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सेंट्रल बैंक तेजी से खरीद रहे हैं सोना
निवेश की दुनिया में सोना (Gold) को सेफ हैवेन कहा जाता है. यानी जब भी दुनिया में कोई संकट पैदा होता है तो निवेशक अपना पैसा हर जगह से निकाल कर सोने में निवेश करने लग जाते हैं, इसकी वजह से सोना महंगा होने लगता है. ऐसे में ये खबर आना कि दुनियाभर के सेंट्रल बैंक तेजी से सोना खरीद रहे हैं, सबको हैरान कर रहा है.
1,000 टन सालाना सोने की हो रही खरीद
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले तीन सालों में सेंट्रल बैंकों ने हर साल 1,000 टन से ज़्यादा सोना खरीदा है. इससे पहले का औसत 400–500 टन सालाना हुआ करता था.
इस बढ़ती मांग के कारण सोने की कीमत में भी जबरदस्त उछाल आया है. तीन साल पहले गोल्ड का स्पॉट प्राइस 1,828 डॉलर था, जो अब 3,500 डॉलर तक पहुंच चुका है. यानी सिर्फ आठ महीनों में सोने की कीमत 1,000 डॉलर बढ़ गई है.
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सेंट्रल बैंक और सोना खरीदने की तैयारी में
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council - WGC) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में करीब 95 फीसदी रिज़र्व मैनेजरों का मानना है कि आने वाले 12 महीनों में सेंट्रल बैंक अपने सोने के भंडार और बढ़ाएंगे.
रिपोर्ट के अनुसार, यह आंकड़ा अब तक के सर्वाधिक स्तर पर है. 2024 के मुकाबले 17 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ यह इशारा करता है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने को एक सुरक्षित और भरोसेमंद संपत्ति मान रहे हैं. 2025 की इस रिपोर्ट में 73 देशों के सेंट्रल बैंकों ने हिस्सा लिया है.
इसके अलावा, EMDE (Emerging Markets & Developing Economies) देश के सेंट्रल बैंक सोने को लेकर ज्यादा उत्साहित हैं. इनमें से 48 फीसदी बैंक अगले साल अपने गोल्ड रिज़र्व बढ़ाने का इरादा रखते हैं, जबकि विकसित देशों में यह आंकड़ा 21 फीसदी है.
अपने देश में स्टोर कर रहे हैं सोना
WGC की रिपोर्ट के मुताबिक, अब ज़्यादा सेंट्रल बैंक अपने गोल्ड रिज़र्व को देश के भीतर ही स्टोर करने लगे हैं. 2024 में जहां यह आंकड़ा 41 फीसदी था, वहीं 2025 में 59 फीसदी बैंकों ने अपने गोल्ड को घरेलू स्तर पर रखने की बात कही है.
सेंट्रल बैंक कहां से खरीद रहे हैं सोना
दुनिया भर के सेंट्रल बैंक पहले सोना इंटरनेशनल मार्केट से खरीदते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर के सेंट्रल बैंक अब अपने ही देश की खदानों से सोना खरीद रहे हैं.
36 में से 19 केंद्रीय बैंकों ने यह स्वीकार किया है कि वह अब घरेलू छोटे और कारीगर स्तर की खदानों से लोकल करेंसी में सोना खरीद रहे हैं. इसके अलावा 4 और बैंक भी इस दिशा में सोच रहे हैं. जबकि, पिछले साल यह संख्या 14 थी. इससे दो बड़े फायदे हो रहे हैं, पहला तो सोना सस्ता मिल रहा है और दूसरा, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव भी नहीं पड़ रहा है.
इतना सोना क्यों खरीद रहे हैं सेंट्रल बैंक?
दुनिया भर में महंगाई, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव, युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव जैसी स्थितियां बनी हुई हैं. ऐसे में सेंट्रल बैंक ऐसी संपत्ति में निवेश कर रहे हैं जो इन सबके बावजूद अपनी कीमत और मूल्य को सुरक्षित रख सके. सोना इसमें सबसे भरोसेमंद माना जाता है.
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, 85 फीसदी रिजर्व मैनेजरों का मानना है कि मुश्किल समय में सोना सबसे बेहतर प्रदर्शन करता है. यानी जब बाजार में उथल-पुथल हो या विदेशी करेंसी कमजोर हो, तब भी सोना एक मजबूत सहारा बना रहता है. वहीं, लगभग 81 फीसदी सेंट्रल बैंकों का कहना है कि सोना उनके रिजर्व पोर्टफोलियो में एक बैलेंस बनाता है.
यह डॉलर या अन्य करेंसी के उतार-चढ़ाव से हुए नुकसान की भरपाई में मदद करता है. जबकि, 73 फीसदी सेंट्रल बैंकों का मानना है कि आने वाले पांच साल में वैश्विक रिजर्व में डॉलर की हिस्सेदारी घटेगी और उसकी जगह यूरो, चीनी रेनमिनबी और सोना ज्यादा मजबूत संपत्तियां बनेंगी.