&format=webp&quality=medium)
सालों साल से निवेशकों के बीच फिक्स डिपॉजिट यानी कि एफडी में इन्वेस्ट किया जाता है. निवेशकों के लिए एफडी सेफ और बेस्ट ऑप्शन मानी जाती है. यही कारण है कि बैंक या किसी फाइनेंशियल संस्थान में पैसा जमा करने के सबसे फेमस तरीकों में से एक है फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) होती है. यह एक सेफ इन्वेस्टमेंट ऑप्शन माना जाता है, क्योंकि इसमें मार्केट के उतार-चढ़ाव का कोई खतरा नहीं होता है. हालांकि, सभी FD एक जैसी नहीं होतीं है. जी हां आपकी जरूरतों के हिसाब से सही FD चुनना बेस्ट होता है. तो आज हम जानेंगे जरूरत के हिसाब से कौन से एफडी को चुनें.
संचयी FD (Cumulative FD): इस FD में ब्याज की राशि मैच्योरिटी तक मूलधन के साथ जुड़ती रहती है. आपको पूरे इन्वेस्टमेंट के पीरियड का टोटल ब्याज और प्रिंसिपल अमाउंट यानी कि मूलधन एक साथ मैच्योरिटी पर मिलता है.ये उनके लिए सबसे अच्छा है जिन्हें तुरंत इनकम की जरूरत नहीं है और वे अपनी राशि को बढ़ाना चाहते हैंय
गैर-संचयी FD (Non-Cumulative FD): इसमें आपको ब्याज का पेमेंट एक फिक्स टाइम पीरियड पर मिलता है, जैसे मासिक, तिमाही या सालाना.वैसे ये उन लोगों के लिए बेस्ट है जिन्हें अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक स्थिर इनकम चाहिए, जैसे कि रिटायर्ड लोग.
यह एक खास तरह की FD है, जो आयकर बचाने के लिए बनाई गई है.इसमें इन्वेस्ट की गई राशि (₹1.5 लाख तक) पर इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत टैक्स में छूट मिल सकती है.बस इस FD में 5 साल की लॉक-इन पीरियड होता है, यानी आप इस अवधि से पहले पैसे नहीं निकाल सकते.
यह FD खास रूप से सीनियर सिटीजन के लिए होती है.यानी कि 60 साल या उससे ज़्यादा उम्र के लोगों को सामान्य FD दरों की तुलना में अधिक ब्याज मिलता है (आमतौर पर 0.25% से 0.50% ज़्यादा).वैसे यह उनकी रिटायरमेंट के बाद की इनकम को बढ़ाने में मदद कर सकता है.
बैंक FD: यह सबसे आम और सेफ FD मानी जाती हैय इसमें जमा राशि पर DICGC (डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन) के जरिए ₹5 लाख तक का बीमा होता है, जिससे आपके पैसे सेफ रहते हैं.
कॉर्पोरेट FD: ये एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) या बाकी कंपनियों के जरिए दी जाती हैं. इनमें वैसे बैंक FD से अधिक ब्याज मिलता है, लेकिन इनमें रिस्क भी अधिक होता है.
सही FD का चुनाव आपकी पर्सनल जरूरतों पर निर्भर करता है:
1. आपकी जरूरत: अगर आपको हर मंथ इनकम चाहिए, तो गैर-संचयी FD चुनें. लॉन्ग टर्म में अपनी राशि बढ़ाना चाहते हैं, तो फिर संचयी FD बेस्ट है.
2. रिस्क सहने की क्षमता: अगर आप जरा भी रिस्क नहीं लेना चाहते, तो फिर बैंक FD को चुनें.अगर आप ज़्यादा रिटर्न के लिए थोड़ा रिस्क ले सकते हैं, तो फिर कॉर्पोरेट FD पर दांव लगाएं.
3. एज और टैक्स: जी हां अगर आप 60 साल से अधिक के हैं, तो सीनियर सिटीजन FD चुनें. अगर आप टैक्स बचाना चाहते हैं, तो टैक्स सेवर FD एक अच्छा ऑप्शन है.(नोट: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए, निवेश के लिए वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव लें)
5 FAQs
Q1. फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) क्या है?
फिक्स्ड डिपॉजिट एक निवेश विकल्प है जिसमें आप तय समय और ब्याज दर पर बैंक या NBFC में पैसा जमा करते हैं और सुरक्षित रिटर्न पाते हैं.
Q2. FD में कितना सुरक्षित निवेश होता है?
FD को सुरक्षित निवेश माना जाता है क्योंकि इसमें मार्केट जोखिम नहीं होता और ब्याज दर पहले से तय रहती है.
Q3. फिक्स्ड डिपॉजिट के कितने प्रकार होते हैं?
FD कई प्रकार की होती है, जैसे- रेगुलर FD, टैक्स-सेविंग FD, फ्लेक्सी FD, रीइंवेस्टमेंट FD और सीनियर सिटीजन FD.
Q4. टैक्स-सेविंग FD में निवेश की लिमिट कितनी होती है?
टैक्स-सेविंग FD में अधिकतम ₹1.5 लाख तक निवेश कर सकते हैं और आयकर की धारा 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है.
Q5. सीनियर सिटीजन FD में क्या फायदे हैं?
सीनियर सिटीजन FD पर सामान्य निवेशकों की तुलना में 0.25% से 0.50% तक अधिक ब्याज दर मिलती है.
(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)