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भारतीय कृषि को टिकाऊ और हरित बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए Indian Overseas Bank (IOB) ने Amul और Richplus के साथ एक त्रिपक्षीय समझौता (MoU) किया है. Indian Overseas Bank ने बताया कि बैंक के इस पार्टनरशिप का मुख्य उद्देश्यल 1 लाख ऑर्गेनिक किसानों को सशक्त बनाना है. इसका सबसे ज्यादा फायदा तमिलनाडु जैसे राज्यों के किसानों को होना है, जहां ऑर्गेनिक खेती तेजी से बढ़ रही है.
Amul और Richplus के साथ इस साझेदारी में IOB ने अपने अकाउंटहोल्डर्स के लिए एक को-ब्रांडेड ऑर्गेनिक फार्मिंग कार्ड भी लॉन्च किया है. इस कार्ड का सीधा फायदा किसानों को होगा, जो कि AMUL के प्रमाणित आउटलेट के माध्यम से रियायती जैविक इनपुट तक पहुँच प्रदान करता है और मुफ़्त कृषिविज्ञानी सहायता, प्रशिक्षण के अवसर और उच्च गुणवत्ता वाले बीजों सहित कई अन्य फायदों को प्राप्त कर सकते हैं.
इस समझौते के तहत किसानों के लिए NPOP प्रमाणन की सुविधा भी प्रदान किया जाता है और उचित मूल्य निर्धारण और बाजार स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बाय-बैक व्यवस्था की गारंटी देता है. टिकाऊ कृषि के लिए एक और प्रतिबद्धता में, IOB जैविक किसानों की जरूरतों के अनुरूप एक समर्पित ऋण योजना “हरित क्रांति” शुरू करेगा.
यह साझेदारी न केवल किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि देश को रासायन मुक्त, जलवायु-लचीला कृषि मॉडल की ओर ले जाने में भी अहम भूमिका निभाएगी. यह कदम निस्संदेह भारत के कृषि भविष्य को हरित और उज्जवल बनाने वाला है.
यह समझौता बैंक के चेन्नई मुख्यालय में संपन्न हुआ, जिसमें IOB की महाप्रबंधक विजया.एन, Amul डेयरी के प्रबंध निदेशक अमित व्यास और Richplus के प्रबंध निदेशक अशोक सारंगन ने हस्ताक्षर किए. इस अवसर पर IOB के प्रबंध निदेशक और CEO अजय कुमार श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे.
अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि "यह साझेदारी हमारे 'विकसित भारत' के विज़न को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है. IOB किसानों को क्रेडिट, जैविक सामग्री, प्रशिक्षण, प्रमाणन और बाज़ार तक पहुंच उपलब्ध कराएगा. हमारा मानना है कि स्वस्थ मिट्टी ही स्वस्थ नागरिकों की नींव है."
Amul के MD अमित व्यास ने इसे भारतीय कृषि के भविष्य को नया आकार देने वाला कदम बताया. उन्होंने कहा कि यह साझेदारी किसानों की आजीविका को बढ़ाने में मदद करेगी और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देगी.
Richplus के MD अशोक सारंगन ने इसे एक उदाहरण बताते हुए कहा कि यह पहल देश में सतत खेती की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी.