International Students Day: क्‍या सच में Education Loan लेना अच्‍छा फैसला है? डिसीजन से पहले देखें कैलकुलेशन

एजुकेशन लोन आजकल पढ़ाई फाइनेंस करने का आसान तरीका बन चुका है, लेकिन बिना कैलकुलेशन किए लोन ले लेना आगे चलकर बोझ बन सकता है. यहां जानिए कि कब ये फैसला आपके सपनों को उड़ान दे सकता है और कब नहीं.
International Students Day: क्‍या सच में Education Loan लेना अच्‍छा फैसला है? डिसीजन से पहले देखें कैलकुलेशन

आज के समय में हायर एजुकेशन का खर्च पहले के मुकाबले काफी बढ़ गया है. इंजीनियरिंग, मेडिकल, MBA जैसे प्रोफेशनल कोर्स की फीस लाखों में होती है, जो हर परिवार के लिए आसानी से संभालना आसान नहीं है. ऐसे में बहुत से टैलेंटेड स्टूडेंट्स की मदद करता है Education Loan.

लेकिन लोन सुनते ही दिमाग में एक डर भी आता है कि कहीं पढ़ाई पूरी होने के बाद ये जिंदगी भर का बोझ न बन जाए. तो आखिर सच क्या है? एजुकेशन लोन लेना अच्छा फैसला है या नहीं? चलिए International Students Day के मौके पर आपको आसान भाषा में बताते हैं इस बारे में.

एजुकेशन लोन क्यों लेते हैं स्टूडेंट्स?

एजुकेशन लोन ऐसा कर्ज होता है जो बैंक छात्रों को पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने के लिए देते हैं. इसमें ट्यूशन फीस, हॉस्टल, किताबें, लैपटॉप और कई जरूरी चीजें शामिल होती हैं. ये कई मामलों में फायदेमंद साबित होता है.

एजुकेशन लोन के फायदे

टैलेंट पैसों की कमी से नहीं रुकता

सबसे बड़ा फायदा यही है कि स्टूडेंट पैसों की दिक्कत की वजह से अपने सपने अधूरे नहीं छोड़ते. देश-विदेश के टॉप कॉलेजों में पढ़ाई का मौका मिलता है.

ब्याज पर टैक्स छूट

एजुकेशन लोन पर आप जो ब्याज चुकाते हैं, उस पर इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80E के तहत टैक्स छूट का फायदा मिलता है. इस छूट की कोई ऊपरी सीमा नहीं है, यानी आप जितना भी ब्याज भरते हैं, पूरी रकम पर टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं.

क्रेडिट स्कोर मजबूत होता है

समय पर EMI भरने से फाइनेंशियल डिसिप्लिन आता है और क्रेडिट स्कोर अच्छा बनता है, जिससे भविष्य में होम लोन, कार लोन लेना आसान होता है.

माता-पिता पर बोझ कम

लोन आपके करियर का खर्च खुद संभालता है, जिससे परिवार पर आर्थिक तनाव नहीं पड़ता.

मोरेटोरियम पीरियड

सबसे बड़ा फायदा है इसका मोरेटोरियम पीरियड. कोर्स खत्म होने के 6-12 महीने बाद तक EMI शुरू नहीं होती. इससे नौकरी ढूंढने और सेट होने का पूरा समय मिल जाता है.

एजुकेशन लोन के नुकसान

  • पढ़ाई खत्म होते ही जिम्मेदारियां: कोर्स खत्म होते ही EMI शुरू होने की चिंता मानसिक तनाव दे सकती है.
  • 10–15 साल तक EMI: लोन चुकाने की अवधि लंबी होती है, जिससे कमाई का हिस्सा सालों तक EMI में जाता है.
  • कम सैलरी वाली नौकरी तो मुश्किल: अगर कोर्स के बाद अच्छी सैलरी वाली नौकरी न मिले, तो EMI बड़ा दबाव बन जाती है.
  • EMI में देरी से क्रेडिट स्कोर खराब: टाइम पर EMI न भरने पर क्रेडिट स्कोर गिर जाता है और आगे लोन लेना मुश्किल हो जाता है.

Education Loan लेना फायदे का सौदा है या नहीं? (ROI कैलकुलेशन)

सही फैसला लेने का तरीका है Return on Investment यानी ROI समझना. मतलब जितना खर्च कर रहे हैं, क्या नौकरी मिलकर उससे ज्यादा कमाई देंगे?

