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ज्वाइंट अकाउंट ऐसा बैंक खाता है जिसे दो या दो से ज्यादा लोग मिलकर खोलते हैं. ये अकाउंट सेविंग या करेंट दोनों तरह का हो सकता है. इसमें सभी होल्डर्स को समान अधिकार मिलते हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि सभी लोग एक ही खाते से पैसा निकाल सकते हैं, चेक जारी कर सकते हैं और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर सकते हैं. लेकिन इस अकाउंट के तमाम फायदे हैं तो कुछ ड्रॉबैक्स भी हैं. यहां समझ लीजिए इसके बारे में.
पति-पत्नी, बच्चों या बुजुर्ग माता-पिता के साथ घर का खर्च चलाने के लिए ये बहुत सुविधाजनक है. सभी लोग खाते में पैसा डाल सकते हैं और जरूरत के अनुसार निकाल सकते हैं.
अगर एक अकाउंट होल्डर बीमार हो जाए या यात्रा पर हो तो दूसरा तुरंत अकाउंट से पैसे निकाल सकता है. मेडिकल इमरजेंसी में ये बेहद मददगार है.
अगर पति-पत्नी दोनों की इनकम टैक्स योग्य है, तो ज्वाइंट अकाउंट से निवेश और टैक्स बचत के विकल्प जैसे FD या म्यूचुअल फंड में योगदान आसान हो जाता है.
दो लोग मिलकर बजट बनाते हैं और खाते को ट्रैक करते हैं. इससे फिजूलखर्ची कम होती है और सेविंग बढ़ती है.
अगर रिश्ते में दरार आ जाए या साथी भरोसेमंद न हो तो पैसा गलत तरीके से निकाला जा सकता है. बैंक बिना सभी की अनुमति के ट्रांजैक्शन रोक नहीं सकता.
किसी होल्डर की मौत या विवाद की स्थिति में खाते का सेटलमेंट लंबा कानूनी मामला बन सकता है. खासकर जब नॉमिनी अपडेट न हो.
अगर खाते में किसी एक होल्डर की तुलना में दूसरे का योगदान ज्यादा है, तो आयकर विभाग इस पर गहराई से जांच कर सकता है. इससे अनावश्यक टैक्स झंझट बढ़ सकता है.
अगर खाता ओवरड्राफ्ट की सुविधा वाला है और एक पार्टनर बिना बताए ज्यादा पैसे निकाल ले, तो दोनों पर कर्ज़ का बोझ आ सकता है.
हां, खाते का प्रकार तय करेगा कि पैसा कौन और कैसे निकाल सकता है.
Either or Survivor अकाउंट में दूसरा पार्टनर आसानी से खाता चला सकता है. लेकिन नॉमिनी न होने पर कानूनी प्रक्रिया अपनानी पड़ती है.
सभी लेन-देन पारदर्शी रखें और किसने कितना योगदान दिया, इसका रिकॉर्ड रखें.
नहीं, लेकिन सभी होल्डर्स की लिखित सहमति जरूरी होती है.