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आज के समय में हायर एजुकेशन का खर्च पहले के मुकाबले काफी बढ़ गया है. इंजीनियरिंग, मेडिकल, MBA जैसे प्रोफेशनल कोर्स की फीस लाखों में होती है, जो हर परिवार के लिए आसानी से संभालना आसान नहीं है. ऐसे में बहुत से टैलेंटेड स्टूडेंट्स की मदद करता है Education Loan.
लेकिन लोन सुनते ही दिमाग में एक डर भी आता है कि कहीं पढ़ाई पूरी होने के बाद ये जिंदगी भर का बोझ न बन जाए. तो आखिर सच क्या है? एजुकेशन लोन लेना अच्छा फैसला है या नहीं? चलिए International Students Day के मौके पर आपको आसान भाषा में बताते हैं इस बारे में.
एजुकेशन लोन ऐसा कर्ज होता है जो बैंक छात्रों को पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने के लिए देते हैं. इसमें ट्यूशन फीस, हॉस्टल, किताबें, लैपटॉप और कई जरूरी चीजें शामिल होती हैं. ये कई मामलों में फायदेमंद साबित होता है.
सबसे बड़ा फायदा यही है कि स्टूडेंट पैसों की दिक्कत की वजह से अपने सपने अधूरे नहीं छोड़ते. देश-विदेश के टॉप कॉलेजों में पढ़ाई का मौका मिलता है.
एजुकेशन लोन पर आप जो ब्याज चुकाते हैं, उस पर इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80E के तहत टैक्स छूट का फायदा मिलता है. इस छूट की कोई ऊपरी सीमा नहीं है, यानी आप जितना भी ब्याज भरते हैं, पूरी रकम पर टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं.
समय पर EMI भरने से फाइनेंशियल डिसिप्लिन आता है और क्रेडिट स्कोर अच्छा बनता है, जिससे भविष्य में होम लोन, कार लोन लेना आसान होता है.
लोन आपके करियर का खर्च खुद संभालता है, जिससे परिवार पर आर्थिक तनाव नहीं पड़ता.
सबसे बड़ा फायदा है इसका मोरेटोरियम पीरियड. कोर्स खत्म होने के 6-12 महीने बाद तक EMI शुरू नहीं होती. इससे नौकरी ढूंढने और सेट होने का पूरा समय मिल जाता है.
सही फैसला लेने का तरीका है Return on Investment यानी ROI समझना. मतलब जितना खर्च कर रहे हैं, क्या नौकरी मिलकर उससे ज्यादा कमाई देंगे?
यहां आप पहले 2-3 साल में ही अपना पूरा लोन चुका सकते हैं. टॉप IIMs से MBA करने पर औसत सैलरी ₹20 लाख से ऊपर होती है, जिससे ये फैसला और भी फायदेमंद हो जाता है. ऐसे में MBA के लिए लोन लेना एक बहुत अच्छा निवेश है.
IITs या टॉप कॉलेज से पढ़ाई करने पर ये सैलरी काफी ज्यादा होती है. ऐसे में ये अच्छा ऑप्शन हो सकता है. लेकिन अगर आप एक सामान्य कॉलेज से इंजीनियरिंग कर रहे हैं, तो आपको सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए. ऐसे में लोन चुकाने में 4-5 साल लग सकते हैं.
MBBS के बाद शुरुआती सैलरी (जूनियर रेजिडेंट): ₹60,000 से ₹90,000 प्रति माह (₹7.2 लाख से ₹10.8 लाख सालाना).
मेडिकल की पढ़ाई बहुत महंगी है. लोन की रकम बहुत बड़ी होती है और शुरुआती सैलरी उस हिसाब से कम हो सकती है. हालांकि, स्पेशलाइजेशन (MD/MS) करने के बाद सैलरी काफी बढ़ जाती है. यहां लोन एक जरूरत है, लेकिन इसे चुकाने के लिए एक लंबी और ठोस प्लानिंग की जरूरत होगी.
एजुकेशन लोन न अच्छा है न बुरा, ये सिर्फ एक टूल है. अगर इसे समझदारी से इस्तेमाल किया जाए तो करियर को ऊंचाई दे सकता है, और बिना प्लान के लिया जाए तो बोझ बन सकता है. इसलिए फैसले से पहले ये चेक करें-
कोई भी भारतीय छात्र जो 12वीं पास हो और मान्यता प्राप्त कॉलेज में एडमिशन ले चुका हो.
ट्यूशन फीस, हॉस्टल, किताबें, मेस चार्ज, लैपटॉप, विदेश पढ़ाई के लिए ट्रैवल आदि.
भारत में ₹50 लाख+ और विदेश में ₹1 करोड़+ तक, कोर्स और बैंक पर निर्भर करता है.
₹7.5 लाख तक ज्यादातर बैंक बिना सिक्योरिटी लोन देते हैं.
मोरेटोरियम पीरियड में EMI नहीं चुकानी होती, इसलिए समय मिल जाता है.
Disclaimer- इस आर्टिकल में दी गई जानकारी केवल जागरुकता के मकसद से दी गई है. कोर्स फीस, सैलरी और ब्याज दरें जगह और संस्थान के हिसाब से बदल सकती हैं.