₹) | अब EMI (₹) | सालाना बचत (₹) |
|---|---|---|---|
| 3 लाख | 6,228 | 6,191 | 444 |
| 5 लाख | 10,379 | 10,319 | 720 |
| 10 लाख | 20,758 | 20,637 | 1,452 |
06 Aug 2025, 9:00 (IST)
MPC दरों में 0.25% की कटौती हुई तो EMI में कितनी गिरावट संभव है? 20 साल के होम लोन के EMI@ 7.5% हो तो क्या कैलकुलेशन बनेगा?
| लोन राशि | पहले EMI (₹) | अब EMI (₹) | सालाना बचत (₹) |
|---|---|---|---|
| 20 लाख | 16,112 | 15,808 | 3,648 |
| 30 लाख | 24,168 | 23,711 | 5,484 |
| 50 लाख | 40,280 | 39,519 | 9,132 |
06 Aug 2025, 8:51 (IST)
अगस्त की पॉलिसी आने में कुछ देर है. इसके पहले एक बार संक्षेप में जान लीजिए कि पिछली पॉलिसी में क्या हाइलाइट्स थे.
06 Aug 2025, 8:48 (IST)
RBI Rates
Policy repo rate 5.5%
Marginal standing facility rate 5.75%
Standing Deposit rate 5.25%
Reverse Repo Rate 3.35%
Bank Rate 5.75%
CRR 4%
SLR 18%
06 Aug 2025, 6:33 (IST)
आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी में लिक्विडिटी मैनेजमेंट फ्रेमवर्क, अमेरिका की तरफ से लगने वाले टैरिफ का असर, मॉनसून की स्थितियों पर नजर और बैंकों की वित्तीय स्थितियों पर फोकस देखने को मिल सकता है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की कमेंट्री में इन चारों का जिक्र जरूर देखने को मिलेगा. और यही चार वजह तय करेंगी कि महंगाई, ग्रोथ और ब्याज दर की आगे की स्थितियां क्या रहने वाली हैं.
06 Aug 2025, 6:31 (IST)
ज़ी बिज़नेस के पोल के मुताबिक, 90 फीसदी एक्सपर्ट्स का मानना है आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी में GDP अनुमान में कोई बदलाव नहीं होगा. वहीं, 10 फीसदी एक्सपर्ट्स आशंका जता रहे हैं कि ग्रोथ के अनुमान में बदलाव देखने को मिल सकता है. हालांकि, बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री जान्हवी प्रभाकर का भी मानना है आर्थिक गतिविधियां अभी मजबूत बनी हुई हैं, लेकिन टैरिफ जैसे बाहरी जोखिम मौजूद हैं, इसलिए आरबीआई इस बार GDP अनुमानों में कोई बदलाव नहीं करेगा. FY26 में GDP ग्रोथ 6.4% से 6.6% के बीच रह सकती है.
Do you expect RBI to change GDP Projection for fy26 ?
A) Yes 10%
B) No 90%
c) Can't say -
06 Aug 2025, 6:21 (IST)
ज़ी बिज़नेस के पोल के मुताबिक, 100 फीसदी एक्सपर्ट्स का मानना है आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी में महंगाई (Inflation) के अनुमान में बदलाव कर सकता है. RBI महंगाई के आंकड़ों में थोड़ी राहत को देखते हुए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में 20-30 bps की कमी कर सकता है.
Do you expect change in Inflation forecast for fy26?
A) Yes 100%
B) No -
c) Can't say -
06 Aug 2025, 6:17 (IST)
ज़ी बिज़नेस के पोल के मुताबिक, 100 फीसदी एक्सपर्ट्स का मानना है आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी का रुख इस बार भी न्यूट्रल रह सकता है. जब RBI ‘न्यूट्रल रुख’ अपनाता है, तो इसका अर्थ होता है कि वह न तो दरों को घटाने के पक्ष में है, न ही बढ़ाने के- यानी कोई निश्चित दिशा नहीं है. इस रुख का उद्देश्य होता है समय लेकर परिस्थिति का आंकलन करना. RBI इस स्थिति में नीतियों में लचीलापन बनाए रखता है, और यह संकेत देता है कि वह मौजूदा डेटा और वैश्विक स्थिति के आधार पर भविष्य में कोई भी कदम उठा सकता है. वहीं, अकॉमोडेटिव रुख का मतलब है कि RBI भविष्य में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है या उन्हें निचले स्तर पर बनाए रख सकता है ताकि अर्थव्यवस्था को गति दी जा सके. यह रुख तब अपनाया जाता है जब महंगाई नियंत्रण में हो, लेकिन अर्थव्यवस्था को थोड़ी रफ्तार देने की जरूरत हो.
