बैंकों के लिए RBI का नया फरमान, NPA और प्रोविजनिंग के नियम होंगे सख्त, अप्रैल 2027 से लागू होगा ECL फ्रेमवर्क

भारतीय रिजर्व बैंक ने एसेट क्लासिफिकेशन और प्रोविजनिंग की नई गाइडलाइन जारी कर दी है. इसमें सबसे अहम हिस्सा एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस फ्रेमवर्क को अपनाना है. जानिए क्या हैं नई गाइडलाइन्स.
बैंकों के लिए RBI का नया फरमान, NPA और प्रोविजनिंग के नियम होंगे सख्त, अप्रैल 2027 से लागू होगा ECL फ्रेमवर्क

Reserve Bank of India

भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों के लिए एसेट क्लासिफिकेशन और प्रोविजनिंग के नए नियम जारी किए हैं. इससे पहले अक्टूबर 2025 को इन प्रस्तावों के ड्राफ्ट जारी किए थे. इन नियमों का सबसे अहम हिस्सा 'एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस' (ECL) फ्रेमवर्क को अपनाना है. नया सिस्टम बैंकों को संभावित नुकसान के लिए पहले से बफर तैयार करने की परमिशन देता है. आपको बता दें कि एक्स्पेक्टेड क्रेडिट लॉस का इस्तेमाल बैंक यह अनुमान लगाने के लिए करते हैं कि उन्हें अपने दिए गए लोन पर भविष्य में कितना नुकसान हो सकता है.

इनकर्ड लॉस मॉडल पर काम करते हैं बैंक

RBI के मुताबिक, बैंकों के विरोध और टाइम एक्सेटेंशन की मांग के बावजूद नियम 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होंगे. फिलहाल बैंक इनकर्ड लॉस मॉडल पर काम करते हैं, यानी नुकसान होने के बाद प्रोविजनिंग की जाती है.

Add Zee Business as a Preferred Source

तीन स्टेज में प्रोविजनिंग

  • ECL मॉडल में लोन देते वक्त ही भविष्य के जोखिमों का आकलन कर प्रोविजनिंग शुरू कर दी जाएगी. नए नियमों के तहत बैंकों को अपने लोन को जोखिम के आधार पर तीन कैटेगरी में बांटना होगा.
  • पहली कैटेगरी में वे एसेट होंगे, जिनके क्रेडिट रिस्क में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है. यहां बैंक को केवल 1 साल के संभावित नुकसान के बराबरी प्रोविजनिंग करानी होगी.
  • शुरुआती पहचान के बाद क्रेडिट रिस्क काफी ज्यादा बढ़ गया है, तो उसे दूसरे स्टेज में रखा जाएगा. बैंक को लोकन की पूरी लाइफ के संभावित नुकसान का आकलन कर प्रावधान करना होगा.
  • तीसरी स्टेज में वह लोन आएंगे जो अब पूरी तरह खराब (एनपीए) हो चुके हैं. यहां भी लाइफटाइम क्रेडिट लॉस के मुताबिक प्रोविजनिंग जरूरी होगी.

ECL फ्रेमवर्क के तहत स्टेज और प्रोविजनिंग

स्टेजजोखिम का स्तरप्रोविजनिंग का आधार
Stage 1कम/सामान्य जोखिम12-महीने का अनुमानित नुकसान
Stage 2जोखिम में उल्लेखनीय वृद्धिलाइफटाइम (Lifetime) अनुमानित नुकसान
Stage 3क्रेडिट-इम्पेयर्ड (NPA)लाइफटाइम (Lifetime) अनुमानित नुकसान

मौजूदा नियमों में कोई फेरबदल नहीं

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने NPA की पहचान के मौजूदा नियमों में कोई फेरबदल नहीं किया है. लोन को तभी एनपीए माना जाएगा, जब 90 दिन में एक भी किस्त का भुगतान नहीं किया गया हो.

एनपीए बन जाएंगे सभी लोन अकाउंट

  • फाइनेंशियल डिसिप्लिन बनाए रखने के लिए यह भी साफ किया गया है कि अगर किसी ग्राहक का एक लोन अकाउंट एनपीए होता है, तो बैक में उसके दूसरे सभी लोन खातों को भी एनपीए की कैटेगरी में डाल देगा.
  • फाइनल गाइडलाइन्स के मुताबिक बैंकों को अब जोखिम मापने के लिए साइंटिफिक और आंकड़ों का इस्तेमाल करना होगा.
  • ब्याज दरों की कैलकुलेशन करते वक्त भी सभी तरह के चार्जेज और फीस को भी जोड़ा जाएगा.

Zee Business Live TV यहां पर देखें

हर दिन ऑटोमैटिक होगी एनपीए की पहचान

केंद्रीय बैंक ने जोखिम तय करते वक्त बैंकों को वर्तमान और भविष्य की देश की आर्थिक स्थिति को भी बारीकी से जांचना होगा. नया नियम यह भी जरूरी बनाता है कि एनपीए की पहचान अब ऑटोमैटिक और हर दिन के आखिरी में की जाए. इससे यह पक्का होगा कि लोन की स्थिति केवल इस आधार पर तय हो कि पैसा वापस आया है या नहीं, और इसे किसी भी तरह से टाला न जा सके.

  1. 1
  2. 2
  3. 3
  4. 4
  5. 5
  6. 6