केस 1: MBA

  • औसत फीस: ₹10-15 लाख
  • लोन: ₹12 लाख
  • ब्‍याज: 9%
  • टेन्‍योर: 7 साल
  • कुल चुकौती: लगभग ₹16.21 लाख
  • शुरुआती सैलरी: ₹7-9 लाख/साल

यहां आप पहले 2-3 साल में ही अपना पूरा लोन चुका सकते हैं. टॉप IIMs से MBA करने पर औसत सैलरी ₹20 लाख से ऊपर होती है, जिससे ये फैसला और भी फायदेमंद हो जाता है. ऐसे में MBA के लिए लोन लेना एक बहुत अच्छा निवेश है.

केस 2: B.Tech

  • फीस (प्राइवेट कॉलेज): ₹8-12 लाख
  • लोन: ₹10 लाख
  • ब्‍याज: 9%
  • टेन्‍योर: 7 साल
  • कुल चुकौती: ₹13.51 लाख
  • शुरुआती सैलरी: ₹4-6 लाख/साल

IITs या टॉप कॉलेज से पढ़ाई करने पर ये सैलरी काफी ज्यादा होती है. ऐसे में ये अच्‍छा ऑप्‍शन हो सकता है. लेकिन अगर आप एक सामान्य कॉलेज से इंजीनियरिंग कर रहे हैं, तो आपको सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए. ऐसे में लोन चुकाने में 4-5 साल लग सकते हैं.

केस 3: MBBS

  • फीस (प्राइवेट कॉलेज): ₹50 लाख-₹1 करोड़
  • लोन: ₹60 लाख
  • ब्‍याज: 9%
  • टेन्‍योर: 7 साल
  • कुल चुकौती: ₹81.08लाख
  • शुरुआती सैलरी: ₹7.2–10.8 लाख/साल

MBBS के बाद शुरुआती सैलरी (जूनियर रेजिडेंट): ₹60,000 से ₹90,000 प्रति माह (₹7.2 लाख से ₹10.8 लाख सालाना).

मेडिकल की पढ़ाई बहुत महंगी है. लोन की रकम बहुत बड़ी होती है और शुरुआती सैलरी उस हिसाब से कम हो सकती है. हालांकि, स्पेशलाइजेशन (MD/MS) करने के बाद सैलरी काफी बढ़ जाती है. यहां लोन एक जरूरत है, लेकिन इसे चुकाने के लिए एक लंबी और ठोस प्लानिंग की जरूरत होगी.

लोन लें या न लें?

एजुकेशन लोन न अच्छा है न बुरा, ये सिर्फ एक टूल है. अगर इसे समझदारी से इस्तेमाल किया जाए तो करियर को ऊंचाई दे सकता है, और बिना प्लान के लिया जाए तो बोझ बन सकता है. इसलिए फैसले से पहले ये चेक करें-

  • कॉलेज और कोर्स का प्लेसमेंट रिकॉर्ड
  • पढ़ाई के बाद संभावित सैलरी
  • ब्याज दर और बैंक की शर्तें
  • सिर्फ उतना लोन लें जितनी जरूरत हो
  • अगर आप पूरी रिसर्च के साथ लोन लेते हैं, तो ये जिंदगी बदलने वाला निवेश साबित हो सकता है.

FAQs

Q1. एजुकेशन लोन कौन ले सकता है?

कोई भी भारतीय छात्र जो 12वीं पास हो और मान्यता प्राप्त कॉलेज में एडमिशन ले चुका हो.

Q2. लोन में क्या-क्या खर्च कवर होते हैं?

ट्यूशन फीस, हॉस्टल, किताबें, मेस चार्ज, लैपटॉप, विदेश पढ़ाई के लिए ट्रैवल आदि.

Q3. कितना एजुकेशन लोन मिल सकता है?

भारत में ₹50 लाख+ और विदेश में ₹1 करोड़+ तक, कोर्स और बैंक पर निर्भर करता है.

Q4. क्या बिना गारंटी (Collateral) के लोन मिलता है?

₹7.5 लाख तक ज्यादातर बैंक बिना सिक्योरिटी लोन देते हैं.

Q5. पढ़ाई के बाद तुरंत नौकरी न मिले तो?

मोरेटोरियम पीरियड में EMI नहीं चुकानी होती, इसलिए समय मिल जाता है.

Disclaimer- इस आर्टिकल में दी गई जानकारी केवल जागरुकता के मकसद से दी गई है. कोर्स फीस, सैलरी और ब्याज दरें जगह और संस्थान के हिसाब से बदल सकती हैं.

Add Zee Business as a Preferred Source
  1. 1
  2. 2
  3. 3
  4. 4
  5. 5
  6. 6