MPC Stance this policy
A) Neutral 100%
B) Accommodative 0
06 Aug 2025, 6:15 (IST)
ज़ी बिज़नेस के पोल के मुताबिक, इस फाइनेंशियल ईयर में एक आखिरी कटौती के तौर पर रिजर्व बैंक 0.25% की कटौती और करेगा. लेकिन, ये कौन सी पॉलिसी में होगा ये फैसला सारे इकोनॉमिक मीटर्स देखने के बाद ही पता चलेगा. 60 फीसदी एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस वित्त वर्ष में 25 बेसिक प्वाइंट की कटौती की गुंजाइश है. वहीं, 40 फीसदी एक्सपर्ट्स का मानना है कि अभी 50 बेसिस प्वाइंट्स तक की कटौती संभव है.
How much more rate cut is possible this FY?
A) 0.25% 60%
B) 0.50% 40%
06 Aug 2025, 6:14 (IST)
ज़ी बिज़नेस के पोल के मुताबिक, 40 फीसदी एक्सपर्ट्स का मानना है कि रिजर्व बैंक एक और बार ब्याज दरों में कटौती कर सकता है. हालांकि, ये कटौती इस फाइनेंशियल ईयर की आखिरी कटौती हो सकती है.
A) No rate cut 60%
B) 0.25% 40%
C) 0.50% -
06 Aug 2025, 6:10 (IST)
ज़ी बिज़नेस के पोल के मुताबिक, आरबीआई से इस बार कटौती की उम्मीद कम है. एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि कोई रेट कट नहीं होगा. 60 फीसदी एक्सपर्ट्स का मानना है कि रिजर्व बैंक इस बार कटौती नहीं करेगा और आगे की स्थितियों को देखते अक्टूबर या दिसंबर की पॉलिसी में कोई फैसला लेगा.
A) No rate cut 60%
B) 0.25% 40%
C) 0.50% -
06 Aug 2025, 6:05 (IST)
पॉलिसी में रेट कट दो तरफ इशारा करते हैं. पहला रेपो रेट में बदलाव कर सेंट्रल बैंक ग्रोथ को सपोर्ट करने की कोशिश करता है. दूसरा महंगाई से लड़ने में मदद मिलती है. जब भी महंगाई बढ़ती है तो RBI रेपो रेट बढ़ाकर मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है. इस सिचुएशन में आपको बैंकों से ज्यादा या ऊंची दरों पर लोन मिलता है. मनी फ्लो कम होने से डिमांड में भी कमी आती और महंगाई को कंट्रोल किया जा सकता है. वहीं, दूसरी तरह ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए जब मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत होती है RBI रेपो रेट को कम करता या कटौती करता है. इससे लोन सस्ते हो जाते हैं और लोगों की EMI भी कम होती है. खर्च करने की क्षमता को बढ़ाया जाता है ताकि डिमांड और कंजम्प्शन बढ़ सके.
06 Aug 2025, 6:02 (IST)
आरबीआई अगर एक बार फिर रेपो रेट कम करता है तो इसका फायदा बैंकों के साथ-साथ ग्राहकों को भी मिल सकता है. होम लोन, ऑटो लोन जैसे फीचर्स पर ब्याज दरें कम हो सकती हैं. ऐसे में आपको सस्ता लोन मिलने की उम्मीद बढ़ जाएगी. पहले से चल रहे लोन की EMI भी कम होगी. ब्याज दरें कम होने से रियल एस्टेट को भी बूस्ट मिलता है और हाउसिंग डिमांड बढ़ती है.